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General Science
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मानव शरीर को प्रभावित करने वाले संक्रामक रोगों, उनके रोगजनकों, संचरण तंत्र तथा नैदानिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. 'खसरा' (Measles) एक अत्यधिक संक्रामक विषाणु जनित रोग है जो पैरामिक्सोवायरस परिवार के आरएनए वायरस के कारण होता है, और इसके विशिष्ट लक्षणों में कॉपليك धब्बे (Koplik spots) का प्रकट होना शामिल है।
  2. 2. 'सिफलिस' (Syphilis) एक यौन संचारित जीवाणु जनित संक्रमण है जिसका कारक स्पाइरोचेट जीवाणु 'ट्रेपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) है, जो प्राथमिक चरण में दर्द रहित व्रण (Chancre) उत्पन्न करता है।
  3. 3. 'जापानी Encephalitis' (मस्तिष्कशोथ) एक विषाणु जनित रोग है जिसका संचरण मुख्य रूप से 'क्यूलेक्स' (Culex) प्रजाति की संक्रमित मादा मच्छरों द्वारा होता है, और यह केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।
  4. 4. 'फाइलेरियासिस' (हाथीपाव) कृमि जनित रोग है जो वुचेरेरिया ब्रैंक्रॉफ्टी (Wuchereria bancrofti) नामक गोलकृमि के कारण होता है, और इसके वयस्क परजीवी मुख्य रूप से रक्त वाहिकाओं में वास करते हैं, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: खसरा (Measles) एक तीव्र संक्रामक वायरल बीमारी है जो पैरामिक्सोवायरस (Paramyxovirus) परिवार के कारण होती है। इसके नैदानिक लक्षणों में मुंह के भीतर श्लेष्म झिल्ली पर 'कॉपليك धब्बे' (Koplik spots) का दिखना एक महत्वपूर्ण पहचान है। कथन 2 सही है: सिफलिस एक यौन संचारित संक्रमण (STI) है जो 'ट्रेपोनेमा पैलिडम' (Treponema pallidum) नामक स्पाइरोचेट जीवाणु से होता है, जिसमें संक्रमण के शुरुआती चरण में जननांगों पर दर्द रहित 'चैंकर' (Chancre) बनते हैं। कथन 3 सही है: जापानी एन्सेफलाइटिस एक फ्लेविवायरस जनित मस्तिष्क का संक्रमण है, जो क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से फैलता है। कथन 4 असत्य है: फाइलेरियासिस (हाथीपाव) के वयस्क परजीवी (जैसे वुचेरेरिया ब्रैंक्रॉफ्टी) रक्त वाहिकाओं में नहीं, बल्कि मुख्य रूप से लसीका वाहिकाओं (Lymphatic vessels) और ग्रंथियों में वास करते हैं, जिससे लसीका का रुकावट और सूजन होती है। इस प्रकार कथन 1, 2 और 3 सही हैं, जिसके बारे में अधिक जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
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Related Questions

→ मानव रोगों और उनके रोगजनकों, संचरण तंत्र तथा नैदानिक लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'मलेरिया' (Malaria) प्लाज्मोडियम प्रजाति के प्रोटोजोआ के कारण होता है, जिसका संचरण मादा एनोफिलीज मच्छर के काटने से होता है, और इसके गंभीर रूप (प्लाज्मोडियम फैल्ciparum) में रोगी को 'ब्लैकवाटर फीवर' हो सकता है जिसमें हीमोग्लोबिनयूरिया (मूत्र के साथ हीमोग्लोबिन का आना) की स्थिति उत्पन्न होती है। 2. 'डिफ्थीरिया' (Diphtheria) कॉर्नेबैक्टीरियम डिफ्थिरियाई (Corynebacterium diphtheriae) नामक ग्राम-पॉजिटिव जीवाणु के कारण होता है, जो श्वसन नली में एक स्रावी धूसर रंग की 'झिल्ली' (Pseudomembrane) का निर्माण करता है और इसके एक्सोटॉक्सिन से हृदय तथा तंत्रिका तंत्र को गंभीर क्षति पहुँचती है। 3. 'ट्रैकोमा' (Trachoma) क्लैमाइडिया ट्रैकोमैटिस (Chlamydia trachomatis) नामक अंतःकोशिकी जीवाणु के कारण होने वाला नेत्र संक्रमण है, जो कार्निया और कंजंक्टिवा को प्रभावित करता है और लंबे समय तक संक्रमण रहने से पलकें अंदर की ओर मुड़ जाती हैं (ट्रिकियासिस)। 4. 'लेप्रॉसी' (कुष्ठ रोग) माइकोबैक्टीरियम लेप्रे के कारण होता है, जो मुख्य रूप से केंद्रीय तंत्रिका तंत्र और मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को गंभीर रूप से क्षति पहुँचाता है, जबकि इसकी परिधीय तंत्रिकाओं और त्वचा पर कोई संवेदनशीलता प्रभावित नहीं होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या (Atomic Radius) सामान्यतः घटती है, जिसका मुख्य कारण प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में क्रमिक वृद्धि होना है, जिससे बाह्यतम इलेक्ट्रॉन नाभिक की ओर अधिक तीव्रता से आकर्षित होते हैं। 