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General Science
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संक्रमण धातुओं (Transition Metals) और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. संक्रमण धातुएं और उनके कई यौगिक उत्कृष्ट उत्प्रेरक गुण प्रदर्शित करते हैं, जिसका मुख्य कारण उनका परिवर्तित ऑक्सीकरण अवस्थाएं दर्शाना और अभिकारकों को अपनी सतह पर अधिशोषित करने के लिए मुक्त संयोजकताएँ प्रदान करना है।
  2. 2. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण लगभग 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे Zirconium) के समान हो जाते हैं, जिससे उन्हें प्रकृति में एक साथ खनिजों से अलग करना अत्यंत कठिन होता है।
  3. 3. जिंक (Zn), कैडमियम (Cd) और मर्करी (Hg) को औपचारिक रूप से d-ब्लॉक के अंतर्गत रखा गया है, परंतु उनके परमाणु या आयनों में d-कक्षक पूर्ण रूप से भरे होने के कारण वे संक्रमण धातुओं के सभी विशिष्ट गुणों, जैसे उत्प्रेरक सक्रियता और रंगीन आयन बनाना, को पूर्णतः प्रदर्शित नहीं करते हैं।
  4. 4. जब संक्रमण धातुओं को प्रबल ऑक्सीकारकों के साथ उच्च तापमान पर गर्म किया जाता है, तो वे हमेशा अपनी न्यूनतम ऑक्सीकरण अवस्था वाले आयनिक यौगिक बनाते हैं क्योंकि उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएं केवल जलीय माध्यम में ही स्थिर रह सकती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। संक्रमण धातुएं अपनी परिवर्तनशील ऑक्सीकरण अवस्थाओं (Variable oxidation states) और रिक्त d-कक्षकों के कारण एक प्रभावी उत्प्रेरक के रूप में कार्य करती हैं। लैंथेनाइड संकुचन के प्रभाव से 4d और 5d श्रेणी के तत्वों (जैसे Zr और Hf) की आकारों में समानता आ जाती है, जिसे 'रासायनिक युग्म' (chemical twins) कहा जाता है। जिंक, कैडमियम और मर्करी के d-कक्षक ($d^{10}$) पूर्ण रूप से भरे होते हैं, इसलिए इन्हें सामान्यतः प्रारूपिक संक्रमण धातु नहीं माना जाता है। कथन 4 गलत है क्योंकि उच्च ऑक्सीकरण अवस्थाएं (जैसे $+7$ मैंगनीज में या $+6$ क्रोमियम में) उच्च ऑक्साइडों के रूप में शुष्क अवस्था में भी अत्यंत स्थिर होती हैं। इस विषय के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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