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मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मानव हृदय में दाएं अलिंद और दाएं निलय के बीच 'त्रिवलनी कपाट' (Tricuspid valve) उपस्थित होता है, जो अशुद्ध रक्त को केवल अलिंद से निलय की ओर प्रवाहित होने देता है और इसके विपरीत प्रवाह को रोकता है।
- 2. फेफड़ों में गैसीय विनिमय (O₂ और CO₂) की प्रक्रिया मुख्य रूप से 'कूपिकाओं' (Alveoli) की पतली उपकला और रक्त केशिकाओं की झिल्ली के बीच सरल विसरण (Simple diffusion) के माध्यम से होती है, जो आंशिक दाब प्रवणता पर निर्भर करती है।
- 3. रुधिर में कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन मुख्य रूप से प्लाज्मा में घुलित अवस्था (लगभग 70%) में होता है, जबकि ऑक्सीजन का अधिकांश भाग (लगभग 97%) हीमोग्लोबिन के साथ 'ऑक्सीहीमोग्लोबिन' के रूप में वाहक बनता है।
- 4. फुफ्फुस धमनी (Pulmonary artery) एक ऐसी अपवादस्वरूप धमनी है जो शरीर के विभिन्न अंगों से डीऑक्सीजनेटेड (अशुद्ध) रक्त को हृदय से फेफड़ों तक ले जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मानव शरीर के परिसंचरण और श्वसन तंत्र में विभिन्न कपाट, गैसीय विनिमय और रुधिर परिवहन की प्रक्रियाएं अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। कथन 1 सत्य है क्योंकि दाएं अलिंद और दाएं निलय के बीच ट्राइकसपिड (त्रिवलनी) कपाट होता है जो रक्त के पश्चप्रवाह को रोकता है। कथन 2 सत्य है क्योंकि कूपिकाओं में गैसों का विनिमय आंशिक दाब (Partial pressure) के अंतर के कारण सरल विसरण से होता है। कथन 3 असत्य है क्योंकि कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन मुख्य रूप से प्लाज्मा में बाइकार्बोनेट आयनों ($HCO_3^-$) के रूप में (लगभग 70%) होता है, न कि केवल घुलित अवस्था में (घुलित अवस्था में केवल 7% होता है)। कथन 4 सत्य है क्योंकि फुफ्फुस धमनी एकमात्र ऐसी धमनी है जो अशुद्ध रक्त वहन करती है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं में विभिन्न कोशिकांगों और कोशिका विभाजन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूत्रकणिका (Mitochondria) और हरित लवक (Chloroplast) दोनों ही अर्ध-स्वायत्त कोशिकांग हैं जिनमें स्वयं का द्विमार्गी वृत्ताकार डीएनए और 70S प्रकार के राइबोसोम पाए जाते हैं, लेकिन इनमें प्रोटीन संश्लेषण की क्षमता पूर्णतः अनुपस्थित होती है।
2. गॉल्जी उपकरण का 'cis' (निर्माण) चेहरा अंतर्द्रव्यी जालिका की तरफ और 'trans' (परिपक्व) चेहरा प्लाज्मा झिल्ली की तरफ स्थित होता है, जो ग्लाइकोसिलेशन और ग्लाइकोलिपिड के संश्लेषण का प्रमुख स्थल है।
3. सूत्री विभाजन (Mitosis) की पश्चावस्था (Anaphase) के दौरान गुणसूत्रों के सेंट्रोमियर विभाजित होते हैं और姊妹 क्रोमैटिड्स (Sister chromatids) अलग होकर विपरीत ध्रुवों की ओर गति करते हैं।
4. अर्धसूत्री विभाजन-I (Meiosis-I) की पैकीटीन (Pachytene) अवस्था में समजात गुणसूत्रों के बीच आनुवंशिक पदार्थों का विनिमय होता है, जिसे 'क्रॉसिंग ओवर' कहा जाता है और यह प्रक्रिया 'रिकॉम्बिनेज' एंजाइम द्वारा उत्प्रेरित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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आवर्त सारणी के तत्वों के आवर्ती गुणों और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु त्रिज्या घटती है और प्रभावी नाभिकीय आवेश ($Z_{eff}$) में वृद्धि होती है, जिसके कारण प्रथम आयनन एन्थैल्पी का मान सामान्यतः बढ़ता है, हालांकि नाइट्रोजन ($N$) की प्रथम आयनन एन्थैल्पी अपने ठीक बाद आने वाले ऑक्सीजन ($O$) तत्व से अधिक होती है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के अर्ध-पूरित (Half-filled) $2p$ कक्षकों का अतिरिक्त स्थायित्व है।
