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General Science
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रासायनिक बंधन (Chemical Bonding) तथा अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक स्पीशीज होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखते हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), जबकि लुईस क्षार (Lewis Base) इलेक्ट्रॉन-युग्म दाता होते हैं।
- 2. जब किसी दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार का उदासीनीकरण किया जाता है, तो बनने वाले लवण का जलीय विलयन जल-अपघटन (Hydrolysis) के कारण क्षारीय प्रकृति का होता है और उसका pH मान 7 से अधिक होता है।
- 3. आयनिक बंध (Ionic Bond) का निर्माण मुख्य रूप से तब होता है जब एक परमाणु से दूसरे परमाणु में इलेक्ट्रॉनों का पूर्ण स्थानांतरण होता है, और यह दिशात्मक (Directional) प्रकृति का होता है जिसके कारण आयनिक यौगिक निश्चित ज्यामितीय आकृतियाँ बनाते हैं।
- 4. 'बफर विलयन' (Buffer Solution) वे विलयन होते हैं जो अपने अंदर थोड़ा सा अम्ल या क्षार मिलाने पर अपने pH मान में परिवर्तन का विरोध करते हैं, जैसे कि एसिटिक अम्ल ($CH_3COOH$) और सोडियम एसिटेट ($CH_3COONa$) का मिश्रण एक अम्लीय बफर का उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि लुईस अम्ल वे रासायनिक पदार्थ होते हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म स्वीकार कर सकते हैं (इलेक्ट्रॉन-युग्म ग्राही), और लुईस क्षार इलेक्ट्रॉन युग्म दान करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के उदासीनीकरण से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट) के जलीय विलयन में ऋणायन का जल-अपघटन होता है, जिससे $OH^-$ आयनों की अधिकता हो जाती है और विलयन क्षारीय ($pH > 7$) हो जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि आयनिक बंध अधिशेष (Non-directional) प्रकृति के होते हैं, न कि दिशात्मक; सहसंयोजक बंध (Covalent Bonds) दिशात्मक प्रकृति के होते हैं। कथन 4 सही है क्योंकि एसिटिक अम्ल और सोडियम एसिटेट का मिश्रण एक मानक अम्लीय बफर विलयन बनाता है जो pH परिवर्तन को रोकता है।
Related Questions
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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और अपवर्तन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति बदल जाती है और वह अभिसारी (Converging) के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
2. गोलीय दर्पण की फोकस दूरी ($f$) और उसकी वक्रता त्रिज्या ($R$) के बीच का संबंध $f = R/2$ होता है, और यह संबंध केवल वायु या निर्वात में ही मान्य है; यदि दर्पण को पानी में डुबो दिया जाए, तो उसकी फोकस दूरी का मान बदल जाता है।
3. वायु के सापेक्ष किसी पारदर्शी माध्यम का अपवर्तनांक उस माध्यम में प्रकाश की चाल और निर्वात में प्रकाश की चाल का अनुपात होता है, तथा सघन माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश की तरंगदैर्ध्य और वेग दोनों घट जाते हैं जबकि आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है।
4. संपर्क में रखे दो पतले लेंसों की संयुक्त क्षमता अलग-अलग लेंसों की क्षमताओं के बीजगणितीय योग के बराबर होती है ($P = P_1 + P_2$), बशर्ते दोनों लेंसों के बीच की दूरी शून्य हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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क्वांटम टनलिंग किस प्रभाव के कारण होती है?
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मानव शरीर में 'क्रैब्स चक्र' (Krebs Cycle) की प्रक्रिया कोशिका के किस अंगक के किस भाग में संपन्न होती है, और इस संपूर्ण प्रक्रिया के दौरान ग्लूकोज के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से कुल कितने एटीपी (ATP) अणुओं का प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से निर्माण होता है?
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धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक व्यवहार तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'झाग उत्प्लवन प्रक्रम' (Froth Flotation Process) का उपयोग मुख्य रूप से सल्फाइड अयस्क के सांद्रण के लिए किया जाता है, जिसमें चीड़ के तेल (Pine oil) का उपयोग 'झाग बनाने वाले' (Frother) के रूप में और सोडियम एथिल जैंथेट का उपयोग 'संवर्धक' (Collector) के रूप में किया जाता है, जो अयस्क के कणों को जल-विरोधी (Hydrophobic) बनाते हैं।
2. जब एल्यूमिना के विद्युत अपघटनी निष्कर्षण (हॉल-हेरोल्ट प्रक्रम) में क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) को मिलाया जाता है, तो यह एल्यूमिना के गलनांक को काफी हद तक कम कर देता है और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ा देता है।
3. 'दहन विधि' (Roasting) और 'निस्थापन' (Calcination) दोनों ही अयस्कों के सांद्रण के बाद किए जाने वाले प्रक्रम हैं, जिसमें निस्थापन (Calcination) सीमित वायु या वायु की अनुपस्थिति में कार्बोनेट और हाइड्रेटेड ऑक्साइड अयस्कों को उनके गलनांक से कम तापमान पर गर्म करके वाष्पशील अशुद्धियों को दूर करने के लिए किया जाता है।
4. जब तांबे के निष्कर्षण के दौरान 'मैट' (Matte), जिसमें मुख्य रूप से $Cu_2S$ और थोड़ी मात्रा में $FeS$ होता है, को बेसेमर कनवर्टर में सिलिका अस्तर के साथ धमन भट्टी में गर्म किया जाता है, तो बचा हुआ फेरस सल्फाइड स्लैग के रूप में अलग हो जाता है और अंत में प्राप्त पिघला हुआ तांबा 'फोफोरेदार कॉपर' (Blister Copper) कहलाता है, जिसमें सल्फर डाइऑक्साइड गैस के निकलने के कारण छाले पड़ जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और भारहीनता की स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी उपग्रह की कक्षीय चाल ($v_o$) पृथ्वी की त्रिज्या ($R$) और गुरुत्वीय त्वरण ($g$) पर निर्भर करती है और यह उपग्रह के द्रव्यमान पर बिल्कुल निर्भर नहीं करती है, जिसका अर्थ है कि भिन्न-भिन्न द्रव्यमान के उपग्रह भी यदि समान कक्षा में हों तो उनकी चाल समान होगी।
2. यदि पृथ्वी की सतह के बहुत समीप परिक्रमा करने वाले किसी उपग्रह की कक्षीय चाल को उसके वर्तमान मान से अचानक $\sqrt{2}$ गुना (या लगभग 41%) बढ़ा दिया जाए, तो वह उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र को पार कर जाएगा और पलायन कर जाएगा।
3. पृथ्वी के चारों ओर दीर्घवृत्तीय कक्षा में परिक्रमा कर रहे उपग्रह का कोणीय संवेग संरक्षित रहता है, क्योंकि पृथ्वी द्वारा उपग्रह पर लगने वाला गुरुत्वाकर्षण बल एक केंद्रीय बल है जिसके कारण केंद्र के परितः बल आघूर्ण (Torque) शून्य होता है।
4. उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को 'भारहीनता' (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और उसमें स्थित यात्री दोनों पृथ्वी के केंद्र की ओर समान त्वरण से मुक्त पतन (Free fall) की स्थिति में होते हैं, जिससे यात्री द्वारा फर्श पर लगने वाला अभिलंब बल शून्य हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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