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ऊष्मागतिकी के दूसरे नियम, एंट्रॉपी (Entropy) और विभिन्न तापमापी पैमानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम स्पष्ट करता है कि किसी भी स्वतः स्फूर्त (Spontaneous) प्रक्रम में ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी हमेशा बढ़ती है, और आदर्श रूप से उत्क्रमणीय (Reversible) प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है।
- 2. केल्विन ताप पैमाने पर तापमान की परिभाषा ऊष्मागतिकी के द्वितीय नियम पर आधारित होती है, और इस पैमाने पर किसी वस्तु का ऋणात्मक तापमान संभव है क्योंकि कार्नोट इंजन की दक्षता 100% से अधिक हो सकती है।
- 3. जब किसी गैस का रुद्धोष्म (Adiabatic) स्वतंत्र प्रसार (Free expansion) निर्वात में किया जाता है, तो गैस द्वारा कोई कार्य नहीं किया जाता और न ही कोई ऊष्मा बाहर से दी जाती है, किंतु इस अप्रतिवर्ती प्रक्रम के कारण गैस की एंट्रॉपी में वृद्धि होती है।
- 4. प्लैटिनम प्रतिरोध तापमापी और गैस तापमापी दोनों ही तापमान मापन के लिए उपयोग किए जाते हैं, जिसमें स्थिर आयतन गैस तापमापी को उसके अत्यधिक व्यापक कार्यक्षेत्र और उच्च यथार्थता के कारण प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऊष्मागतिकी का दूसरा नियम (क्लॉसियस और केल्विन-प्लैंक कथन) बताता है कि ब्रह्मांड की कुल एंट्रॉपी प्राकृतिक रूप से होने वाले सभी अप्रतिवर्ती प्रक्रमों में लगातार बढ़ती है, जबकि आदर्श उत्क्रमणीय प्रक्रम में कुल एंट्रॉपी परिवर्तन शून्य होता है। कथन 2 गलत है क्योंकि केल्विन ताप पैमाने (परम ताप पैमाना) पर तापमान कभी भी ऋणात्मक नहीं हो सकता (निरपेक्ष शून्य 0 K न्यूनतम सीमा है), और कार्नोट इंजन की दक्षता कभी भी 100% नहीं हो सकती। कथन 3 सही है क्योंकि निर्वात में रुद्धोष्म स्वतंत्र प्रसार के दौरान बाह्य दाब शून्य होने के कारण किया गया कार्य ($W = 0$) और ऊष्मा विनिमय ($Q = 0$) दोनों शून्य होते हैं, लेकिन यह एक अत्यंत अप्रतिवर्ती प्रक्रम है जिससे एंट्रॉपी बढ़ती है। कथन 4 सही है, स्थिर आयतन गैस तापमापी आदर्श गैस व्यवहार के निकट होने के कारण अत्यंत यथार्थ होती है और इसे प्राथमिक मानक तापमापी माना जाता है, जिसके बारे में अधिक जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में उपलब्ध है।
Related Questions
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कार्बनिक रसायन में हाइड्रोकार्बन, उनके समवयव (Isomers) और ईंधन की दहन विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शाखित श्रृंखला वाले ऐल्केन (Branched-chain alkanes) की तुलना में सीधी श्रृंखला वाले ऐल्केन (Straight-chain alkanes) में ऑक्टेन संख्या अधिक होती है, जिसके कारण वे आंतरिक दहन इंजन (Internal combustion engines) में 'नॉकर्स' (Knockers) के रूप में कार्य करते हैं।
2. 'मार्कोवनीकॉव नियम' (Markovnikov's Rule) के अनुसार, किसी असममित ऐल्कीन पर हाइड्रोजन हैलाइड का योग होने पर अभिकर्मक का ऋणात्मक भाग उस कार्बन परमाणु से जुड़ता है जिस पर हाइड्रोजन परमाणुओं की संख्या कम होती है।
3. द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन का मिश्रण होती है, जिसमें अत्यधिक गंध के लिए जानबूझकर एथिल मर्कैप्टेन ($C_2H_5SH$) नामक सल्फर यौगिक मिलाया जाता है ताकि गैस रिसाव का आसानी से पता चल सके।
4. एसिटिलीन (एथाइन) एक असंतृप्त हाइड्रोकार्बन है जो ऑक्सीजन की उपस्थिति में जलने पर अत्यधिक उच्च तापमान की लौ उत्पन्न करता है, जिसका उपयोग धातुओं की वेल्डिंग और कटाई के लिए ऑक्सी-एसिटिलीन टॉर्च में किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अनुनाद (Resonance)?
