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General Science
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं में कोशिका विभाजन (Cell Division) और कोशिका चक्र (Cell Cycle) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कोशिका चक्र की 'एस-अवस्था' (S-phase) के दौरान डीएनए का प्रतिकृतियन (Replication) होता है, जिसके परिणामस्वरूप यदि कोशिका में जी-1 अवस्था ($ ext{G}_1 ext{ phase}$) में डीएनए की मात्रा '2C' थी, तो एस-अवस्था के पश्चात यह मात्रा बढ़कर '4C' हो जाती है, किंतु गुणसूत्रों की संख्या (Ploidy level) अपरिवर्तित रहती है।
- 2. सूत्री विभाजन (Mitosis) की 'मेटाफेज' (Metaphase) अवस्था में गुणसूत्र अपने अधिकतम संकुचित रूप में दिखाई देते हैं, और इस दौरान स्पिंडल फाइबर (तर्कु तंतु) गुणसूत्र के सेंट्रोमियर पर स्थित 'काइनेटोकोर' (Kinetochore) प्रोटीन संरचना से जुड़ जाते हैं।
- 3. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैचिटीन (Pachyneteen/Pachytene) उप-अवस्था में समजात गुणसूत्रों के गैर-भ्रातृ गुणसूत्रिका (Non-sister chromatids) के बीच आनुवंशिक सामग्री का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है और यह 'रिकॉम्बिनेज' एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होता है।
- 4. अर्धसूत्री विभाजन के दौरान समजात गुणसूत्रों का पृथक्करण और युग्मकों (Gametes) में गुणसूत्रों की संख्या का आधा होना हमेशा 'एनाफेज-II' (Anaphase-II) के दौरान होता है, जबकि एनाफेज-I में केवल सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। कोशिका चक्र की S-अवस्था (संश्लेषण चरण) में डीएनए का प्रतिकृतियन होता है, जिससे डीएनए की मात्रा '2C' से दोगुनी होकर '4C' हो जाती है, लेकिन गुणसूत्रों की संख्या वही (द्विगुणित अवस्था में समान) रहती है। मेटाफेज अवस्था में गुणसूत्रों का संघनन चरम पर होता है और वे काइनेटोकोर के माध्यम से स्पिंडल फाइबर से जुड़ते हैं। पैचिटीन अवस्था में क्रॉसिंग ओवर की प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनेज' (Recombinase) एंजाइम की सहायता से होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि समजात गुणसूत्रों का पृथक्करण (Homologous chromosomes separation) 'एनाफेज-I' (Anaphase-I) के दौरान होता है, न कि एनाफेज-II में; एनाफेज-II में सिस्टर क्रोमैटिड्स अलग होते हैं। कोशिका विभाजन और इसके विभिन्न चरणों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर ऊर्जा के मुक्त होने की प्रक्रिया 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी' कहलाती है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन (F) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के क्लोरीन (Cl) से अधिक होता है।
2. 'लैंथानाइड संकुचन' (Lanthanoid Contraction) का मुख्य कारण 4f-इलेक्ट्रॉनों का अत्यंत दुर्बल परिरक्षण प्रभाव (Shielding effect) है, जिसके परिणाम स्वरूप 5d श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम) का आकार ठीक उनके ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम) के लगभग समान हो जाता है।
3. ऑक्साइडों की प्रकृति के संबंध में, आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर तत्वों के ऑक्साइडों का अम्लीय गुण सामान्यतः बढ़ता है, जबकि समूह में ऊपर से नीचे आने पर धात्विक ऑक्साइडों की क्षारीय प्रकृति घटती जाती है।
4. उत्कृष्ट गैसों (Noble Gases) की आयनन एंथैल्पी अपने संबंधित आवर्त में सर्वाधिक होती है, जबकि उनकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी का मान धनात्मक होता है क्योंकि इलेक्ट्रॉन जोड़ने के लिए ऊर्जा देनी पड़ती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत धारा, प्रतिरोध और विभिन्न सर्किटConfigurations के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (प्रतिरोधकता) उसके तापमान पर निर्भर करता है; धात्विक चालकों का तापमान बढ़ाने पर उनकी प्रतिरोधकता बढ़ती है, जबकि अर्धचालकों (Semiconductors) के मामले में तापमान बढ़ाने पर प्रतिरोधकता घटती है।
2. जब विभिन्न प्रतिरोधकों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध के मान से अधिक होता है, और प्रत्येक प्रतिरोधक के सिरों पर विभवांतर भिन्न-भिन्न होता है।
3. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) एक ऐसा विद्युत परिपथ है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत यथार्थता से मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
4. घरेलू विद्युत वायरिंग में सभी विद्युत उपकरणों को समानांतर क्रम में जोड़ा जाता है, ताकि यदि एक उपकरण खराब हो जाए या बंद कर दिया जाए, तो अन्य उपकरणों के कार्य पर कोई प्रभाव न पड़े और सभी को समान कार्यशील वोल्टेज मिल सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. टेरिडोफाइट्स (Pteridophytes) प्रथम ऐसे स्थलीय पौधे हैं जिनमें संवहन ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) पाए जाते हैं, किंतु इनमें बीज अनुपस्थित होते हैं और इनका मुख्य पादप शरीर बीजाणुद्भिद (Sporophyte) होता है।
2. C3 पौधों में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की प्रक्रिया के दौरान 'रुबिस्को' (RuBisCO) एंजाइम कार्बोक्सिलेज़ के रूप में कार्य करने के बजाय ऑक्सीजिनेज़ के रूप में कार्य करता है, जिससे एटीपी का उपभोग होता है और कोई शर्करा या ऊर्जा का लाभ नहीं होता है।
3. 'साइटोकाइनिन' (Cytokinin) मुख्य रूप से जड़ों के अग्रभाग पर संश्लेषित होता है, जहाँ से यह जाइलम के माध्यम से ऊपर की ओर प्रवाहित होता है और शीर्ष प्रमुखता (Apical Dominance) को बढ़ावा देता है तथा पार्श्व कलिकाओं की वृद्धि को रोकता है।
4. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये पौधे आमतौर पर नम और छायादार क्षेत्रों में उगते हैं, लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल की उपस्थिति अनिवार्य होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव रोगों और उनके रोगजनकों, संचरण तंत्र तथा नैदानिक लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'मलेरिया' (Malaria) प्लाज्मोडियम प्रजाति के प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है, और इसके गंभीर रूप (प्लाज्मोडियम फैल्ciparum) में रोगी को 'ब्लैकवाटर फीवर' हो सकता है जिसमें हीमोग्लोबिनयूरिया (मूत्र के साथ हीमोग्लोबिन का आना) की स्थिति उत्पन्न होती है।
2. 'डिफ्थीरिया' (Diphtheria) कॉर्नेबैक्टीरियम डिफ्थिरियाई (Corynebacterium diphtheriae) नामक ग्राम-पॉजिटिव जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली में एक स्रावी धूसर रंग की 'झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है और इसके एक्सोटॉक्सिन से हृदय तथा तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पहुँचती है।
3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक अंतःकोशिकी जीवाणु के कारण होने वाला नेत्र संक्रमण है, जो कार्निया और कंजंक्टिवा को प्रभावित करता है और लंबे समय तक संक्रमण रहने से पलकें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं (ट्रिकियासिस)।
4. 'लेप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे के कारण होता है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाता है, जबकि इसकी परिधीय तंत्रिकाओं और त्वचा पर कोई संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर काटते हुए उपग्रह का कोणीय संवेग (Angular Momentum) नियत रहता है, क्योंकि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा लगाया जाने वाला बल आघूर्ण (Torque) शून्य होता है।
2. यदि पृथ्वी की सतह के निकट परिक्रमा कर रहे किसी उपग्रह का कक्षीय वेग उसके वर्तमान मान का $\sqrt{2}$ गुना (यानि लगभग 41.4% की वृद्धि) कर दिया जाए, तो वह उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर पलायन कर जाएगा।
3. तुल्यकालिक उपग्रह (Geostationary satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किलोमीटर होती है, और यह उपग्रह विषुवत वृत्त के ऊपर पश्चिम से पूर्व दिशा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव होता है, जिसका प्रमुख कारण यह है कि अंतरिक्ष में पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल पूरी तरह से शून्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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