BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

General Science
1 views

धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के रासायनिक तथा भौतिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सोडियम और पोटेशियम जैसी अत्यंत क्रियाशील धातुएं ठंडे पानी के साथ तीव्र अभिक्रिया करके हाइड्रोजन गैस मुक्त करती हैं और यह अभिक्रिया अत्यधिक ऊष्माक्षेपी होती है, जबकि कैल्शियम पानी के साथ कम तीव्र गति से अभिक्रिया करता है और उत्पन्न होने वाली हाइड्रोजन गैस के बुलबुले धातु की सतह से चिपक जाते हैं जिससे कैल्शियम तैरने लगता है।
  2. 2. ऐलुमिनियम, जिंक और टिन जैसी धातुएं उभयधर्मी (Amphoteric) ऑक्साइड या हाइड्रॉक्साइड का निर्माण करती हैं, जिसका अर्थ है कि वे अम्ल और क्षार दोनों के साथ अभिक्रिया करके लवण और पानी बनाती हैं।
  3. 3. मिश्रधातु 'अमलगम' (Amalgam) में एक अनिवार्य धातु हमेशा पारा (Mercury) होती है, और लोहे की अनभिक्रियाशीलता (Unreactivity) के कारण लोहा पारे के साथ आसानी से अमलगम बना लेता है, यही कारण है कि पारे के भंडारण के लिए लोहे के पात्रों का उपयोग किया जाता है।
  4. 4. उत्कृष्ट गैसों के अतिरिक्त, कुछ अधातुएं जैसे सल्फर और फॉस्फोरस अपनी बहुपरमाणुकता दर्शाती हैं, जिसमें सल्फर $S_8$ के रूप में वलय संरचना और श्वेत फॉस्फोरस $P_4$ के रूप में चतुष्फलकीय संरचना बनाता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि सोडियम और पोटेशियम ठंडे पानी के साथ अत्यधिक ऊष्माक्षेपी अभिक्रिया करते हैं और कैल्सियम पानी के साथ अभिक्रिया करते समय हाइड्रोजन गैस के बुलबुले सतह पर चिपकने के कारण तैरने लगता है। कथन 2 सही है क्योंकि ऐलुमिनियम और जिंक जैसी धातुएं उभयधर्मी प्रकृति दर्शाती हैं जो अम्ल और क्षार दोनों से क्रिया करती हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि लोहा (Iron) पारे के साथ अमलगम का निर्माण नहीं करता है, यही कारण है कि पारे (Mercury) को संग्रहित करने के लिए लोहे के बर्तनों (Iron containers) का उपयोग किया जाता है। कथन 4 सही है क्योंकि सल्फर ($S_8$) और श्वेत फॉस्फोरस ($P_4$) बहुपरमाणुक रूप में पाए जाते हैं। धातु और अधातु के गुणों के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