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मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और सूक्ष्म पोषक तत्वों (विटामिन और खनिज) के जैव-रासायनिक कार्यों तथा उनके उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. थيامिन (विटामिन $B_1$) अपने सक्रिय सह-एंजाइम रूप 'थियामिन पाइरोफॉस्फेट' (TPP) के माध्यम से कार्बोहाइड्रेट उपापचय में पाइरुवेट के एसिटाइल-CoA में ऑक्सीडेटिव डीकार्बोक्सिलेशन को उत्प्रेरित करता है, और इसकी गंभीर कमी से 'बेरी-बेरी' रोग होता है।
2. नियासिन (विटामिन $B_3$) का संश्लेषण मानव शरीर में ट्रिप्टोफैन अमीनो अम्ल से हो सकता है, तथा इसकी कमी से पैलाग्रा रोग उत्पन्न होता है जिसके क्लासिक लक्षणों में डर्मेटाइटिस, डायरिया और डिमेंशिया शामिल हैं।
3. एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन $C$) एक जल-विलेय एंटीऑक्सीडेंट है जो कोलेजन फाइबर के हाइड्रॉक्सीलेशन (प्रोलिन और लाइसिन अवशेषों के) के लिए आवश्यक प्रो-कोलेजन हाइड्रोक्सिलाइज एंजाइम को सक्रिय रखता है, और इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है।
4. विटामिन A (रेटिनॉल) का मुख्य सक्रिय रूप '11-सिस-रेटिनॉल' है, जो आँखों की शलाकाओं (Rods) में मौजूद वर्णक 'रोडोप्सिन' का एक प्रमुख घटक है, और इसकी कमी से केवल 'रौंधी' (Night blindness) होती है, जबकि कॉर्निया पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव शरीर के परिसंचरण, श्वसन और पाचन तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मानव हृदय का दाहिना आलिंद (Right Atrium) शरीर के विभिन्न भागों से अशुद्ध रक्त को प्राप्त करता है, जिसे त्रिवलनी कपाट (Tricuspid Valve) के माध्यम से दाहिने निलय में भेजा जाता है, और यहाँ से यह रक्त फुफ्फुसीय शिरा (Pulmonary Vein) द्वारा फेफड़ों में शुद्धिकरण के लिए भेजा जाता है।
2. कूपिकाओं (Alveoli) में होने वाले गैसीय विनिमय के दौरान, ऑक्सीजन का आंशिक दाब अधिक होने के कारण यह विसरण द्वारा रक्त में प्रवेश करती है, जहाँ यह मुख्य रूप से हीमोग्लोबिन के साथ reversible रूप से बंधकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन का निर्माण करती है।
3. आमाशय (Stomach) के जठर रस में उपस्थित 'पेप्सिनोजेन' एक निष्क्रिय एंजाइम है, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय 'पेप्सिन' में परिवर्तित हो जाता है और प्रोटीन को प्रोटियोज़ तथा पेप्टोन में जल अपघटित करता है।
4. छोटी आंत के अग्रभाग (ग्रहणी या ड्यूडेनम) में अग्न्याशय द्वारा स्रावित 'ट्रिप्सिनोजेन' एंजाइम आंत की श्लेष्मला द्वारा स्रावित 'एंटेरोकाइनेज' एंजाइम के सक्रिय प्रभाव से सक्रिय ट्रिप्सिन में बदलता है, जो वसा के पाचन में मुख्य भूमिका निभाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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धातुओं, अधातुओं और उनके प्रमुख यौगिकों के रासायनिक गुणों तथा निष्कर्षण प्रक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हरोल्ट प्रक्रम (Hall-Héroult process) में शुद्ध एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) को पिघले हुए क्रायोलाइट ($Na_3AlF_6$) और फ्लूएस्पर ($CaF_2$) के मिश्रण में घोला जाता है, जहाँ क्रायोलाइट विलायक का कार्य करते हुए मिश्रण के गलनांक को कम करता है और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाता है।
2. कॉपर मैटे (Copper matte), जो प्रगलन (Smelting) प्रक्रिया के दौरान परावर्ती भट्टी (Refractory furnace) में प्राप्त होता है, मुख्य रूप से क्यूप्रस सल्फाइड ($Cu_2S$) और फेरस सल्फाइड ($FeS$) का मिश्रण होता है, और इससे तांबे के निष्कर्षण (बेसेमरलीकरण) के दौरान फेरस सल्फाइड को हटाने के लिए सिलिका ($SiO_2$) का उपयोग गालक (Flux) के रूप में किया जाता है।
3. सफेद फॉस्फोरस ($P_4$) एक अत्यधिक अभिक्रियाशील, प्रतिक्रियाशील और दीप्तशील (Phosphorescent) अणु है जो कमरे के तापमान पर वायु में स्वतः जल उठता है, जबकि लाल फॉस्फोरस पॉलीमरिक संरचना होने के कारण कम अभिक्रियाशील होता है और विषैला नहीं होता है।
4. संक्रमण धातुओं के यौगिकों में 'लैंथेनाइड संकुचन' के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणियों के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ्नियम) की परमाणु त्रिज्याएँ और रासायनिक गुण लगभग समान हो जाते हैं, जिससे उन्हें अयस्कों से पृथक्करण करना अत्यंत कठिन हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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