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General Science
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पृथ्वी की सतह से छोड़े गए किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_0$) और उसी कक्षा में परिक्रमण करने वाले उपग्रह की पलायन चाल ($v_e$) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल उसकी पृथ्वी की सतह से ऊँचाई पर निर्भर करती है, और जैसे-जैसे उपग्रह की कक्षीय त्रिज्या बढ़ती है, उसकी कक्षीय चाल कम हो जाती है।
- 2. यदि किसी उपग्रह की कक्षीय चाल में अचानक $\sqrt{2}-1$ (या लगभग 41.4%) की आनुपातिक वृद्धि कर दी जाए, तो वह अपनी वृत्ताकार कक्षा को छोड़कर पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बाहर निकल जाएगा (पलायन कर जाएगा)।
- 3. पृथ्वी के बहुत निकट परिक्रमण कर रहे उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 11.2 किमी/सेकंड होती है, जबकि पृथ्वी की सतह से पलायन वेग का मान लगभग 7.9 किमी/सेकंड होता है।
- 4. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगाते हुए उपग्रह की चाल नियत नहीं रहती है, बल्कि जब उपग्रह पृथ्वी के निकटतम बिंदु (उपभू या Perigee) पर होता है, तब उसकी चाल अधिकतम होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी उपग्रह की कक्षीय चाल $v_0 = \sqrt{\frac{GM}{r}}$ होती है, जो स्पष्ट रूप से कक्षीय त्रिज्या (r) के बढ़ने पर घटती है। कथन 2 सही है क्योंकि पलायन वेग $v_e = \sqrt{2} v_0$ होता है; अतः यदि कक्षीय चाल को $\sqrt{2}$ गुना (यानी लगभग 41.4% की वृद्धि) कर दिया जाए, तो उपग्रह पलायन वेग प्राप्त कर लेता है। कथन 3 गलत है क्योंकि पृथ्वी के निकट के उपग्रह की कक्षीय चाल लगभग 7.9 किमी/सेकंड और पलायन वेग लगभग 11.2 किमी/सेकंड होता है (यहाँ मानों को विपरीत लिखा गया है)। कथन 4 सही है, केप्लर के द्वितीय नियम और ऊर्जा संरक्षण के अनुसार, दीर्घवृत्ताकार कक्षा में उपभू (Perigee) के समीप उपग्रह की चाल अधिकतम होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बोहर के परमाणु मॉडल के अनुसार, इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल उन्हीं निश्चित वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगा सकते हैं जिन्हें 'स्थिर कक्षाएँ' कहा जाता है, और इन कक्षाओं में घूमते समय इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का विकिरण नहीं करते हैं।
2. सोमरफेल्ड के परमाणु मॉडल ने बोर के सिद्धांत में संशोधन करते हुए यह जोड़ा कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर केवल वृत्ताकार कक्षाओं में ही नहीं, बल्कि विभिन्न दीर्घवृत्ताकार (Elliptical) कक्षाओं में भी गति कर सकते हैं, जिसके कारण दिगंशी क्वांटम संख्या का उद्भव हुआ।
3. क्वांटम संख्या 'चुंबकीय क्वांटम संख्या' ($m$) अंतरिक्ष में कक्षक के विन्यास (Orientation) को दर्शाती है, और इसका मान मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) पर निर्भर नहीं करता है, बल्कि यह पूरी तरह से दिगंशी क्वांटम संख्या ($l$) के मानों पर निर्भर करता है।
4. किसी बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में कक्षकों के भरने का क्रम 'आफबाऊ नियम' (Aufbau principle) के अनुसार ऊर्जा के बढ़ते क्रम में होता है, जिसे निर्धारित करने के लिए $(n+l)$ नियम का उपयोग किया जाता है, जहाँ समान $(n+l)$ मान होने पर कम $n$ मान वाले कक्षक को पहले भरा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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भौतिक राशियों की विमाओं और व्युत्पन्न मात्रकों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. सार्वत्रिक गुरुत्वाकर्षण नियतांक (Universal Gravitational Constant): विमीय सूत्र $[M^{-1}L^3T^{-2}]$ और एसआई मात्रक $\text{N m}^2 \text{kg}^{-2}$
2. पृष्ठ तनाव (Surface Tension): विमीय सूत्र $[MT^{-2}]$ और एसआई मात्रक $\text{N m}^{-1}$
3. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity): विमीय सूत्र $[ML^{-1}T^{-2}]$ और एसआई मात्रक $\text{kg m}^{-1} \text{s}^{-2}$
4. प्लांक नियतांक (Planck's Constant): विमीय सूत्र $[ML^2T^{-1}]$ और एसआई मात्रक $\text{J s}$
उपर्युक्त में से कौन सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
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उत्तल दर्पण की फोकस दूरी?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि किसी सूक्ष्म कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) की स्थिति और संवेग का एक साथ यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, तथा इनका अनिश्चितता गुणनफल $\Delta x \cdot \Delta p \ge \frac{h}{4\pi}$ होता है।
2. पाउली का अपवर्जन नियम (Pauli's Exclusion Principle) यह बताता है कि किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m_s, m$) का मान कभी भी सर्वसम नहीं हो सकता है, अर्थात् एक कक्षक में विपरीत चक्रण (Spin) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
3. बहु-इलेक्ट्रॉन परमाणु में कक्षकों की ऊर्जा का निर्धारण करने के लिए 'आफबाऊ सिद्धांत' के साथ-साथ (n + l) नियम का उपयोग किया जाता है, जिसके अनुसार जिस कक्षक के लिए (n + l) का मान कम होता है, उसकी ऊर्जा अधिक होती है।
4. हुंड का अधिकतम बहुकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि उपकोशों ($p, d, f$) में कक्षकों का युग्मन (Pairing) तब तक प्रारंभ नहीं होता जब तक कि उस उपकोश के प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ न भर जाए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पदार्थ के सामान्य गुणों के अंतर्गत पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव की बूंद का गोलीय आकार न्यूनतम पृष्ठ क्षेत्रफल प्राप्त करने की प्रवृत्ति के कारण होता है, जो कि पृष्ठ तनाव के कारण संभव होता है, और यदि जल में कोई डिटर्जेंट या साबुन मिला दिया जाए तो जल का पृष्ठ तनाव बढ़ जाता है, जिससे मैल अधिक प्रभावी ढंग से बाहर निकलता है।
2. 'स्टोक्स का नियम' (Stokes' law) किसी श्यान माध्यम में गिरने वाले छोटे गोलीय पिंड पर लगने वाले श्यान बल (Viscous force) को व्यक्त करता है, जिसके अनुसार वह बल पिंड की त्रिज्या और उसके वेग के सीधे आनुपातिक होता है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में पूरी तरह या आंशिक रूप से डुबोई जाती है, तो उस पर लगने वाला उत्प्लावन बल (Buoyant force) वस्तु के डूबे हुए भाग द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर होता है, और यह बल हमेशा वस्तु के डूबे हुए भाग के गुरुत्व केंद्र पर ऊपर की ओर कार्य करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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