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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर काटते हुए उपग्रह की कुल ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है।
  2. 2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की परिक्रमण अवधि ठीक 24 घंटे होती है और यह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में चक्कर लगाता है।
  3. 3. यदि पृथ्वी अपने वर्तमान अक्षीय घूर्णन की कोणीय चाल को बढ़ा दे, तो भूमध्य रेखा पर रखी वस्तुओं के भार में आभासी कमी आएगी, किंतु उपग्रहों की कक्षीय चाल पर इसका कोई सीधा प्रभाव नहीं पड़ता क्योंकि यह केवल केंद्रीय पिंड के द्रव्यमान और उपग्रह की त्रिज्या पर निर्भर करती है।
  4. 4. किसी उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों ही पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि किसी भी गुरुत्वाकर्षणीय रूप से बंधे हुए निकाय (जैसे उपग्रह) की कुल ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) ऋणात्मक होती है, जो उसके स्थायित्व को प्रदर्शित करती है। कथन 2 असत्य है क्योंकि भू-स्थिर उपग्रह पश्चिम से पूर्व की ओर चक्कर लगाते हैं, न कि पूर्व से पश्चिम। कथन 3 असत्य है क्योंकि पृथ्वी के घूर्णन की चाल बढ़ने से उपग्रहों की कक्षीय चाल प्रभावित नहीं होती, लेकिन भूमध्य रेखा पर रखे पिंडों का आभासी भार शून्य हो सकता है यदि कोणीय वेग एक निश्चित सीमा तक पहुँच जाए। कथन 4 पूर्णतः सत्य है कि उपग्रह के अंदर भारहीनता की स्थिति मुक्त पतन (Free fall) के कारण उत्पन्न होती है जहाँ अभिलंब प्रतिक्रिया बल शून्य हो जाता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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