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General Science
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प्रकाशकीय प्रणालियों और लेंस-दर्पण के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जब किसी उत्तल लेंस (Convex lens) को ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति बदल जाती है और वह अपसारी (Diverging) लेंस की तरह व्यवहार करने लगता है।
  2. 2. एक पूर्ण परावर्तक प्रिज्म (Total Reflecting Prism) का उपयोग बिना किसी ऊर्जा हानि के प्रकाश की किरण को 90° या 180° से मोड़ने के लिए किया जाता है, जिसके लिए प्रिज्म का क्रांतिक कोण 42° से कम होना चाहिए और आपतन कोण क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
  3. 3. गोलीय दर्पणों के लिए रेखीय आवर्धन ($m$) का मान वस्तु की दूरी ($u$) और प्रतिबिंब की दूरी ($v$) के पदों में $m = \frac{f}{f - u}$ होता है, जहाँ $f$ दर्पण की फोकस दूरी है।
  4. 4. जब प्रकाश की किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है, तो अपवर्तन के कारण आपतन कोण का मान हमेशा अपवर्तन कोण से बड़ा होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: लेंस निर्माता सूत्र (Lens Maker's Formula) के अनुसार, जब किसी उत्तल लेंस को ऐसे माध्यम में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ से अधिक होता है, तो फोकस दूरी का चिह्न बदल जाता है जिससे उत्तल लेंस अवतल लेंस की भाँति (अपसारी) व्यवहार करने लगता है। कथन 2 सही है: समकोण समद्विबाहु प्रिज्म का क्रांतिक कोण लगभग 42° होता है। जब प्रकाश किरण अभिलंबवत प्रवेश करती है और आपतन कोण 45° होता है (जो 42° से अधिक है), तो पूर्ण आंतरिक परावर्तन होता है, जिससे किरण 90° या 180° मुड़ जाती है। कथन 3 सही है: दर्पण के सूत्र $\frac{1}{f} = \frac{1}{v} + \frac{1}{u}$ और आवर्धन $m = -\frac{v}{u}$ को संयोजित करने पर आवर्धन का व्यंजक $m = \frac{f}{f - u}$ प्राप्त होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है, तो वह अभिलंब से दूर हटती है, जिसके कारण अपवर्तन कोण ($r$) का मान आपतन कोण ($i$) से बड़ा होता है ($r > i$)। इस विषय की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
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