BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
1 views

नाभिकीय भौतिकी और रेडियोधर्मिता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान, नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन का प्रोटॉन, एक इलेक्ट्रॉन ($e^-$) और एक एंटीन्यूट्रिनो ($ar{ u}$) में रूपांतरण होता है, जो कमजोर नाभिकीय बल (Weak Nuclear Force) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
  2. 2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रिया में अत्यंत उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता होती है, क्योंकि दो हल्के नाभिकों को एक-दूसरे के निकट लाने पर उनके बीच लगने वाला कूलॉम प्रतिकर्षीय बल (Coulombic repulsive force) प्रबल होता है, जिसे पार करने के लिए उच्च गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
  3. 3. मंदक (Moderator) के रूप में प्रयुक्त होने वाले भारी जल ($D_2O$) या ग्रेफाइट का मुख्य कार्य नाभिकीय रिएक्टर में विखंडन के दौरान उत्पन्न तीव्रगामी न्यूट्रॉनों की गति को मंद करना है ताकि वे यूरेनियम-235 के साथ प्रभावी ढंग से विखंडन अभिक्रिया जारी रख सकें।
  4. 4. द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) और बंधन ऊर्जा (Binding Energy) के बीच का संबंध यह दर्शाता है कि किसी स्थायी नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसके व्यक्तिगत न्यूक्लियनों (प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों) के कुल द्रव्यमान से अधिक होता है, जिसके कारण ऊर्जा का उत्सर्जन होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: बीटा-क्षय (विशेषकर $eta^-$ क्षय) में नाभिक के भीतर एक न्यूट्रॉन प्रोटॉन, इलेक्ट्रॉन और एंटीन्यूट्रिनो में बदलता है, जो कमजोर नाभिकीय अन्योन्यक्रिया द्वारा संचालित होता है। कथन 2 सही है: नाभिकीय संलयन के लिए उच्च तापमान और दाब अनिवार्य हैं क्योंकि धनात्मक आवेशित नाभिकों के बीच मजबूत कूलॉम प्रतिकर्षण बल को पार करना होता है। कथन 3 सही है: विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार, नाभिकीय रिएक्टर में मंदक का कार्य तीव्र न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करना है ताकि विखंडन श्रृंखला अभिक्रिया अनियंत्रित न हो। कथन 4 गलत है क्योंकि किसी स्थायी नाभिक का वास्तविक द्रव्यमान उसके व्यक्तिगत न्यूक्लियनों के कुल द्रव्यमान से *कम* होता है, और इसी द्रव्यमान अंतर को 'द्रव्यमान क्षति' कहा जाता है, जो बंधन ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है।
Share:

Related Questions

दूध की शुद्धता मापते हैं? परमाणु बम का सिद्धांत? प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक होने पर पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, और इस स्थिति में विरल माध्यम में अपवर्तित किरण का वेग शून्य हो जाता है। 2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो वह लेंस अपनी प्रकृति बदल लेता है और अवतल लेंस (अपसारी लेंस) की तरह व्यवहार करने लगता है। 3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु को अवतल दर्पण के वक्रता केंद्र ($C$) और फोकस ($F$) के बीच रखा जाता है, तो उसका वास्तविक, उल्टा और वस्तु से बड़ा प्रतिबिंब वक्रता केंद्र से परे (परे $C$) बनता है। 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन के दौरान, परावर्तित प्रकाश की कुल तीव्रता आपतित प्रकाश की तीव्रता के 100% के बराबर होती है क्योंकि इस परिघटना में माध्यम द्वारा प्रकाश का कोई अवशोषण या आंशिक अपवर्तन नहीं होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) तथा उनके रासायनिक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि के कारण परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) सामान्यतः घटती है, किंतु उत्कृष्ट गैसों (Noble gases) की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके पूर्ण भरे कक्षकों के कारण उनके समूह के अन्य तत्वों की तुलना में अधिक होती है। 2. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में सर्वाधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से उपस्थित इलेक्ट्रॉनों के बीच प्रतिकर्षीय बल न्यूनतम होता है। 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक के तत्व) के प्रथम संक्रमण श्रेणी में परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ परमाणु त्रिज्याओं में होने वाला संकुचन बहुत कम होता है, जिसका मुख्य कारण 3d कक्षकों का आवरण प्रभाव (Shielding effect) अत्यंत दुर्बल होना है। 4. किसी परमाणु की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) एक आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ती है और वर्ग में नीचे जाने पर घटती है, तथा पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता सभी तत्वों में सर्वाधिक होती है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? चुम्बकीय पदार्थों के वर्गीकरण और विद्युत चुंबकीय प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रतिचुंबकीय पदार्थों (Diamagnetic substances) की चुंबकीय प्रवृत्ति (Magnetic Susceptibility) का मान ऋणात्मक और ताप पर निर्भर नहीं करता है, जबकि अनुचुंबकीय (Paramagnetic) पदार्थों की चुंबकीय प्रवृत्ति क्यूरी के नियम (Curie's Law) का पालन करते हुए परम ताप के व्युत्क्रमानुपाती होती है। 2. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी परिपथ में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस परिपथ से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय-दर के सीधे समानुपाती होता है, तथा इसकी दिशा लेंस के नियम द्वारा निर्धारित होती है जो ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का कठोरता से अनुपालन करता है। 3. 'स्वप्रेरण गुणांक' (Coefficient of Self-Inductance) का SI मात्रक 'हेनरी' होता है, जो कि वेबर प्रति ऐम्पियर के तुल्य है, और यह किसी कुंडली की वह ज्यामितीय विशेषता है जो उसमें प्रवाहित होने वाली धारा के मान में होने वाले परिवर्तन का विरोध करती है। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.