त्वरित लिंक्स
General Science
1 views
मानव रक्त परिसंचरण तंत्र, रुधिर समूहों की आनुवंशिकी और स्कंदन (Coagulation) क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, यदि माता-पिता दोनों का रक्त समूह 'AB' है, तो उनके बच्चों में 'O' रक्त समूह वंशागत होने की संभावना सैद्धांतिक रूप से शून्य होती है, क्योंकि $I^A$ और $I^B$ एलील सह-प्रभाविता (Co-dominance) प्रदर्शित करते हैं किंतु अप्रभावी 'i' एलील अनुपस्थित होता है।
- 2. रक्त का प्राकृतिक प्रतिस्कंदक (Anticoagulant) 'हेपरिन' (Heparin) मुख्य रूप से यकृत और बेसोफिल्स द्वारा स्रावित एक सल्फेटयुक्त ग्लाइकोसामिनोग्लाइकन है, जो परिसंचरण तंत्र के भीतर रुधिर वाहिनियों में रक्त के स्वतः जमने को रोकता है।
- 3. रुधिर स्कंदन प्रक्रिया (Blood clotting cascade) के दौरान, 'प्रोथ्रोम्बिन' को सक्रिय थ्रोम्बिन में बदलने के लिए कैल्शियम आयनों ($Ca^{2+}$) और थ्रोम्बोप्लास्टिन के साथ-साथ विटामिन $K$ की अनिवार्य आवश्यकता होती है, जो यकृत में प्रोथ्रोम्बिन के संश्लेषण को प्रेरित करता है।
- 4. जब किसी 'O' रक्त समूह के व्यक्ति को गलती से 'AB' रक्त समूह का रक्त चढ़ा दिया जाता है, तो प्राप्तकर्ता की आरबीसी (RBC) दाता के प्लाज्मा में उपस्थित एंटी-A और एंटी-B एंटीबॉडी के साथ मिलकर गंभीर एग्लूटीनेशन (विघटन) प्रतिक्रिया उत्पन्न करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। ABO रक्त समूह की वंशागति में $I^A$ और $I^B$ सह-प्रभावी होते हैं और यदि माता-पिता दोनों AB हैं (जीनोटाइप $I^A I^B$), तो उनके बच्चों में 'i' एलील नहीं आ सकता, अतः 'O' समूह (जीनोटाइप ii) असंभव है। हेपरिन यकृत और मास्ट कोशिकाओं/बेसोफिल्स द्वारा निर्मित प्राकृतिक प्रतिस्कंदक है। रुधिर स्कंदन में विटामिन K और $Ca^{2+}$ आवश्यक हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि 'O' रक्त समूह के व्यक्ति (जिसके प्लाज्मा में एंटी-A और एंटी-B दोनों एंटीबॉडी होते हैं) को जब 'AB' रक्त समूह का रक्त दिया जाता है, तो दाता की लाल रक्त कोशिकाओं पर उपस्थित A और B एंटीजन, प्राप्तकर्ता के प्लाज्मा की एंटीबॉडी के साथ मिलकर गंभीर एग्लूटीनेशन करते हैं। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
विद्युत धारा, प्रतिरोध और सर्किट (Electricity) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी धात्विक चालक में मुक्त इलेक्ट्रॉनों का अपवाह वेग (Drift velocity) बहुत कम (लगभग $10^{-4}$ m/s) होने के बावजूद, विद्युत परिपथ में स्विच ऑन करते ही प्रकाश के वेग से विद्युत क्षेत्र का संचरण होता है, जिससे पूरे सर्किट में धारा तुरंत प्रवाहित होने लगती है।
2. किर्चहॉफ का प्रथम नियम (Kirchhoff's Current Law), जिसे संधि नियम भी कहते हैं, ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जबकि किर्चहॉफ का द्वितीय नियम (Kirchhoff's Voltage Law) आवेश संरक्षण के नियम पर आधारित है।
3. जब किसी प्रतिरोधक को श्रेणीक्रम (Series) से समान्तर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध बढ़ जाता है और कुल धारा का मान न्यूनतम हो जाता है।
4. अतिचालकता (Superconductivity) की स्थिति में कुछ पदार्थों की विद्युत प्रतिरोधकता शून्य हो जाती है और वे बाहरी चुंबकीय क्षेत्र को अपने भीतर से पूर्णतः बाहर धकेल देते हैं, जिसे 'मीस्नर प्रभाव' (Meissner effect) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
तरंग की तीव्रता?
→
मानव पोषण और जैव अणुओं (विटामिन, कार्बोहाइड्रेट एवं प्रोटीन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन B12 (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विघटनीय विटामिन है जो यकृत में कई वर्षों तक संचित रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की parietal कोशिकाओं द्वारा 'इंट्रिंसिक फैक्टर' (Intrinsic Factor) का स्रावण आवश्यक होता है।
2. ग्लाइकोजन एक शाखित बहुलक (Branched polymer) है जो ग्लूकोज की इकाइयों से मिलकर बनता है, जिसमें मुख्य श्रृंखला $\alpha-1,4$ ग्लाइकोसिडिक बंध और शाखा बिंदु $\alpha-1,6$ ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़े होते हैं।
3. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential Amino Acids) वे होते हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं हो सकता, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से प्राप्त करना अनिवार्य होता है, जिसका एक प्रमुख उदाहरण 'वैलीन' और 'लाइसिन' हैं।
4. सेलूलोज पादप कोशिका भित्ति का मुख्य घटक है, जो $\beta-1,4$ ग्लाइकोसिडिक बंधों से युक्त एक रैखिक पॉलीसैकराइड है, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने के लिए 'सेल्युलेज' एंजाइम प्रचुर मात्रा में स्रावित होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम का सीधा परिणाम है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से संघनित (Association) हो जाते हैं, क्योंकि अणुओं के जुड़ने से कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करते हैं जिससे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) का मान अपरिवर्तित रहता है।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि इनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता अभिकारकों और उत्पादों के अणुओं के आकार तथा छिद्रों के आकार पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण के तंत्र और पादप हॉर्मोन्स की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स को पादप जगत का 'उभयचर' (Amphibians) कहा जाता है क्योंकि ये पौधे मृदा में उगते हैं किंतु इन्हें लैंगिक जनन के लिए जल की अनिवार्य आवश्यकता होती है, और इनके मुख्य पादप शरीर में संवहन ऊतक (ज़ाइलम और फ्लोएम) पूर्णतः अनुपस्थित होते हैं।
2. C4 पौधों में प्रकाश संश्लेषण की 'हैच-स्लैग मार्ग' (Hatch-Slack Pathway) प्रक्रिया के दौरान प्राथमिक कार्बन डाइऑक्साइड स्थिरीकरण 'मेसोफिल कोशिकाओं' में फॉस्फोएनाइलपाइरुवेट (PEP) द्वारा होता है, जिससे 4-कार्बन यौगिक ऑक्सोएसेटिक अम्ल (OAA) बनता है।
3. 'एब्सिसिक एसिड' (ABA) एक मुख्य रूप से वृद्धि-प्रेरक (Growth-promoting) पादप हॉर्मोन है जो बीज के प्रसुप्तिकरण (Seed dormancy) को रोकता है और तने की लंबाई में तेजी से दीर्घीकरण (Elongation) को प्रेरित करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.