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विद्युत परिपथों और किर्चॉफ के नियमों (Kirchhoff's Rules) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किर्चॉफ का प्रथम नियम (धारा नियम या KCL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी संधि (Junction) पर मिलने वाली समस्त धाराओं का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
  2. 2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (वोल्टेज नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप (Closed loop) में कुल विभव परिवर्तनों का बीजगणितीय योग शून्य होता है।
  3. 3. जब एक ही मान के आंतरिक प्रतिरोध वाले कई सेलों को समांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में काफी कम हो जाता है, और यह संयोजन तब अत्यधिक उपयोगी होता है जब बाह्य प्रतिरोध का मान आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक होता है।
  4. 4. किसी Wheatstone Bridge के संतुलन की स्थिति में, गैल्वेनोमीटर में कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है, और यह विधि अज्ञात प्रतिरोध को अत्यधिक यथार्थता के साथ मापने के लिए उपयोग की जाती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि किर्चॉफ का धारा नियम (KCL) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है। कथन 2 सही है क्योंकि किर्चॉफ का वोल्टेज नियम (KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम का पालन करता है। कथन 3 गलत है; सेलों के समांतर संयोजन (Parallel combination) में कुल धारा का मान तब अधिकतम होता है जब बाह्य प्रतिरोध का मान आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत कम होता है (न कि अधिक)। यदि बाह्य प्रतिरोध बहुत अधिक है, तो श्रेणी संयोजन (Series combination) अधिक प्रभावी होता है। कथन 4 सही है क्योंकि संतुलन की स्थिति में वीटस्टोन सेतु का गैल्वेनोमीटर शून्य विक्षेप दर्शाता है, जिससे अज्ञात प्रतिरोध की सटीक गणना की जाती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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