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General Science
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विद्युत परिपथों में प्रतिरोधों के संयोजन, वीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) और तापीय प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी वीटस्टोन सेतु की संतुलन अवस्था में, गैल्वेनोमीटर और सेल (बैटरी) के स्थानों को यदि आपस में बदल दिया जाए, तो सेतु का संतुलन बिंदु अप्रभावित रहता है और गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
- 2. जब किसी चालक तार को खींचकर उसकी लंबाई को दोगुना कर दिया जाता है, तो उसका विद्युत प्रतिरोध चार गुना हो जाता है और उसकी विशिष्ट प्रतिरोधकता (Resistivity) का मान भी दोगुना हो जाता है क्योंकि प्रतिरोधकता लंबाई के सीधे समानुपाती होती है।
- 3. जूल के तापन नियम ($H = I^2Rt$) के अनुसार, किसी प्रतिरोधक में उत्पन्न होने वाली ऊष्मा प्रवाहित धारा के वर्ग और प्रतिरोध के सीधे समानुपाती होती है, तथा यह इस बात पर निर्भर करती है कि परिपथ में धारा किस दिशा में प्रवाहित हो रही है।
- 4. मीटर सेतु (Meter Bridge) का कार्य सिद्धांत वीटस्टोन सेतु के समंजन पर आधारित होता है, और इसमें प्रयुक्त तार की लंबाई के मापन में होने वाली त्रुटि को न्यूनतम करने के लिए 'शंट' (Shunt) का उपयोग किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि वीटस्टोन सेतु के संतुलन की स्थिति में भुजाओं के प्रतिरोधों का अनुपात समान रहता है, और यदि गैल्वेनोमीटर तथा सेल के स्थानों को आपस में बदल दिया जाए, तब भी संतुलन की शर्त पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। कथन 2 गलत है क्योंकि तार को खींचने पर उसकी लंबाई बढ़ने और क्षेत्रफल घटने से प्रतिरोध तो चार गुना हो जाता है, परंतु 'विशिष्ट प्रतिरोधकता' (Resistivity) एक आंतरिक गुण है जो केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, लंबाई या क्षेत्रफल पर नहीं। कथन 3 गलत है क्योंकि जूल के तापन नियम में उत्पन्न ऊष्मा धारा के वर्ग के समानुपाती अवश्य होती है, किंतु यह धारा की दिशा पर निर्भर नहीं करती (यह एक अदिश प्रभाव है)। कथन 4 गलत है क्योंकि मीटर सेतु वीटस्टोन सेतु पर आधारित है, लेकिन शंट का उपयोग गैल्वेनोमीटर को उच्च धाराओं से बचाने या उसका परिसर बढ़ाने के लिए किया जाता है, न कि लंबाई के मापन की त्रुटि को न्यूनतम करने के लिए। विकिपीडिया संदर्भ।
Related Questions
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण करने की क्षमता रखती हैं, और सभी धनावेशित आयन तथा अष्टक-अपूर्ण यौगिक (जैसे $BF_3$) उत्कृष्ट लुईस अम्ल के रूप में कार्य करते हैं।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, एक संयुग्मी अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में केवल एक प्रोटॉन ($H^+$) का अंतर होता है, और किसी प्रबल अम्ल का संयुग्मी क्षार अत्यधिक दुर्बल होता है।
3. जब किसी दुर्बल अम्ल के लवण को उसके प्रबल क्षार के साथ जल में घोला जाता है, तो जल-अपघटन (Hydrolysis) के फलस्वरूप प्राप्त जलीय विलयन की प्रकृति अम्लीय होती है और विलयन का pH मान 7 से कम होता है।
4. जल के स्व-आयनन (Self-ionization) के कारण, शुद्ध जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) तापमान पर निर्भर करता है, और तापमान बढ़ाने पर $K_w$ का मान बढ़ने से शुद्ध जल का pH मान 7 से कम हो जाता है, यद्यपि वह रासायनिक रूप से उदासीन ही रहता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ऊष्मागतिकी का कौन सा नियम शून्य डिग्री तापमान पर एंट्रॉपी की बात करता है?