रेगिस्तानी ओक? डायबिटीज? मानव शरीर में जैविक अणुओं और पोषण (विटामिन, कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विटामिन $B_{12}$ (सायनोकोबलामिन) एकमात्र ऐसा जल-विलेय विटामिन है जो मानव शरीर में यकृत (Liver) और अन्य ऊतकों में कई वर्षों तक संग्रहीत रह सकता है, और इसके अवशोषण के लिए आमाशय की पैरीटाल कोशिकाओं द्वारा स्रावित 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) अनिवार्य होता है। 2. प्रोटीन संरचना के संदर्भ में, प्रोटीनों की 'तृतीयक संरचना' (Tertiary structure) पॉलीपेप्टाइड श्रृंखला की त्रि-आयामी वलय को दर्शाती है, जो हाइड्रोजन आबंध, आयनिक आबंध, वैन डेर वाल्स बलों और डाइसल्फ़ाइड आबंधों द्वारा स्थायी बनती है, और यह संरचना एंजाइमी सक्रियता के लिए पूर्णतः आवश्यक होती है। 3. कार्बोहाइड्रेट चयापचय में, 'सेलूलोज' एक ऐसा सम-पॉलीसैराइड (Homopolysaccharide) है जिसमें ग्लूकोज इकाइयाँ $eta$-1,4-ग्लाइकोसिडिक बंध द्वारा जुड़ी होती हैं, और मानव पाचन तंत्र में इसे पचाने वाले एंजाइम (सेल्युलेज) की अनुपस्थिति के कारण यह ऊर्जा प्रदान नहीं करता, बल्कि आंतों में आहारीय फाइबर (Dietary fiber) के रूप में कार्य करता है। 4. वसा-विलेय विटामिन 'विटामिन A' (रेटिनॉल) की अत्यधिक कमी से केवल नेत्र संबंधी विकार जैसे कि जीरोथैल्मिया और रतौंधी होती है, और इसका अत्यधिक सेवन (हाइपरविटामिनोसिस A) मानव शरीर में किसी भी प्रकार की विषैली प्रतिक्रिया या ऊतक क्षति उत्पन्न नहीं करता क्योंकि यह मूत्र के माध्यम से आसानी से उत्सर्जित हो जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मानव शरीर के पाचन, श्वसन, परिसंचरण और तंत्रिका तंत्र की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. आमाशय (Stomach) के जठर म्यूकोसा (Gastric mucosa) में पाई जाने वाली पैरीटाल या ऑक्सिंटिक कोशिकाएँ (Parietal cells) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल ($HCl$) और 'कैसल का आंतरिक कारक' (Castle's intrinsic factor) का स्रावण करती हैं, जो विटामिन $B_{12}$ के अवशोषण के लिए अनिवार्य है। 2. मानव हृदय की विद्युत गतिविधि के दौरान, निलय सिस्टोल (Ventricular systole) की शुरुआत में 'एट्रियोवेंट्रिकुलर नोड' (AV Node) से उत्पन्न होने वाला आवेग 'हिज के बंडल' (Bundle of His) और 'पुर्किंजे तंतुओं' (Purkinje fibres) के माध्यम से पूरे निलय की पेशियों में तेजी से फैलता है, जिससे दोनों निलय एक साथ संकुचित होते हैं। 3. श्वसन तंत्र के नियमन में, फुफ्फुसीय उच्छवास (Pulmonary ventilation) के दौरान जब फेफड़ों की दीवारें अत्यधिक खिंच जाती हैं, तो 'हेरिंग-ब्रूअर प्रतिवर्त' (Hering-Breuer reflex) के तहत वेगस तंत्रिका (Vagus nerve) के माध्यम से श्वसन केंद्र को प्रेरणाएँ भेजी जाती हैं, जो प्रेरणा (Inspiration) को रोककर उच्छवास को प्रेरित करती हैं। 4. स्वायत्त तंत्रिका तंत्र (Autonomic Nervous System) के अंतर्गत, परानुकंपी (Parasympathetic) तंत्रिका तंत्र यकृत से ग्लूकोज के विमोचन को प्रेरित करता है, पुतली को फैलाता है (Mydriasis), और कंकाल पेशियों की रक्त वाहिकाओं को संकुचित करता है ताकि आपातकालीन स्थिति से निपटा जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? कृत्रिम उपग्रहों की गति और उनके ऊर्जा तथा कोणीय संवेग संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमण कर रहे उपग्रह की कुल यांत्रिक ऊर्जा ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण से बंधा हुआ है। 2. जब कोई उपग्रह अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के उपभू (Perigee - पृथ्वी के निकटतम बिंदु) से अपभू (Apogee - पृथ्वी के दूरस्थ बिंदु) की ओर गति करता है, तो उसकी गतिज ऊर्जा घटती है किंतु गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा और कुल यांत्रिक ऊर्जा दोनों बढ़ती हैं। 3. केंद्रीय बल (गुरुत्वाकर्षण बल) के अंतर्गत गति करने के कारण उपग्रह पर कार्यरत बल आघूर्ण (Torque) शून्य होता है, जिसके परिणामस्वरूप उपग्रह का कोणीय संवेग (Angular Momentum) अपने परिक्रमण पथ के प्रत्येक बिंदु पर संरक्षित रहता है। 4. यदि किसी उपग्रह की कक्षीय त्रिज्या को बढ़ाकर चार गुना कर दिया जाए, तो केप्लर के तृतीय नियम के अनुसार उसका परिक्रमण काल आठ गुना हो जाएगा। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.