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General Science
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और प्रत्यावर्ती धारा परिपथों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के द्वितीय नियम के अनुसार, किसी बंद कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) का परिमाण उस कुंडली से बद्ध चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के अनुक्रमानुपाती होता है।
- 2. लेंज का नियम (Lenz's Law) ऊर्जा संरक्षण के नियम का एक परिणाम है, जिसके अनुसार प्रेरित धारा की दिशा हमेशा उस कारण का विरोध करती है जो स्वयं उसकी उत्पत्ति करता है।
- 3. स्वप्रेरकत्व (Self-inductance) का मात्रक 'हेनरी' है, और किसी लंबी परिनालिका का स्वप्रेरकत्व उसके क्रॉस्सेक्शन क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती तथा उसकी लंबाई के अनुक्रमानुपाती होता है।
- 4. एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक और द्वितीयक कुंडली के बीच शक्ति का कोई क्षय नहीं होता है, तथा स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर वोल्टेज को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप निर्गत धारा का मान भी निवेशी धारा की तुलना में बढ़ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फैराडे के नियम के अनुसार प्रेरित विद्युत वाहक बल चुंबकीय फ्लक्स के परिवर्तन की समय दर के बराबर होता है। कथन 2 सही है क्योंकि लेंज का नियम ऊर्जा संरक्षण सिद्धांत का पालन करता है। कथन 3 गलत है, क्योंकि परिनालिका का स्वप्रेरकत्व उसके अनुप्रस्थ काट क्षेत्रफल ($A$) के अनुक्रमानुपाती और लंबाई ($l$) के व्युत्क्रमानुपाती होता है ($L = \mu_0 n^2 Al$)। कथन 4 गलत है, क्योंकि एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर में शक्ति ($P = VI$) नियत रहती है; अतः स्टेप-अप ट्रांसफॉर्मर यदि वोल्टेज बढ़ाता है, तो वह धारा (Current) के मान को आनुपातिक रूप से घटा देता है ताकि ऊर्जा संरक्षण का नियम बना रहे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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मानव शरीर में पोषण और वृहत् पोषक तत्वों के उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'ग््लुकोनियोजेनेसिस' (Gluconeogenesis) मुख्य रूप से यकृत और वृक्क में होने वाली वह चयापचय प्रक्रिया है जिसमें गैर-कार्बोहाइड्रेट अग्रcursers (जैसे लैक्टेट, ग्लिसरोल और ग्लूकोजेनिक अमीनो एसिड) से ग्लूकोज का संश्लेषण होता है, जो उपवास की स्थिति में रक्त शर्करा को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
2. 'आवश्यक अमीनो अम्ल' (Essential amino acids वे हैं जिन्हें मानव शरीर संश्लेषित नहीं कर सकता, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से प्राप्त करना आवश्यक होता है, और वेल्लीन, ल्यूसीन तथा लाइसिन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
3. जल में घुलनशील 'विटामिन C' (ऐस्कॉर्बिक अम्ल) का मुख्य कार्य कोलेजन संश्लेषण में सहायक होना है, और इसकी अत्यधिक कमी से 'बेरी-बेरी' नामक गंभीर विकार उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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डॉपलर प्रभाव (Doppler Effect) और ध्वनि तरंगों की आवृत्ति में परिवर्तन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब एक श्रोता स्थिर स्रोत की ओर गति करता है, तो श्रोता द्वारा सुनी जाने वाली ध्वनि की आभासी आवृत्ति वास्तविक आवृत्ति से अधिक होती है, जबकि स्रोत के श्रोता से दूर जाने पर आभासी आवृत्ति कम हो जाती है।
2. यदि श्रोता और ध्वनि स्रोत दोनों समान वेग से एक ही दिशा में गति कर रहे हों, तो उनके बीच की सापेक्षिक दूरी नियत रहने के कारण श्रोता को कोई आभासी आवृत्ति परिवर्तन (डॉपलर शिफ्ट) महसूस नहीं होता है।
3. डॉपलर प्रभाव केवल ध्वनि तरंगों (यांत्रिक तरंगों) पर ही लागू होता है, और इसका उपयोग विद्युत चुंबकीय तरंगों जैसे प्रकाश या खगोलीय पिंडों के वेग मापने में नहीं किया जा सकता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर में होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों (Pathogens) और उनके संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'टिटनेस' (Tetanus) क्लोस्ट्रीडियम टिटानी (Clostridium tetani) नामक जीवाणु के कारण होता है, जो एक बीजाणु-उत्पादक (Spore-forming) एनारोबिक जीवाणु है, और इसके विषैले एक्सोटॉक्सिन (टिटैनोस्पैस्मिन) तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करके कंकाल पेशियों में लगातार दर्दनाक संकुचन उत्पन्न करते हैं।
