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General Science
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आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके प्रवृत्तियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) सामान्यतः घटती है, क्योंकि प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) में वृद्धि होती है, जो बाहरी इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित करती है।
- 2. इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान हैलोजन समूह में नीचे की ओर जाने पर (परमाणु आकार बढ़ने के साथ) लगातार बढ़ता है, और फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी समूह में सबसे अधिक ऋणात्मक होती है।
- 3. 'इलेक्ट्रॉनों को आकर्षित करने की क्षमता' को मापने के लिए पॉलिंग पैमाने (Pauling Scale) पर फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता (Electronegativity) समस्त तत्वों में सबसे अधिक होती है, जिसका मान 4.0 निर्धारित किया गया है।
- 4. सोडियम से मैग्नीशियम की ओर जाने पर प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान बढ़ जाता है, जिसका मुख्य कारण मैग्नीशियम में पूर्णतः भरे हुए 3s कक्षक (Fully filled 3s orbital) का होना है जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर नाभिकीय आवेश बढ़ता है जिससे परमाणु त्रिज्या घटती है। कथन 2 गलत है; हालांकि सामान्यतः ऊपर से नीचे जाने पर इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी कम ऋणात्मक होती है, किंतु फ्लोरीन ($F$) का छोटा आकार होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन पर प्रतिकर्षण बल अधिक लगता है, जिससे इसकी इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में कम ऋणात्मक होती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। कथन 3 सही है, पॉलिंग पैमाने पर फ्लोरीन की विद्युत ऋणात्मकता 4.0 होती है जो अधिकतम है। कथन 4 सही है, मैग्नीशियम ($3s^2$) का विन्यास अधिक स्थायी होने के कारण इसकी आयनन ऊर्जा सोडियम से अधिक होती है।
Related Questions
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घर्षण?
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मानव पोषण और जैव अणुओं (कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा विटामिन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विटामिन $B_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जिसमें कोबाल्ट धातु आयन उपस्थित होता है, और इसका भंडारण यकृत में कई वर्षों तक हो सकता है, जबकि अन्य अधिकांश जल-विलेय विटामिन शरीर में संचित नहीं होते और मूत्र के साथ उत्सर्जित हो जाते हैं।
2. आवश्यक अमीनो अम्ल (Essential amino acids) वे अमीनो अम्ल हैं जिनका संश्लेषण मानव शरीर के भीतर पर्याप्त मात्रा में नहीं हो सकता, इसलिए उन्हें आहार के माध्यम से लेना अनिवार्य होता है; उदाहरण के लिए, वैलीन, ल्यूसिन और फेनिलएलनिन आवश्यक अमीनो अम्ल की श्रेणी में आते हैं।
3. कार्बोहाइड्रेट के संदर्भ में, 'सेलूलोज' एक शाखित पॉलिसैराइड है जो ग्लूकोज की $\alpha$-डी-इकाइयों ($\alpha$-D-glucose) के ग्लाइकोसिडिक बंधों द्वारा जुड़ने से बनता है, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने वाले एंजाइम (सेल्युलेज) की अनुपस्थिति के कारण यह ऊर्जा स्रोत के रूप में कार्य नहीं कर पाता।
4. विटामिन डी एक वसा-विलेय विटामिन है जो प्रो-विटामिन के रूप में त्वचा में उपस्थित 7-डिडहाइड्रोकोलेस्टेरॉल पर पराबैंगनी किरणों के प्रभाव से संश्लेषित होता है, तथा सक्रिय हॉर्मोन के रूप में यह आंत से कैल्शियम और फॉस्फेट के अवशोषण को नियंत्रित करता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ध्वनि वेग?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भर्जन' (Roasting) की प्रक्रिया में अयस्क को वायु की अत्यधिक मात्रा की उपस्थिति में उसके गलनांक से नीचे के तापमान पर गर्म किया जाता है, जिसका मुख्य उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्कों को उनके संगत ऑक्साइडों में परिवर्तित करने के लिए किया जाता है।
2. सोडियम धातु को अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होने के कारण केरोसिन तेल के नीचे संग्रहित किया जाता है, जबकि सफेद फास्फोरस को खुली हवा में रखने पर वह स्वतः प्रज्वलित हो जाता है, इसलिए उसे सुरक्षित रखने के लिए जल के भीतर डुबोकर रखा जाता है।
3. 'थर्माइट प्रक्रम' (Thermite process) में एल्युमिनियम पाउडर का उपयोग अपचायक के रूप में किया जाता है, जो आयरन (III) ऑक्साइड जैसे धातु ऑक्साइडों को अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया के माध्यम से अपचयित करके पिघली हुई अवस्था में मुक्त करता है, जिसका उपयोग रेल की पटरियों को जोड़ने में होता है।
4. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Heroult process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें शुद्ध एलुमिना ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूरोस्पार ($CaF_2$) के मिश्रण में घोलकर विद्युत अपघटन किया जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक का हिमांक कम करने और मिश्रण की विद्युत चालकता बढ़ाने का कार्य करता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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केपलर के ग्रहों की गति के नियमों और उपग्रहों की कक्षीय गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. केपलर का द्वितीय नियम (क्षेत्रीय चाल का नियम) इस तथ्य पर आधारित है कि केंद्रीय बलों (जैसे गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत गति करते हुए किसी ग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, जिससे ग्रह सूर्य के निकट होने पर अधिक तीव्र गति से चलता है।
2. दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है और उसे अनंत तक भेजने के लिए बाह्य ऊर्जा की आवश्यकता होगी।
3. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary Satellite) की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई लगभग 36,000 किमी होती है, और यह उपग्रह पृथ्वी की घूर्णन दिशा के विपरीत पूर्व से पश्चिम की ओर अपनी कक्षा में परिक्रमण करता है।
4. किसी उपग्रह के अंदर स्थित अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण (गुरुत्वीय त्वरण) से मुक्त पतन की स्थिति में होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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