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हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था (Hardy-Weinberg Equilibrium) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हार्डी-वेनबर्ग सिद्धांत के अनुसार, एक बड़े यादृच्छिक रूप से संभोग करने वाले जनसमुदाय में जीन आवृत्तियाँ (Allele Frequencies) पीढ़ियों तक स्थिर और अचर बनी रहती हैं, बशर्ते कि उस पर उत्परिवर्तन, प्राकृतिक चयन, आनुवंशिक अपवाह, जीन प्रवाह और गैर-यादृच्छिक संभोग जैसे विकासवादी कारक प्रभावी न हों।
2. यदि किसी द्विगुणिता (Diploid) जनसमुदाय में एक निश्चित जीन लोकी पर दो एलील 'A' और 'a' हैं, जिनकी आवृत्तियाँ क्रमशः $p$ और $q$ हैं, तो इस जनसमुदाय में विषमयुग्मजी (Heterozygous, Aa) जीनोटाइप की अपेक्षित आवृत्ति $2pq$ द्वारा दी जाती है।
3. प्राकृतिक चयन (Natural Selection) की प्रक्रिया हमेशा हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था को बनाए रखती है क्योंकि यह जनसमुदाय के सभी सदस्यों की उत्तरजीविता और प्रजनन क्षमता को समान रूप से बढ़ावा देती है।
4. आनुवंशिक अपवाह (Genetic Drift) एक ऐसा प्रक्रम है जो छोटे जनसमुदायों में यादृच्छिक कारणों से एलील आवृत्तियों में महत्वपूर्ण परिवर्तन उत्पन्न करता है, जिससे हार्डी-वेनबर्ग साम्यावस्था भंग हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि किसी सूक्ष्म कण की स्थिति और उसके संवेग का एक ही समय में पूर्ण और यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और इनकी अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक स्थिरांक के आधे ($h/4\pi$) से कम या उसके बराबर नहीं हो सकता, बल्कि यह हमेशा उसके बराबर या अधिक होता है।
2. किसी बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में इलेक्ट्रॉन के ऊर्जा स्तर को पूर्ण रूप से परिभाषित करने के लिए चार क्वांटम संख्याओं की आवश्यकता होती है, जिनमें 'दिग्ंशी क्वांटम संख्या' (Azimuthal quantum number, $l$) कक्षक के त्रिविमीय विन्यास (Spatial orientation) को दर्शाती है, जबकि 'चुंबकीय क्वांटम संख्या' ($m_l$) उपकोश के कोणीय संवेग और उपकोश के आकार को निर्धारित करती है।
3. पाउली का अपवर्जन नियम (Pauli's exclusion principle) यह कहता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं के मान सर्वसम (Identical) नहीं हो सकते हैं, जिसका अर्थ है कि एक ही कक्षक में अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं और उनके चक्रण (Spin) विपरीत दिशा में होने चाहिए।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और परिपथ (Circuit) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार का प्रतिरोध ($R$) उसकी लंबाई ($l$) के सीधे आनुपातिक और उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल ($A$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है, तथा प्रतिरोधकता ($
ho$) केवल पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, उसके आयामों पर नहीं।
2. किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी भी संधि पर मिलने वाली सभी विद्युत धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
3. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (लूप नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जो यह बताता है कि किसी बंद विद्युत परिपथ के चारों ओर विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग लागू किए गए कुल विद्युत वाहक बल (EMF) के बराबर होता है।
4. श्रेणीक्रम (Series combination) में जुड़े प्रतिरोधकों का तुल्य प्रतिरोध परिपथ के सबसे बड़े व्यक्तिगत प्रतिरोध से भी अधिक होता है, और इस संयोजन में प्रत्येक प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली विद्युत धारा का मान भिन्न-भिन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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