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General Science
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले 'माइटोकॉन्ड्रिया' और 'प्लास्टिड' (लवक) के संरचनात्मक तथा कार्यात्मक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. माइटोकॉन्ड्रिया और हरित लवक (Chloroplast) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त (Semi-autonomous) कोशिकांग हैं जिनमें स्वयं का परिपत्र (Circular) डीएनए, आरएण्ड (RNA) और 70S प्रकार के राइबोसोम उपस्थित होते हैं, जिससे ये अपने कुछ आवश्यक प्रोटीनों का संश्लेषण स्वयं कर सकते हैं।
- 2. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर उंगली जैसी अनेक अंगुलानुमा उभार होते हैं जिन्हें 'क्रिस्टी' (Cristae) कहा जाता है, और ये सतह के क्षेत्रफल को बढ़ाते हैं जहाँ इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (ETS) और ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के माध्यम से एटीपी का उत्पादन होता है।
- 3. हरित लवक के भीतर पाई जाने वाली चपटी झिल्लीयुक्त थैलियों को 'थाइलाकोइड्स' (Thylakoids) कहते हैं, जो सिक्कों के ढेरों के समान संरचनाएँ बनाती हैं जिन्हें 'स्ट्रोमा लैमिली' कहा जाता है, जहाँ प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश-अस्वतंत्र (अंधकार) अभिक्रियाएँ होती हैं।
- 4. माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में पाइरुविक अम्ल के ऑक्सीकरण के लिए आवश्यक क्रेब्स चक्र (TCA Cycle) के सभी एंजाइम पाए जाते हैं, सिवाय 'सक्सीनेट डिहाइड्रोजनेज' एंजाइम के जो इसकी आंतरिक झिल्ली पर स्थित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
यूकेरियोटिक कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया और प्लास्टिड (लवक) महत्वपूर्ण अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग हैं। कथन 1 सही है क्योंकि इन दोनों अंगों में स्वयं का वृत्ताकार (Circular) डीएनए, 70S राइबोसोम और प्रोटीन संश्लेषण तंत्र होता है। कथन 2 सही है; माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली पर 'क्रिस्टी' होती है जो एटीपी संश्लेषण के लिए क्षेत्रफल बढ़ाती है। कथन 3 गलत है क्योंकि थाइलाकोइड्स के ढेर को 'ग्रेना' (Grana) कहा जाता है, न कि 'स्ट्रोमा लैमिली'; इसके अलावा, प्रकाश संश्लेषण की प्रकाश-स्वतंत्र (अंधकार) अभिक्रियाएँ स्ट्रोमा में होती हैं जबकि प्रकाश-निर्भर अभिक्रियाएँ ग्रेना में होती हैं। कथन 4 बिल्कुल सही है क्योंकि क्रेब्स चक्र के अधिकांश एंजाइम माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में घुलनशील रूप में होते हैं, जबकि सक्सीनेट डिहाइड्रोजनेज आंतरिक माइटोकॉन्ड्रियल झिल्ली से जुड़ा होता है।
Related Questions
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मानव शरीर के रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त वाहिकाओं की क्रियाविधि और कार्डियक चक्र (Cardiac Cycle) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महाधमनी (Aorta) से निकलने वाली दैहिक धमनियों की भित्तियाँ शिराओं की तुलना में अधिक मोटी और अधिक पेशीय होती हैं, क्योंकि उन्हें हृदय के निलय (Ventricles) द्वारा उच्च दाब पर पंप किए गए रक्त के झटकों को सहन करना पड़ता है और रक्त प्रवाह को नियंत्रित करना होता है।
2. हृदय चक्र के दौरान, जब निलय का संकुचन (Ventricular systole) शुरू होता है, तो त्रिवलनी (Tricuspid) और द्विवलनी (Mitral) वाल्व रक्त के दबाव के कारण बंद हो जाते हैं, जिससे हृदय की पहली ध्वनि 'लब' (Lub) उत्पन्न होती है, जबकि अर्धचंद्राकार वाल्व (Semilunar valves) इस समय खुले रहते हैं ताकि रक्त धमनियों में जा सके।