2. 'इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी' (Electron Gain Enthalpy) का मान हमेशा ऋणात्मक होता है, और किसी भी उदासीन गैसीय परमाणु द्वारा एक अतिरिक्त इलेक्ट्रॉन ग्रहण करने पर हमेशा ऊर्जा का उत्सर्जन ही होता है, चाहे परमाणु का आकार या इलेक्ट्रॉनिक विन्यास कुछ भी हो।
3. हैлोजेन समूह में फ्लोरीन ($F$) की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी का ऋणात्मक मान अपने ही समूह के अगले तत्व क्लोरीन ($Cl$) की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार बहुत छोटा होता है, जिसके कारण अंतःइलेक्ट्रॉनी प्रतिकर्षक (Interelectronic repulsion) बल का मान बढ़ जाता है।
4. लैंथानाइड संकुचन (Lanthanoid contraction) के कारण $5d$ श्रेणी के संक्रमण तत्वों (जैसे Hafnium, $Hf$) की परमाणु और आयनिक त्रिज्याएँ अपने ठीक ऊपर स्थित $4d$ श्रेणी के तत्वों (जैसे Zirconium, $Zr$) के लगभग बराबर हो जाती हैं।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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पदार्थ के सामान्य गुण—पृष्ठ तनाव, श्यानता और आर्किमिडीज के सिद्धांत के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी द्रव का पृष्ठ तनाव (Surface Tension) अणुओं के बीच लगने वाले ससंजक बलों (Cohesive forces) के कारण होता है, जिसके परिणामस्वरूप द्रव का मुक्त पृष्ठ कम से कम क्षेत्रफल प्राप्त करने का प्रयास करता है, और ताप में वृद्धि होने पर पृष्ठ तनाव का मान सामान्यतः घट जाता है।
2. श्यानता (Viscosity) द्रवों का वह गुण है जिसके द्वारा वे अपनी परतों के बीच होने वाली相対 (सापेक्षिक) गति का विरोध करते हैं, और गैसों की श्यानता तापमान में वृद्धि होने पर घट जाती है जबकि द्रवों की श्यानता तापमान बढ़ने पर बढ़ जाती है।
3. आर्किमिडीज के सिद्धांत के अनुसार, जब कोई वस्तु किसी तरल में आंशिक या पूर्ण रूप से डुबोई जाती है, तो वह अपने द्वारा हटाए गए तरल के भार के बराबर एक ऊर्ध्वगामी उत्प्लावन बल (Buoyant force) का अनुभव करती है, जिसका केंद्र हटाए गए तरल के आयतन के गुरुत्व केंद्र पर कार्य करता है जिसे 'उत्प्लावन केंद्र' (Center of Buoyancy) कहते हैं।
4. यदि कोई ठोस वस्तु किसी द्रव में तैर रही है, तो वस्तु पर लगने वाला कुल गुरुत्वाकर्षण बल वस्तु पर लगने वाले उत्प्लावन बल से अधिक होता है, जिसके बारे में विस्तृत जानकारी विकिपीडिया संदर्भ में दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह बताता है कि किसी कण की स्थिति और उसके संवेग (या वेग) का एक साथ सटीक निर्धारण करना असंभव है, और इन दोनों अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक स्थिरांक ($h$) के आधे या उसके आधे से अधिक ($h/4\pi$) के बराबर होता है।
2. आउफबाऊ नियम (Aufbau Principle) के अनुसार, परमाणु में कक्षकों को भरने का क्रम उनकी ऊर्जा के बढ़ते क्रम में होता है, जिसका निर्धारण $(n + l)$ नियम द्वारा किया जाता है, जहाँ समान $(n + l)$ मान होने पर उच्च मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) वाले कक्षक को पहले भरा जाता है।
3. पाउली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion Principle) यह स्पष्ट करता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सर्वसम (समान) नहीं हो सकता है, और एक कक्षक में विपरीत चक्रण (Spins) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
4. हुंड का अधिकतम बहुलकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि किसी उपकोश (Subshell) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक नहीं होता जब तक कि प्रत्येक उपलब्ध कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ प्रवेश न कर ले।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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प्रकाश गमन?
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