2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और आवर्त सारणी में फ्लोरीन (F) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी क्लोरीन (Cl) से अधिक ऋणात्मक (उच्चतम) होती है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है। 3. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण, 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे हाफ्नियम, Hf) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग उनके ठीक ऊपर स्थित 4d श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम, Zr) के लगभग समान हो जाती हैं। 4. आयनन एन्थैल्पी (Ionization Enthalpy) का क्रमिक मान किसी परमाणु से इलेक्ट्रॉनों को निकालने की कठिनाई को दर्शाता है, और किसी भी उदासीन परमाणु की द्वितीय आयनन एन्थैल्पी हमेशा उसकी प्रथम आयनन एन्थैल्पी से अधिक होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी चालक तार की लंबाई को खींचकर दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का चार गुना हो जाता है, बशर्ते उसका आयतन और तापमान अपरिवर्तित रहें। 2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत उच्च यथार्थता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित अवस्था में होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है। 3. जब समान क्षमता के कई सेलों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में बहुत अधिक प्राप्त होता है, जो तब सबसे लाभदायक होता है जब बाह्य प्रतिरोध आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक हो। 4. किसी विद्युत परिपथ में शक्ति क्षय (Power dissipation) केवल धारा के वर्ग ($I^2$) और प्रतिरोध ($R$) के गुणनफल पर निर्भर करता है, और यह परिपथ में जुड़े प्रतिरोधकों के श्रेणी या समानांतर विन्यास से स्वतंत्र होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भूस्थिर उपग्रहों (Geostationary Satellites) और ध्रुवीय उपग्रहों (Polar Satellites) की गति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर एक ऐसी कक्षा में स्थापित किए जाते हैं जहाँ उनका परिक्रमण काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल (ठीक 24 घंटे) के बराबर होता है और उनकी परिक्रमा की दिशा हमेशा पश्चिम से पूर्व की ओर होती है। 2. ध्रुवीय उपग्रह बहुत कम ऊँचाई (लगभग 500 से 800 किमी) पर चक्कर लगाते हैं और इनकी कक्षा उत्तर-दक्षिण दिशा में होती है, जिससे ये पृथ्वी के उत्तर और दक्षिण ध्रुवों के ऊपर से गुजरते हुए पूरे ग्लोब का रिमोट सेंसिंग और मौसम पूर्वानुमान के लिए प्रेक्षण करते हैं। 3. तुल्यकालिक कक्षा (Synchronous Orbit) में घूमते हुए किसी उपग्रह की कक्षीय चाल (Orbital velocity), भूस्थिर कक्षा के उपग्रह की तुलना में अधिक होती है क्योंकि इसकी ऊँचाई भूस्थिर उपग्रह की तुलना में कम होती है। 4. किसी उपग्रह के भीतर बैठे अंतरिक्ष यात्री को भारहीनता (Weightlessness) का अनुभव इसलिए होता है क्योंकि उपग्रह और अंतरिक्ष यात्री दोनों पर पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण बल कार्य करना बंद कर देता है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों का त्वरण शून्य हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → नाभिकीय भौतिकी और कण त्वरकों (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'साइक्लोट्रॉन' (Cyclotron) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग आवेशित कणों जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन को उच्च गति तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, जिसमें चुंबकीय क्षेत्र कणों को वृत्ताकार मार्ग पर घुमाता है और एक परिवर्ती विद्युत क्षेत्र कणों को प्रत्येक चक्कर में ऊर्जा प्रदान करता है। 2. 'आइंस्टीन का द्रव्यमान-ऊर्जा समतुल्यता सिद्धांत' ($E=mc^2$) के अनुसार, जब किसी भारी परमाणु के नाभिक का विखंडन या हल्के नाभिकों का संलयन होता है, तो द्रव्यमान में होने वाली सूक्ष्म क्षति (Mass defect) ही अपार ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है। 3. नाभिकीय रिएक्टरों में 'नियंत्रक छड़ें' (Control rods) के रूप में कैडमियम या बोरॉन का उपयोग किया जाता है, जो श्रृंखला अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए विखंडन प्रक्रिया के दौरान उत्पन्न होने वाले अतिरिक्त प्रोटॉनों का पूर्णतः अवशोषण करती हैं। उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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