2. 'रेबीज' (Rabies) एक विषाणुजनित तंत्रिका संबंधी रोग है जो लाइساवायरस (Lyssavirus) के कारण होता है, और यह मुख्य रूप से संक्रमित जानवरों (जैसे कुत्ते, चमगादड़) के काटने से उनकी लार के माध्यम से मनुष्यों में फैलता है, जिसमें केंद्रीय तंत्रिका तंत्र की गंभीर क्षति और 'हाइड्रोफोबिया' (जल से अत्यधिक डर) जैसे लक्षण प्रकट होते हैं।
3. 'एड्स' (AIDS) उत्पन्न करने वाला ह्यूमन इम्युनोडेफिशिएंसी वायरस (HIV) एक रेट्रोवायरस है जो मुख्य रूप से शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के 'CD4+ T-लिम्फोसाइट्स' कोशिकाओं को नष्ट करता है, जिससे कोशिका-मध्यस्थ प्रतिरक्षा (Cell-mediated immunity) पूरी तरह कमजोर हो जाती है।
4. 'मलेरिया' प्लाज्माडियम प्रजाति के परजीवी के कारण होने वाला प्रोटोजोअन रोग है, जिसका संचरण मादा क्यूलैक्स मच्छर (Culex mosquito) के काटने से होता है, और यह परजीवी मानव शरीर में प्रवेश करने के बाद सबसे पहले यकृत कोशिकाओं और फिर लाल रक्त कोशिकाओं (RBC) को संक्रमित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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मानव शरीर के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और विभिन्न हॉर्मोनों के नियंत्रण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पीयूष ग्रंथि के पश्च भाग (Neurohypophysis) से स्रावित 'वैसोप्रेसिन' या 'एंटीडायूरेटिक हॉर्मोन' (ADH) वृक्क नलिकाओं में जल के पुनरअवशोषण को बढ़ाता है, और इस हॉर्मोन की भारी कमी के कारण 'डाइयूरेसिस' (मूत्र की मात्रा में वृद्धि) के साथ-साथ 'डाइबिटीज इंसिपिडस' (Diabetes insipidus) नामक विकार उत्पन्न होता है।
2. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित हॉर्मोन 'थायराक्सिन' ($T_4$) और 'ट्राइआयोडोथायरोनिन' ($T_3$) शरीर की आधारीय चयापचय दर (BMR) को नियंत्रित करते हैं, और इनके संश्लेषण के लिए भोजन में आयोडीन की पर्याप्त मात्रा होना अनिवार्य है, जिसकी कमी से 'गॉइटर' (घेंघा) रोग हो जाता है।
3. अधिवृक्क ग्रंथि के वल्कुट (Adrenal Cortex) से स्रावित 'एल्डोस्टेरोन' एक मिनरलोकॉर्टिकॉइड है, जो रक्त प्लाज्मा में सोडियम आयनों के स्तर को कम करता है और पोटेशियम आयनों के पुनरअवशोषण को अत्यधिक प्रेरित करता है, जिससे रक्तचाप में भारी गिरावट आती है।
4. पैराथाइरॉइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'पैराथर्मोन' (PTH) एक हाइपरकैल्सेमिक हॉर्मोन है जो रक्त में कैल्शियम आयनों के स्तर को बढ़ाने के लिए हड्डियों के resorption (अवशोषण) को प्रेरित करता है तथा आंतों और वृक्कों द्वारा कैल्शियम के अवशोषण को बढ़ाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र के नियंत्रण एवं नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेडुला ऑब्लोंगाटा (Medulla oblongata) में स्थित श्वसन केंद्र मुख्य रूप से रक्त में कार्बन डाइऑक्साइड ($CO_2$) और हाइड्रोजन आयनों ($H^+$) की सांद्रता में होने वाले परिवर्तनों के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होता है, जबकि ऑक्सीजन ($O_2$) की सांद्रता का श्वसन लय के नियंत्रण पर प्रत्यक्ष प्रभाव बहुत कम होता है।
2. महाधमनी चाप (Aortic arch) और कैरोटिड धमनी (Carotid artery) में स्थित परिधीय केमोरिसेप्टर (Peripheral chemoreceptors) रक्त में $O_2$ के आंशिक दाब में उल्लेखनीय गिरावट का पता लगाते हैं, और आपातकालीन स्थिति में श्वसन दर को बढ़ाने के लिए संकेत भेजते हैं।
3. हृदय की अपनी पेशीय स्वतः उत्तेजन क्षमता (Myogenic nature) होती है, जिसके कारण हृदय की धड़कन की गति का प्राथमिक पेसमेकर 'सिनोएट्रियल नोड' (SAN) तंत्रिका तंत्र की प्रत्यक्ष प्रेरणा के बिना स्वतः क्रिया विभव उत्पन्न करता है, हालांकि स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (ANS) और अधिवृक्क हार्मोन्स इसकी दर को संशोधित (Modulate) कर सकते हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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