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प्रकाशिकी (Optics) के अंतर्गत लेंसों, दर्पणों और प्रकाशीय परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. जब किसी उत्तल लेंस (Convex lens) को ऐसे पारदर्शी द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की अभिसारी (Converging) प्रकृति उलट जाती है और वह एक अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति व्यवहार करने लगता है।
- 2. पानी के अंदर स्थित वायु का बुलबुला प्रकाश की किरणों को अभिसरित (Converge) करता है, क्योंकि पानी का अपवर्तनांक वायु की तुलना में अधिक होता है, जिससे बुलबुला एक उत्तल लेंस की तरह कार्य करता है।
- 3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि वस्तु की वास्तविक दूरी $u$ और प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो वास्तविक प्रतिबिंब के लिए रेखीय आवर्धन ($m$) का मान ऋणात्मक होता है, जबकि आभासी प्रतिबिंब के लिए यह धनात्मक होता है।
- 4. पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total Internal Reflection) की परिघटना के लिए प्रकाश की किरण का विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाना अनिवार्य है, तथा आपतन कोण का मान माध्यम के क्रांतिक कोण से अधिक होना चाहिए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: जब किसी लेंस को ऐसे माध्यम में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ से अधिक होता है, तो लेंस की प्रकृति बदल जाती है (उत्तल लेंस अपसारी और अवतल लेंस अभिसारी बन जाता है)। कथन 2 गलत है: पानी के अंदर वायु का बुलबुला उत्तल आकृति का होने के बावजूद, सघन माध्यम (जल) में विरल माध्यम (वायु) का बुलबुला होने के कारण प्रकाश की किरणों को **अपसरित** (Diverge) करता है, न कि अभिसरित। कथन 3 सही है: गोलीय दर्पणों में वास्तविक प्रतिबिंब के लिए रेखीय आवर्धन ($m$) हमेशा ऋणात्मक और आभासी प्रतिबिंब के लिए धनात्मक होता है। कथन 4 गलत है क्योंकि पूर्ण आंतरिक परावर्तन के लिए प्रकाश का **सघन माध्यम से विरल माध्यम** में जाना आवश्यक है, न कि विरल से सघन माध्यम में। इस विषय की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
Related Questions
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मानव रक्त परिसंचरण तंत्र और ABO तथा Rh रक्त समूह प्रणालियों के सूक्ष्म जैव-रासायनिक एवं immunotoxicolgical संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ABO रक्त समूह प्रणाली में, रक्त समूह 'A' और 'B' के व्यक्तियों के प्लाज्मा में क्रमशः 'एंटी-B' और 'एंटी-A' एंटीबॉडी पाई जाती हैं, जो कि मुख्य रूप से IgM प्रकार की इम्युनोग्लोबुलिन होती हैं, और इनका आणविक आकार बड़ा होने के कारण ये प्लेसेंटा (अपरा) को पार करके गर्भस्थ शिशु तक नहीं पहुँच सकती हैं।
2. 'बॉम्बे रक्त समूह' ($O_h$) से ग्रसित व्यक्तियों की लाल रक्त कोशिकाओं पर 'H-एंटीजन' का पूर्णतः अभाव होता है क्योंकि उनमें FUT1 (Fucosyltransferase 1) जीन का उत्परिवर्तन होता है, जिसके परिणामस्वरूप उनके प्लाज्मा में एंटी-A, एंटी-B के साथ-साथ एक शक्तिशाली 'एंटी-H' एंटीबॉडी भी प्राकृतिक रूप से उपस्थित होती है।
3. एरिथ्रोब्लास्टोसिस फिटलिस (Erythroblastosis fetalis) की स्थिति मुख्य रूप से तब उत्पन्न होती है जब एक Rh-ऋणात्मक (Rh⁻) पिता और एक Rh-धनात्मक (Rh⁺) माता से उत्पन्न होने वाला पहला शिशु Rh-धनात्मक होता है, और प्रसव के दौरान माँ के शरीर में एंटी-Rh एंटीबॉडी का निर्माण होता है।
4. रुधिर स्कंदन (Blood coagulation) की प्रक्रिया में कैल्शियम आयन ($Ca^{2+}$) एक आवश्यक सह-कारक के रूप में कार्य करता है, जो प्रोथ्रोम्बिन को सक्रिय थ्रॉम्बिन में बदलने तथा फाइब्रिनोजेन को अघुलनशील फाइब्रिन तंतुओं में बहुलीकृत करने के लिए अनिवार्य रूप से आवश्यक होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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तरंग की तीव्रता?
