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General Science
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नाभिकीय रिएक्टरों और कण त्वरकों (Particle Accelerators) में होने वाली भौतिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. नाभिकीय रिएक्टर में मंदक (Moderator) के रूप में प्रयुक्त भारी जल ($D_2O$) या ग्रेफाइट का मुख्य कार्य विखंडन के दौरान उत्पन्न तीव्र न्यूट्रॉन की गति को धीमा करना होता है, ताकि वे यूरेनियम-235 के साथ प्रभावी ढंग से विखंडन अभिक्रिया जारी रख सकें।
  2. 2. 'सुपरक्रिटिकल' (Supercritical) अवस्था वह स्थिति होती है जहाँ न्यूट्रॉन गुणन गुणांक ($k$) का मान 1 से कम होता है, जिससे नाभिकीय श्रृंखला अभिक्रिया स्वतः बंद होने की स्थिति में आ जाती है।
  3. 3. नाभिकीय संलयन (Nuclear Fusion) के लिए अत्यंत उच्च तापमान और दाब की आवश्यकता इसलिए होती है ताकि दो धनावेशित नाभिकों के बीच लगने वाले कूलॉम प्रतिकर्षण बल (Coulombic Repulsion) को पार किया जा सके।
  4. 4. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) एक ऐसा कण त्वरक है जिसमें आवेशित कणों को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए एक समान चुंबकीय क्षेत्र और उच्च आवृत्ति के प्रत्यावर्ती विद्युत क्षेत्र का एक साथ उपयोग किया जाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि नाभिकीय रिएक्टरों में विखंडन के दौरान निकलने वाले तीव्र न्यूट्रॉनों की गति को धीमा करने के लिए मंदक (Moderator) जैसे भारी जल या ग्रेफाइट का उपयोग किया जाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'सुपरक्रिटिकल' अवस्था में न्यूट्रॉन गुणन गुणांक ($k$) का मान 1 से अधिक होता है ($k > 1$), जिससे श्रृंखला अभिक्रिया तेज हो जाती है; $k < 1$ की स्थिति को सबक्रिटिकल (Subcritical) कहते हैं। कथन 3 सही है क्योंकि संलयन के लिए धनावेशित नाभिकों को अत्यधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है ताकि उनके मध्य का कूलॉम प्रतिकर्षण समाप्त हो सके। कथन 4 सही है, इसके बारे में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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