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General Science
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मानव शरीर में रक्त परिसंचरण तंत्र और रक्त कणिकाओं की क्रियाशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लाल रुधिर कणिकाओं (RBCs) की आयु लगभग 120 दिन होती है, और इनके विघटन के पश्चात हीमोग्लोबिन का हीम (Heme) भाग मुख्य रूप से बिलीरुबिन और बिलीवार्डिन पित्त वर्णकों में परिवर्तित होकर यकृत द्वारा उत्सर्जित किया जाता है।
- 2. 'एरिथ्रोपोएटिन' (Erythropoietin) नामक ग्लाइकोपोटिन हॉर्मोन का मुख्य रूप से स्राव वृक्कों (Kidneys) की अंतरालीय कोशिकाओं द्वारा होता है, जो अस्थिमज्जा में एरिथ्रोपोइएसिस (लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण) को प्रेरित करता है।
- 3. रक्त प्लेटलेट्स (थ्रॉम्बोसाइट्स), जिनका निर्माण अस्थिमज्जा की मेगाकैरीओसाइट्स कोशिकाओं के विखंडन से होता है, रक्त स्कंदन के दौरान 'सेरोटोनिन' और अन्य वासोकांस्ट्रिक्टर पदार्थों का स्राव करती हैं जो रुधिर वाहिकाओं को संकुचित कर रक्तस्राव को रोकते हैं।
- 4. हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन-बाइंडिंग क्षमता 'बोहर प्रभाव' (Bohr effect) से प्रभावित होती है, जिसके अनुसार उच्च pH (क्षारीय माध्यम) और उच्च कार्बन डाइऑक्साइड सांद्रता वाले ऊतकों में हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति आत्मीयता बढ़ जाती है, जिससे ऑक्सीजन का विमोचन आसानी से होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 3 सही हैं। लाल रुधिर कणिकाओं की औसत आयु 120 दिन होती है और इनका प्लीहा (Spleen) में विघटन होता है, जहाँ हीम का विखंडन बिलीरुबिन और बिलीवार्डिन में होता है। वृक्कों द्वारा स्रावित एरिथ्रोपोएटिन हॉर्मोन अस्थिमज्जा में RBC के उत्पादन को नियंत्रित करता है। प्लेटलेट्स मेगाकैरीओसाइट्स से बनती हैं और वासोकांस्ट्रिक्टर का स्राव करती हैं। कथन 4 असत्य है क्योंकि 'बोहर प्रभाव' के अनुसार, कम pH और उच्च $CO_2$ सांद्रता (जो सक्रिय ऊतकों में होती है) हीमोग्लोबिन की ऑक्सीजन के प्रति आत्मीयता को कम करती है, जिससे ऊतकों में ऑक्सीजन का विमोचन आसान हो जाता है। मानव रक्त और परिसंचरण तंत्र के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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दृष्टि दोष मायोपिया को ठीक करने के लिए कौन सा लेंस उपयोग होता है?
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प्रकाशिकी (Optics) के सिद्धांतों, लेंसों और दर्पणों के व्यवहार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जब कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में प्रवेश करती है और आपतन कोण का मान क्रांतिक कोण (Critical angle) से अधिक हो जाता है, तो किरण का पूर्ण आंतरिक परावर्तन (Total internal reflection) होता है, जिसके लिए प्रकाश का सघन माध्यम से जाना और अपवर्तनांक का नियम अनिवार्य है।
2. एक उत्तल लेंस (Convex lens) को जब ऐसे द्रव में डुबोया जाता है जिसका अपवर्तनांक लेंस के पदार्थ के अपवर्तनांक से अधिक होता है, तो लेंस की फोकस दूरी ऋणात्मक हो जाती है और वह अभिसारी (Converging) लेंस की तरह व्यवहार करने के बजाय अपसारी (Diverging) लेंस की भाँति कार्य करने लगता है।
3. गोलीय दर्पणों के लिए, यदि दर्पण की फोकस दूरी $f$ है और वस्तु की दूरी $u$ तथा प्रतिबिंब की दूरी $v$ है, तो रैखिक आवर्धन ($m$) का मान सदैव $-v/u$ होता है, जो यह दर्शाता है कि वास्तविक प्रतिबिंबों के लिए आवर्धन ऋणात्मक और आभासी प्रतिबिंबों के लिए धनात्मक होता है।
4. खगोलीय दूरदर्शी (Astronomical telescope) की आवर्तन क्षमता को बढ़ाने के लिए अभिदृश्य लेंस (Objective lens) का द्वारक (Aperture) और फोकस दूरी दोनों बहुत कम होने चाहिए, जिससे दूर स्थित तारों से आने वाला प्रकाश अधिक केंद्रित हो सके।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रकाश संश्लेषण?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि किसी सूक्ष्म कण (जैसे इलेक्ट्रॉन) की स्थिति और उसके संवेग का एक ही समय में पूर्ण रूप से यथार्थ निर्धारण करना असंभव है, और इनकी अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक नियतांक के आधे के बराबर या उससे अधिक होता है।
2. पाऊि का अपवर्जन नियम (Pauli Exclusion Principle) के अनुसार, किसी परमाणु में किन्हीं दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं ($n, l, m, s$) के मान सर्वसम (समान) नहीं हो सकते हैं, जिसका अर्थ है कि एक कक्षक में अधिकतम दो इलेक्ट्रॉन ही आ सकते हैं और उनके चक्रण (Spin) विपरीत दिशा में होने चाहिए।
3. 'हंड का बहुलकता नियम' (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह बताता है कि समकक्षीय कक्षकों (Degenerate Orbitals) में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक प्रारंभ नहीं होता, जब तक कि प्रत्येक कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समचक्रण के साथ न भर जाए।
4. मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा और कक्षक के आकार को निर्धारित करती है, जबकि द्विमांशाजी या दिगंशी क्वांटम संख्या ($l$) कक्षक की त्रि-विमीय ज्यामिति या आकृति को निरूपित करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी चालक तार की लंबाई को खींचकर दोगुना कर दिया जाए, तो उसका प्रतिरोध प्रारंभिक प्रतिरोध का चार गुना हो जाता है, बशर्ते उसका आयतन और तापमान अपरिवर्तित रहें।
2. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone bridge) का उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को अत्यंत उच्च यथार्थता के साथ मापने के लिए किया जाता है, और जब सेतु संतुलित अवस्था में होता है, तो गैल्वेनोमीटर से कोई धारा प्रवाहित नहीं होती है।
3. जब समान क्षमता के कई सेलों को समानांतर क्रम (Parallel combination) में जोड़ा जाता है, तो कुल धारा का मान एकल सेल की तुलना में बहुत अधिक प्राप्त होता है, जो तब सबसे लाभदायक होता है जब बाह्य प्रतिरोध आंतरिक प्रतिरोध की तुलना में बहुत अधिक हो।
4. किसी विद्युत परिपथ में शक्ति क्षय (Power dissipation) केवल धारा के वर्ग ($I^2$) और प्रतिरोध ($R$) के गुणनफल पर निर्भर करता है, और यह परिपथ में जुड़े प्रतिरोधकों के श्रेणी या समानांतर विन्यास से स्वतंत्र होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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