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General Science
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कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में पृथ्वी की परिक्रमा कर रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा (गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा का योग) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र में बंधा हुआ है।
- 2. यदि किसी भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) को उसकी वर्तमान कक्षा से थोड़ा सा ऊंचे स्थान पर स्थापित कर दिया जाए, तो उसका आवर्तकाल बढ़ जाएगा और वह पृथ्वी के सापेक्ष पश्चिम की ओर विस्थापित होने लगेगा।
- 3. जब कोई उपग्रह अपनी कक्षा में पृथ्वी के वायुमंडल के अवशेषों के कारण होने वाले घर्षण (Drag) के प्रभाव में आता है, तो उसकी कुल ऊर्जा में कमी आती है, किंतु घर्षण बल द्वारा कार्य किए जाने के कारण उसकी कक्षीय चाल (Orbital Speed) में अप्रत्याशित रूप से वृद्धि हो जाती है।
- 4. उपग्रह के भीतर स्थित अंतरिक्ष यात्री भारहीनता का अनुभव इसलिए करता है क्योंकि उपग्रह और उसके अंदर की सभी वस्तुएँ पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन की स्थिति में होती हैं, और इस अवस्था में आभासी भार शून्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा $E = - \frac{GMm}{2r}$ होती है, जो ऋणात्मक होने के कारण उसके गुरुत्वाकर्षण बंधन को दर्शाती है। कैपलर के तृतीय नियम ($T^2 \propto r^3$) के अनुसार, यदि कक्षा की त्रिज्या बढ़ाई जाती है, तो आवर्तकाल बढ़ जाता है जिससे उपग्रह पीछे छूटने लगता है और पृथ्वी के सापेक्ष पश्चिम की ओर प्रतीत होता है। वायुमंडलीय घर्षण के कारण उपग्रह नीचे गिरता है, जिससे स्थितिज ऊर्जा में कमी आती है और ऊर्जा संरक्षण के कारण उसकी गतिज ऊर्जा व कक्षीय चाल बढ़ जाती है। अंतरिक्ष यात्री की भारहीनता मुक्त पतन की स्थिति का परिणाम है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अवतल दर्पण की फोकस दूरी?
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सुकेन्द्रकी (Eukaryotic) कोशिकाओं के भीतर विभिन्न कोशिकांगों की संरचना और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माइटोकॉन्ड्रिया की आंतरिक झिल्ली (Inner membrane) पर 'ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण' की प्रक्रिया संपन्न होती है, जहाँ इलेक्ट्रॉन परिवहन श्रृंखला (ETC) के दौरान बनने वाले 'क्रिस्टा' (Cristae) झिल्ली के सतही क्षेत्रफल को बढ़ाते हैं, और इसके मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र के सभी आवश्यक एंजाइम पाए जाते हैं, सिवाय 'सक्सीनेट डिहाइड्रोजनेज' के जो आंतरिक झिल्ली से जुड़ा होता है।
2. गॉल्जी उपकरण (Golgi apparatus) का 'cis' (निर्माण) चेहरा आमतौर पर अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) की ओर और 'trans' (परिपक्व) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है, और यह मुख्य रूप से प्रोटीन के ग्लाइकोसिलेशन तथा लिपिड के ग्लाइकोजिनेशन जैसी रूपांतरण प्रक्रियाओं का प्रमुख स्थल है।
3. लिसोसॉउस (Lysosomes) एक एकल झिल्लीबद्ध कोशिकांग हैं जिनमें हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो अम्लीय pH (लगभग 4.5 से 5.0) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं, और इस अम्लीय वातावरण को बनाए रखने के लिए साइटोप्लाज्म से प्रोटॉन ($H^+$) को सक्रिय रूप से पंप किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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eukaryotic कोशिका के अंतःझिल्ली तंत्र (Endomembrane System) और उससे संबंधित कोशिका अंगों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अंतर्द्रव्यी जालिका (Endoplasmic Reticulum) के खुरदरे भाग (RER) पर राइबोसोम उपस्थित होते हैं, जो प्रोटीन संश्लेषण और उनके स्रावण में प्रमुख भूमिका निभाते हैं, जबकि चिकनी अंतर्द्रव्यी जालिका (SER) लिपिड और स्टेरॉइड हॉर्मोन के संश्लेषण का प्रमुख स्थल है।
2. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) का निर्माण चक्रिका (Cisternae) नामक चपटी, थैलीनुमा संरचनाओं से होता है, जिसमें 'cis' (निर्मित होने वाला) सिरा परिपक्व (trans) सिरे की ओर पदार्थों को स्थानांतरित करता है और यह ग्लाइकोसाइलेशन जैसी महत्वपूर्ण जैव-रासायनिक प्रक्रियाओं का स्थल है।
3. लयनकाय (Lysosomes) एकल झिल्ली से घिरे ऐसे पुटिकाकार अंगक हैं जिनमें अम्लीय परिस्थितियों (कम pH) में सक्रिय रहने वाले हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेटेज) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं।
4. रसधानी (Vacuole) पादप कोशिकाओं की कुल आयतन का 90% तक घेर सकती है, और टोनोप्लास्ट (Tonoplast) नामक झिल्ली इसके भीतर मौजूद आयनों और अन्य पदार्थों को प्रवणता के विरुद्ध सक्रिय परिवहन द्वारा रसधानी के अंदर सांद्रित होने से रोकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर में पोषण, जैविक अणुओं और विटामिनों की चयापचय क्रियाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो शरीर में, विशेषकर यकृत में, कई महीनों से लेकर वर्षों तक संचित रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है।
2. 'क्वाशियोरकोर' (Kwashiorkor) रोग केवल लंबे समय तक कुल कैलोरी (ऊर्जा) की गंभीर कमी के कारण होता है, जबकि 'मरास्मस' (Marasmus) प्रोटीन और कैलोरी दोनों की एक साथ कमी का परिणाम है।
3. वसा में घुलनशील विटामिन 'विटामिन E' (टोकोफेरोल) एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट के रूप में कार्य करता है जो कोशिका झिल्ली को लिपिड पेरोक्सीडेशन से बचाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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घर्षण क्या करता है?
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