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General Science
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आवर्त सारणी और तत्वों के रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी परमाणु की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हमेशा ऊष्मक्षेपी (Exothermic) प्रक्रिया को दर्शाता है, किंतु आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे ऑक्सीजन और फ्लोरीन) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान उनके ठीक नीचे तृतीय आवर्त के तत्वों (जैसे सल्फर और क्लोरीन) की तुलना में कम होता है, जिसका मुख्य कारण उनके छोटे आकार के कारण होने वाला अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षक बल है।
- 2. आवर्त सारणी में किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर ऑक्साइडों की अम्लीय प्रकृति बढ़ती है और क्षारीय प्रकृति घटती है, उदाहरण के लिए सोडियम ऑक्साइड ($Na_2O$) अत्यधिक क्षारीय है, एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) उभयधर्मी (Amphoteric) है, और क्लोरीन का ऑक्साइड ($Cl_2O_7$) प्रबल अम्लीय प्रकृति का होता है।
- 3. संक्रमण तत्वों (d-ब्लॉक) के संबंध में, लैंथेनाइड आकुंचन के कारण पाँचवें और छठे आवर्त के संक्रमण तत्वों (जैसे ज़िरकोनियम और हाफ्नियम) की आयनिक और परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिससे उनके रासायनिक गुणों में अत्यधिक भिन्नता उत्पन्न हो जाती है और उन्हें एक-दूसरे से पृथक् करना बहुत आसान हो जाता है।
- 4. किसी तत्व की 'विद्युत ऋणात्मकता' (Electronegativity) एक आवर्ती गुण है जो बंधित इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने की क्षमता को मापता है, और पौलिंग पैमाने पर सबसे अधिक विद्युत ऋणात्मक तत्व फ्लोरीन है, जबकि सबसे कम विद्युत ऋणात्मकता सीसियम (Cs) की होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: आवर्त सारणी के द्वितीय आवर्त के तत्वों (जैसे फ्लोरीन और ऑक्सीजन) का आकार बहुत छोटा होता है, जिसके कारण जब इनमें नया इलेक्ट्रॉन प्रवेश करता है, तो सघन इलेक्ट्रॉन घनत्व के कारण अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षक बल (Inter-electronic repulsion) उत्पन्न होता है। यही कारण है कि क्लोरीन (Cl) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान फ्लोरीन (F) से अधिक होता है। कथन 2 सही है: आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर धातुओं के ऑक्साइड क्षारीय से उभयधर्मी और अंततः अधातुओं के ऑक्साइड अम्लीय हो जाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि लैंथेनाइड आकुंचन के कारण Zr और Hf की त्रिज्याएँ और रासायनिक गुण लगभग समान हो जाते हैं, जिससे उन्हें एक-दूसरे से पृथक् करना बेहद कठिन हो जाता है, न कि आसान। कथन 4 सही है; अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों (विटामिन और खनिज) के जैव-रासायनिक कार्यों तथा उनके उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. थيامिन (विटामिन $B_1$) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट उपापचय में पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित करता है, और इसकी गंभीर कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है।
2. नियासिन (विटामिन $B_3$) का संश्लेषण मानव शरीर में ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल से हो सकता है, तथा इसकी कमी से पैलाग्रा रोग उत्पन्न होता है जिसके क्लासिक लक्षणों में डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया शामिल हैं।
3. एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन $C$) एक जल-विलेय एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलेजन फाइबर के हाइड्रॉक्सीलेशन (प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के) के लिए आवश्यक प्रो-कोलेजन हाइड्रोक्सिलाइज एंजाइम को सक्रिय रखता है, और इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है।
4. विटामिन A (रेटिनॉल) का मुख्य सक्रिय रूप '11-सिस-रेटिनॉल' है, जो आँखों की शलाकाओं (Rods) में मौजूद वर्णक 'रोडोप्सिन' का एक प्रमुख घटक है, और इसकी कमी से केवल 'रौंधी' (Night blindness) होती है, जबकि कॉर्निया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाश के अपवर्तन-परावर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब प्रकाश की किरण किसी सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है, जिसके लिए यह आवश्यक है कि प्रकाश सघन माध्यम में ही वापस लौटे और इस घटना के दौरान परावर्तन का नियम ($i = r$) पूरी तरह से लागू होता है।
2. एक पतले उत्तल लेंस की फोकस दूरी ($f$) लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक और उसके दोनों पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याओं पर निर्भर करती है, और जब ऐसे लेंस को उस द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति अभिसारी (Converging) से बदलकर अपसारी (Diverging) हो जाती है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए दर्पण सूत्र ($rac{1}{f} = rac{1}{v} + rac{1}{u}$) सभी प्रकार की स्थितियों में लागू होता है, चाहे आपतन कोण कितना भी बड़ा हो और किरणें मुख्य अक्ष के कितनी भी दूर (Non-paraxial rays) क्यों न हों, क्योंकि यह परावर्तन के नियमों का एक सार्वभौमिक और सन्निकट-मुक्त गणितीय परिणाम है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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फिटकरी (Alum) का रासायनिक नाम क्या है?
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श्रव्य तरंगों (Audible Waves) की सीमा क्या है?
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