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मानव रोगों और उनके संचरण या उपचार के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. ट्राइकोफाइटन (Trichophyton): यह एक कवक (Fungus) है जो मानव में 'दाद' (Ringworm) रोग का कारण बनता है, और इसके उपचार के लिए आमतौर पर एंटीफंगल दवाओं का उपयोग किया जाता है।
2. वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी (Wuchereria bancrofti): यह एक गोलकृमि (Nematode parasite) है जो फाइलेरिया या श्लीपद (Elephantiasis) का कारण बनता है, जिसका संचरण मुख्य रूप से मादा एनोफेलीज मच्छर के काटने से होता है।
3. प्लाज्मोडियम फाल्ciparum (Plasmodium falciparum): यह मलेरिया का सबसे गंभीर रूप पैदा करने वाला प्रोटोजोआ है, जिसके जीवन चक्र में मानव प्राथमिक परपोषी (Primary host) और मादा क्यूलैक्स मच्छर माध्यमिक परपोषी होता है।
4. लेइशमानिया डोनोवानी (Leishmania donovani): यह काला-जार (Kala-azar) का कारक जीव है, जो शरीर में मैक्रोफेज कोशिकाओं को संक्रमित करता है और इसका संचरण सिकफ्लाई (Sandfly / बालू मक्खी) द्वारा होता है।
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) और पादप हार्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को पादप जगत का 'उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनमें मुख्य पादप शरीर बीजाणुकोद्भिद (Sporophyte) होता है जो युग्मकोद्भिद पर पूर्ण रूप से आश्रित रहता है।
2. प्रकाश संश्लेषण के प्रकाश-स्वतंत्र चरण (केल्विन चक्र) के दौरान, कार्बन डाइऑक्साइड का स्थिरीकरण मुख्य रूप से C3 पौधों में RuBisCO एंजाइम द्वारा होता है, जबकि C4 पौधों में यह प्रक्रिया पहले मैलिक एसिड या ऑक्जेलोएसेटिक एसिड के रूप में पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में होती है।
3. ऑक्सिन (Auxin) और जिबरेलिन (Gibberellin) दोनों पादप वृद्धि प्रवर्धक (Growth promoters) हैं, जहाँ ऑक्सिन शीर्ष प्रमुखता (Apical dominance) के लिए उत्तरदायी है, वहीं जिबरेलिन आनुवंशिक रूप से बौने पौधों में तने की लंबाई में वृद्धि और पर्णरंध्रों को बंद करने को प्रेरित करता है।
4. एब्सिसिक एसिड (ABA) एक पादप वृद्धि inhibitor (संदमक) है जो तनाव हार्मोन के रूप में कार्य करता है, तथा यह सूखे या जल-तनाव की स्थिति में पर्णरंध्रों (Stomata) के बंद होने को प्रेरित करता है ताकि वाष्पोत्सर्जन को कम किया जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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तरलों के यांत्रिकी गुणों और उनके व्यवहार—विशेषकर पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface tension) अणुओं के बीच प्रभावी संसंजक बलों (Cohesive forces) के कारण उत्पन्न होता है, और जब किसी द्रव में कोई अल्प विलेय अशुद्धि जैसे सर्फेक्टेंट मिलाई जाती है, तो यह पृष्ठ को आंशिक रूप से ढंककर द्रव के पृष्ठ तनाव को काफी हद तक कम कर देती है।
2. श्यानता गुणांक (Coefficient of Viscosity) द्रवों में आंतरिक घर्षण का माप है, और जहाँ गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ घटती है, वहीं द्रवों की श्यानता तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है क्योंकि उच्च तापमान पर द्रवों के अणुओं की गतिज ऊर्जा बढ़ने से संसंजक बल मजबूत हो जाते हैं।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी वस्तु को किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोया जाता है, तो वह वस्तु अपने द्वारा विस्थापित तरल के भार के बराबर ऊपर की ओर एक उत्प्लावन बल का अनुभव करती है, और यह उत्प्लावन बल विस्थापित तरल के गुरुत्व केंद्र (Centre of gravity) पर कार्य करता है, न कि डूबे हुए भाग के द्रव्यमान केंद्र पर।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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