त्वरित लिंक्स
General Science
25 views
मानव शरीर में उत्पन्न होने वाले विभिन्न संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों और संचरण तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'टिटनेस' (Tetanus) एक जीवाणु जनित रोग है जो 'क्लॉस्ट्रेडियम टिटानी' (Clostridium tetani) के कारण होता है, और इसके बीजाणु मिट्टी या जंग लगी वस्तुओं के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं तथा पेशियों में तीव्र ऐंठन उत्पन्न करते हैं।
- 2. 'काली खांसी' (Pertussis) जिसे व्हूपिंग कफ भी कहा जाता है, 'बर्डेटेल्ला पर्टुसिस' (Bordetella pertussis) नामक ग्राम-ऋणात्मक जीवाणु के कारण होती है, जो मुख्य रूप से श्वसन मार्ग की उपकला को संक्रमित करती है।
- 3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) एक नेत्र संक्रमण है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' (Chlamydia trachomatis) नामक सूक्ष्मजीव के कारण होता है, और यह कॉर्निया तथा कंजंक्टिवा को गंभीर रूप से नुकसान पहुँचाकर अंधेपन का कारण बन सकता है।
- 4. 'लेप्रोसी' या कुष्ठ रोग 'माइकोबैक्टीरियम लेप्री' नामक जीवाणु के कारण होता है, जो अत्यधिक संक्रामक होने के कारण श्वसन बूंदों के माध्यम से बहुत ही अल्प समय में स्वस्थ मनुष्यों में फैल जाता है और मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को नष्ट करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि टिटनेस 'क्लॉस्ट्रेडियम टिटानी' के कारण होता है, जिसके बीजाणु तंत्रिका तंत्र को प्रभावित करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि काली खांसी 'बर्डेटेल्ला पर्टुसिस' जीवाणु द्वारा होती है। कथन 3 सही है क्योंकि ट्रैकोमा एक नेत्र संक्रमण है जो 'क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस' से होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि कुष्ठ रोग (लेप्रोसी) अत्यधिक संक्रामक नहीं होता है और यह मुख्य रूप से परिधीय तंत्रिका तंत्र (Peripheral nervous system) तथा त्वचा को प्रभावित करता है, न कि केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को बहुत अल्प समय में नष्ट करता है। इस विषय की विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
विभवांतर?
→
एक अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा कैसा होता है?
→
प्लांक नियतांक (Planck Constant) का मान SI इकाई में क्या है?
→
आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों (Periodic Properties) और उनके रासायनिक व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, हालांकि ऑक्सीजन की तुलना में नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अधिक होती है क्योंकि नाइट्रोजन में अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व पाया जाता है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान सभी तत्वों के लिए हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन ही होता है, चाहे उस परमाणु का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास या आकार कुछ भी हो।
3. हैलोजन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में अधिक (अधिक ऋणात्मक) होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है जिसके कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक बल का मान कम हो जाता है।
4. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid contraction) के कारण $5d$ श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे हाफ्नियम, $Hf$) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित $4d$ श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, $Zr$) के लगभग बराबर हो जाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
ध्वनि का तारत्व (Pitch) किस पर निर्भर करता है?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.