3. कोरोनरी साइनस (Coronary sinus) अशुद्ध रक्त को सीधे दाएं आलिंद (Right atrium) में लाता है, और यह रक्त मुख्य रूप से स्वयं हृदय की पेशीय दीवार (Myocardium) से अपशिष्ट और कार्बन डाइऑक्साइड युक्त होकर आता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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नाभिकीय भौतिक और कण भौतिकी (Nuclear and Particle Physics) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. द्रव्यमान क्षति (Mass Defect) किसी नाभिक के वास्तविक द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत प्रोटॉनों तथा न्यूट्रॉनों के विराम द्रव्यमानों के योग के बीच का अंतर होती है, जो आइंस्टीन के द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता सिद्धांत के अनुसार 'बंधन ऊर्जा' (Binding Energy) के रूप में विमुक्त होती है।
2. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) की प्रक्रिया मुख्य रूप से अत्यंत उच्च तापमान और दाब पर होती है क्योंकि समान धaves आवेश वाले दो नाभिकों के बीच के कूलम्बिक प्रतिकार बल (Coulombic repulsion) को पार करने के लिए पर्याप्त गतिज ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
3. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले पॉजिट्रॉन ($e^+$) और इलेक्ट्रॉन ($e^-$) वास्तव में दुर्बल नाभिकीय बल (Weak Nuclear Force) के माध्यम से एक न्यूट्रॉन के प्रोटॉन में या इसके विपरीत रूपांतरण का परिणाम होते हैं।
4. मंदक (Moderator) के रूप में प्रयुक्त होने वाले भारी जल ($D_2O$) या ग्रेफाइट का मुख्य कार्य नाभिकीय रिएक्टर में विखंडन के दौरान उत्पन्न तीव्र गति वाले न्यूट्रॉनों की गति को बढ़ाना होता है ताकि श्रृंखला अभिक्रिया तेजी से आगे बढ़ सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय (Stomach) की भित्ति में पाई जाने वाली पेप्टिक या मुख्य कोशिकाएँ (Chief cells) निष्क्रिय प्रोएंजाइम 'पेप्सिनोजेन' का स्रावण करती हैं, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित हो जाता है।
2. मनुष्य के श्वसन तंत्र में, गैसीय विनिमय मुख्य रूप से कूपिकाओं (Alveoli) में होता है, जिसकी भित्ति अत्यंत पतली होती है और इस पर विसरण (Diffusion) की प्रक्रिया मुख्य रूप से आंशिक दाब प्रवणता (Partial Pressure Gradient) द्वारा संचालित होती है।
3. परिसंचरण तंत्र के अंतर्गत, दाएं निलये (Right Ventricle) से निकलने वाला अशुद्ध रक्त फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Artery) के माध्यम से फेफड़ों में जाता है, और यह एकमात्र ऐसी धमनी है जिसमें ऑक्सीजन-समृद्ध (शुद्ध) रक्त प्रवाहित होता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, मस्तिष्कावरण (Meninges) की सबसे बाहरी परत को 'ड्यूरा मेटर' (Dura mater) कहा जाता है, जो मस्तिष्क को यांत्रिक आघातों से सुरक्षा प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हెరॉल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूऑर्स्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट मुख्य रूप से एलुमिना के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करता है।
2. 'सफेद फॉस्फोरस' (White Phosphorus) अत्यधिक प्रतिक्रियाशील और विषैला होता है, जो अंधेरे में दीप्ति (Phosphorescence) उत्पन्न करता है, और इसे हवा में स्वतः जलने से रोकने के लिए पानी के नीचे रखा जाता है, जबकि लाल फॉस्फोरस बहुलकित संरचना के कारण सामान्य ताप पर जल में अघुलनशील और कम सक्रिय होता है।
3. संक्रमण धातुओं के यौगिकों द्वारा रंग प्रदर्शित करने का मुख्य कारण उनके 'd-d संक्रमण' (d-d transition) या 'चार्ज ट्रांसफर स्पेक्ट्रा' का होना है, जिसमें अपूर्ण रूप से भरे d-कक्षकों के बीच इलेक्ट्रॉनों का उत्तेजन दृश्य प्रकाश क्षेत्र के अवशोषण से होता है।
4. सोडियम कार्बोनेट (वाशिंग सोडा) का उत्पादन 'सॉलवे प्रक्रम' (Solvay process) द्वारा किया जाता है, जिसमें मध्यवर्ती उत्पाद के रूप में सोडियम बाइकार्बोनेट प्राप्त होता है, और इस प्रक्रम की एक प्रमुख विशेषता यह है कि अमोनिया को पुनर्प्राप्त (Recovered) करने के लिए इसमें अमोनियम क्लोराइड की अभिक्रिया बुझे हुए चूने ($Ca(OH)_2$) के साथ कराई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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बीज?
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