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General Science
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त समूहों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. रक्त प्लाज्मा में पाए جانے والے प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) 'इम्युनोग्लोबुलिन' (Immunoglobulins) श्रेणी के प्रोटीन होते हैं, और एबीओ (ABO) रक्त समूह प्रणाली में, रक्त समूह 'O' वाले व्यक्ति के प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों एंटीबॉडी अनुपस्थित होते हैं।
- 2. 'Rh कारक' (Rhesus factor) की खोज लैंडस्टीनर और विनर द्वारा की गई थी, और Rh-असंगति (Rh-incompatibility) की समस्या तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-धनात्मक (Rh+) पिता और Rh-ऋणात्मक (Rh-) माता से उत्पन्न होने वाला दूसरा या उसके बाद का गर्भ Rh+ होता है, जिससे गर्भभ्रूण रक्ताणुकोशाकता (Erythroblastosis fetalis) हो सकती है।
- 3. मानव हृदय के चक्र (Cardiac Cycle) के दौरान, निलय डायस्टोल (Ventricular diastole) के आरंभ में 'अर्धचंद्रাকার कपाट' (Semilunar valves) बंद हो जाते हैं, जिससे हृदय की दूसरी ध्वनि (Dub) उत्पन्न होती है, जो पहली ध्वनि (Lub) की तुलना में अधिक तीव्र और कम अवधि की होती है।
- 4. रक्त स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया में, फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में बदलने के लिए थ्रॉम्बोप्लास्टिन, कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) और प्रोथ्रोम्बिन की उपस्थिति अनिवार्य होती है, जिसमें थ्रोम्बिन एंजाइम उत्प्रेरक का कार्य करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि एबीओ (ABO) रक्त समूह प्रणाली में, रक्त समूह 'O' वाले व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर कोई एंटीजन (A या B) नहीं होता है, लेकिन उनके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B **दोनों** प्राकृतिक एंटीबॉडी (Agglutinins) उपस्थित होते हैं (तथा रक्त समूह 'AB' वाले प्लाज्मा में कोई एंटीबॉडी नहीं होता)। कथन 2 सत्य है; Rh कारक की खोज कार्ल लैंडस्टीनर और अलेक्जेंडर विनर ने की थी और Rh-असंगति के कारण 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस' (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति उत्पन्न होती है। कथन 3 असत्य है क्योंकि हृदय की दूसरी ध्वनि (Dub) कम तीव्र (soft) और अधिक अवधि (longer duration) की होती है, जबकि पहली ध्वनि (Lub) तेज और कम अवधि की होती है। कथन 4 पूर्णतः सत्य है; रक्त के थक्के जमने की कैस्केड प्रक्रिया में प्रोथ्रोम्बिन, कैल्शियम आयनों और थ्रॉम्बोप्लास्टिन की अंतःक्रिया से थ्रॉम्बन बनता है जो फाइब्रिनोजेन को फाइब्रिन में बदलता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में क्रमिक वृद्धि होती है, जिसके फलस्वरूप परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की परमाणु त्रिज्या (वांडरवाल्स त्रिज्या) उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या की तुलना में बड़ी होती है।
2. ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है।
3. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाला नया इलेक्ट्रॉन पहले से उपस्थित 2p इलेक्ट्रונים से अधिक प्रतिकर्षण अनुभव करता है।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण 4f कक्षकों का दुर्बल आवरण प्रभाव (Shielding effect) है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाश?
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पृथ्वी के चुम्बकत्व और चुंबकीय तत्वों (Magnetic Elements) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी स्थान पर पृथ्वी के कुल चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता का क्षैतिज घटक ($B_H$) और उसका ऊर्ध्वाधर घटक ($B_V$) परस्पर लंबवत होते हैं, तथा यदि नमन कोण (Angle of Dip) $\theta$ हो, तो $B_H = B \cos\theta$ और $B_V = B \sin\theta$ द्वारा व्यक्त किया जाता है।
2. चुंबकीय विषुवत रेखा (Magnetic Equator) पर नमन कोण का मान $90^\circ$ होता है, जिसके कारण वहाँ पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र का क्षैतिज घटक शून्य हो जाता है और केवल ऊर्ध्वाधर घटक ही शेष रहता है।
3. चुंबकीय उत्तर ध्रुव और भौगोलिक उत्तर ध्रुव एक ही बिंदु पर संपाती (Coincident) होते हैं, इसलिए एक कंपास सुई हमेशा भौगोलिक उत्तर-दक्षिण दिशा को सटीक रूप से दर्शाती है बिना किसी चुंबकीय विचलन (Declination) के।
4. पृथ्वी का क्रोड (Core) पिघली हुई अवस्था में लोहे और निकेल जैसे चुंबकीय पदार्थों के संवहन धाराओं (Convection Currents) के कारण 'डाइनमो प्रभाव' उत्पन्न करता है, जो पृथ्वी के मुख्य चुंबकीय क्षेत्र के लिए उत्तरदायी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं के निष्कर्षण (Metallurgical Processes) और उनके अयस्क के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) प्रक्रिया में सांद्रित अयस्क को वायु की नियमित या नियंत्रित आपूर्ति के साथ उसके गलनांक से कम ताप पर तीव्रता से गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग आमतौर पर सल्फाइड अयस्कों को ऑक्साइड अयस्कों में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
2. 'निस्तापन' (Calcination) प्रक्रिया के दौरान कार्बोनेट और हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को वायु की अनुपस्थिति या सीमित आपूर्ति में गर्म किया जाता है, जिससे वाष्पशील अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और अयस्क सरलता से छिद्रयुक्त ऑक्साइड में बदल जाता है।
3. 'प्रगालन' (Smelting) एक ऐसी उच्च-तापीय प्रक्रिया है जिसमें भर्जित या निस्पापित अयस्क को किसी उपयुक्त गलनक (Flux) और कोक (कार्बन) के साथ उसके गलनांक से ऊपर गर्म किया जाता है, जिससे धातु का अपचयन होकर वह द्रवित अवस्था में प्राप्त होती है और साथ ही अशुद्धियाँ 'धातुमल' (Slag) के रूप में अलग हो जाती हैं।
4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हैरॉल्ट प्रक्रम में क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) का मुख्य उपयोग ऐलुमिनियम ऑक्साइड के गलनांक को कम करने के लिए किया जाता है, क्योंकि शुद्ध एलुमिना का गलनांक बहुत उच्च होता है और यह विद्युत का बहुत अच्छा चालक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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इंद्रधनुष में सबसे ऊपर कौन सा रंग होता है?
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