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General Science
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यूकेरियोटिक कोशिकाओं में पाए जाने वाले 'कोशिकांगों' (Cell Organelles) की संरचना, उनके विशिष्ट कार्यों और झिल्लीगत संगठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गॉल्जी उपकरण (Golgi Apparatus) में 'cis' (निर्माणकारी) चेहरा आमतौर पर अंतःद्रव्यी जालिका (ER) की ओर और 'trans' (परिपक्व होने वाला) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की ओर स्थित होता है, जहाँ यह ग्लाइकोसिलेशन (Glycosylation) और ग्लाइकोलिपिड के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाता है।
- 2. लाइसोसोम (Lysosomes) एकल झिल्ली से घिरे ऐसे पुटिकाएँ होती हैं जिनमें अम्लीय पीएच (लगभग 4.5 से 5.0) पर सक्रिय हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे कार्बोहाइड्रेटेज, लाइपेस और प्रोटीएज) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो केवल बाह्य कोशिकीय पदार्थों का ही पाचन कर सकते हैं।
- 3. परॉक्सीसोम (Peroxisomes) अर्ध-स्वायत्त सूक्ष्मकाय हैं जिनमें 'कैटालेज' एंजाइम पाया जाता है जो हाइड्रोजन पेरोक्साइड को जल और ऑक्सीजन में विघटित करता है, और ये पादप कोशिकाओं में प्रकाश श्वसन (Photorespiration) की प्रक्रिया से भी जुड़े होते हैं।
- 4. राइबोसोम झिल्लीहीन कोशिकांग हैं, जो केवल प्रोकैरियोटिक कोशिकाओं के साइटोप्लाज्म में 70S प्रकार के पाए जाते हैं, जबकि यूकेरियोटिक कोशिकाओं में ये केवल माइटोकॉन्ड्रिया और हरित लवक के भीतर ही मौजूद होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि गॉल्जी उपकरण का 'cis' सिस्टर्ना अंतःद्रव्यी जालिका (ER) के निकट होता है और 'trans' सिस्टर्ना प्लाज्मा झिल्ली की ओर होता है, जहाँ प्रोटीन व लिपिड का रूपांतरण (ग्लाइकोसिलेशन/ग्लाइकोलिपिड निर्माण) होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि लाइसोसोम अंतःकोशिकीय और बाह्यकोशिकीय दोनों प्रकार के पदार्थों और क्षतिग्रस्त कोशिकांगों का पाचन (ऑटोफैगी) कर सकते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि परॉक्सीसोम झिल्लीबद्ध सूक्ष्मकाय हैं जो कैटालेज के माध्यम से $H_2O_2$ को नष्ट करते हैं और पौधों में ग्लाइकोलेट चक्र (प्रकाश श्वसन) में भाग लेते हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि यूकेरियोटिक कोशिकाओं में साइटोप्लाज्म, खुरदरी अंतःद्रव्यी जालिका और केंद्रक के बाहर भी 80S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं, केवल 70S माइटोकॉन्ड्रिया और क्लोरोप्लास्ट में होते हैं। कोशिका संरचना के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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आवर्त सारणी के तत्वों के विभिन्न आवर्ती गुणों और उनके रासायनिक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' का मान सामान्यतः आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर बढ़ता है, किंतु नाइट्रोजन (N) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन (O) से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के $2p$ कक्षकों का पूर्णतः पूरित (Completely filled) होना है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान फ्लोरीन की तुलना में क्लोरीन के लिए अधिक ऋणात्मक (अधिक ऊष्माक्षेपी) होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन पर तीव्र अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण (Interelectronic repulsion) लगता है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के कारण, छठी अवधि के संक्रमण तत्व (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण लगभग पाँचवीं अवधि के ठीक ऊपर स्थित तत्वों (जैसे Zirconium) के समान हो जाते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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लेजर (LASER) का पूर्ण रूप क्या है?
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रक्त समूहों की आनुवंशिकी और रुधिर आधान (Blood Transfusion) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली कोडोमिनेंस (सह-प्रभाविता) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहाँ $I^A$ और $I^B$ एलील अपने आप को स्वतंत्र रूप से सह-अभिव्यक्त करते हैं, किंतु ये दोनों एलील अप्रभावी 'i' एलील पर प्रभावी होते हैं।
2. जब किसी 'A' रक्त समूह वाले व्यक्ति को गलती से 'B' रक्त समूह का रक्त चढ़ा दिया जाता है, तो प्राप्तकर्ता के प्लाज्मा में उपस्थित प्राकृतिक 'anti-B' एंटीबॉडी दाता की लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) पर उपस्थित 'B' एंटीजन के साथ मिलकर तीव्र एग्लूटीनेशन (विघटन) प्रतिक्रिया करते हैं।
3. 'Rh-असंगति' (Rh Incompatibility) के कारण होने वाला 'एरिथ्रोब्लास्टोसिस फेटलिस' (Erythroblastosis fetalis) मुख्य रूप से तब होता है जब Rh-ऋणात्मक माता और Rh-धनात्मक पिता की संतान Rh-धनात्मक होती है, और इस स्थिति में माँ के शरीर में उत्पन्न होने वाले एंटी-Rh एंटीबॉडी (IgG प्रकार) प्लेसेंटा को पार कर सकते हैं।
4. रुधिर प्लाज्मा में पाए जाने वाले 'anti-A' और 'anti-B' एंटीबॉडी मुख्य रूप से IgG प्रकार के इम्युनोग्लोबुलिन होते हैं, जो अपनी कम आणविक भार और मोनोमेरिक संरचना के कारण आसानी से प्लेसेंटा की बाधा को पार कर भ्रूण तक पहुँच जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत-चुंबकीय तरंगों को माध्यम चाहिए?
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आवर्त सारणी के तत्वों के विभिन्न आवर्ती गुणों और रासायनिक प्रवृत्तियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी परमाणु की 'द्वितीय आयनन एन्थैल्पी' (Second Ionization Enthalpy) का मान हमेशा उसकी 'प्रथम आयनन एन्थैल्पी' से अधिक होता है, क्योंकि उदासीन परमाणु से एक इलेक्ट्रॉन निकल जाने के बाद बचे हुए इलेक्ट्रॉनों पर प्रभावी नाभिकीय आवेश बढ़ जाता है और आकार छोटा हो जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी हैलोजन तत्वों में क्लोरीन के लिए सर्वाधिक ऋणात्मक होता है, न कि फ्लोरीन के लिए, जिसका मुख्य कारण फ्लोरीन के बहुत छोटे आकार के कारण आने वाले अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन पर होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षण (Interelectronic repulsion) है।
3. आधुनिक आवर्त सारणी में 'लैंथेनाइड आकुंचन' (Lanthanoid Contraction) के प्रभावस्वरूप, छठी अवधि के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium) की परमाणु त्रिज्या और रासायनिक गुण पाँचवीं अवधि के उनके ठीक ऊपर वाले तत्वों (जैसे Zirconium) की तुलना में भिन्न हो जाते हैं और कोई समानता नहीं दर्शाते।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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