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General Science
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ऊष्मा और ऊष्मागतिकी के विभिन्न नियमों तथा तापमापी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण का एक विशेष रूप है, जिसके अनुसार किसी निकाय को दी जाने वाली ऊष्मा उसकी आंतरिक ऊर्जा में परिवर्तन और निकाय द्वारा किए गए कार्य के योग के बराबर होती है।
  2. 2. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic Process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का विनिमय शून्य होता है, जिसके कारण यदि किसी गैस का अचानक संपीडन किया जाए, तो उसकी आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि होती है और ताप बढ़ जाता है।
  3. 3. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी विद्युत प्रतिरोध के तापमान के साथ रैखिक परिवर्तन के सिद्धांत पर कार्य करती है और इसका उपयोग बहुत कम तापमान से लेकर उच्च तापमान तक के सटीक मापन के लिए किया जाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
  4. 4. जल का त्रिक बिंदु (Triple Point of Water) वह विशिष्ट तापमान और दाब है जिस पर बर्फ, द्रव जल और जलवाष्प सह-अस्तित्व में तापीय साम्य में होते हैं, और केल्विन पैमाने पर इसका मानक मान 273.16 K होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन ऊष्मा और ऊष्मागतिकी (Thermodynamics) के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं: 1. ऊष्मागतिकी का प्रथम नियम ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है ($dQ = dU + dW$)। 2. रुद्धोष्म प्रक्रम में ऊष्मा का आदान-प्रदान ($dQ = 0$) नहीं होता है; अतः अचानक संपीडन से गैस की आंतरिक ऊर्जा बढ़ती है और उसका ताप बढ़ जाता है। 3. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी प्रतिरोध में परिवर्तन के आधार पर तापमान का व्यापक परिसर में सटीक मापन करती है। 4. जल का त्रिक बिंदु 273.16 K और 0.0061 atm दाब पर निर्धारित होता है जहाँ तीनों अवस्थाएँ तापीय साम्य में होती हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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