त्वरित लिंक्स
General Science
1 views
विद्युत परिपथों और उससे संबंधित नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. किसी चालक का विशिष्ट प्रतिरोध (Resistivity) या प्रतिरोधकता उसके पदार्थ की प्रकृति और तापमान पर निर्भर करती है, किंतु चालक की लंबाई और अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल पर निर्भर नहीं करती है।
- 2. किर्चॉफ का संधि नियम (Current Law - KCL) इस बात का प्रतिनिधित्व करता है कि एक बंद लूप में कुल ऊर्जा संरक्षित रहती है, जबकि लूप नियम (Voltage Law - KVL) आवेश संरक्षण के सिद्धांत पर आधारित है।
- 3. व्हीटस्टोन सेतु (Wheatstone Bridge) एक ऐसा उपकरण है जिसका उपयोग अज्ञात प्रतिरोध को मापने के लिए किया जाता है, और यह संतुलन की अवस्था में '$P/Q = R/S$' के सिद्धांत पर कार्य करता है।
- 4. घरेलू विद्युत परिपथों में सभी उपकरणों को समानांतर क्रम (Parallel Combination) में जोड़ा जाता है ताकि प्रत्येक उपकरण को समान विभवांतर मिल सके और एक उपकरण के खराब होने पर अन्य उपकरणों के कार्य पर कोई प्रभाव न पड़े।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि विशिष्ट प्रतिरोध या प्रतिरोधकता ($
ho $) केवल पदार्थ की प्रकृति और उसके तापमान पर निर्भर करती है, चालक की ज्यामिति (लंबाई या क्षेत्रफल) पर नहीं। कथन 2 गलत है क्योंकि किर्चॉफ का प्रथम नियम (संधि नियम/KCL) **आवेश संरक्षण** (Conservation of Charge) पर आधारित है, जबकि द्वितीय नियम (लूप नियम/KVL) **ऊर्जा संरक्षण** (Conservation of Energy) के नियम पर आधारित है। कथन 3 सही है, व्हीटस्टोन सेतु अज्ञात प्रतिरोध को मापने की एक अत्यंत संवेदनशील और सटीक विधि है। कथन 4 सही है, घरेलू वायरिंग में समानांतर संयोजन का उपयोग किया जाता है जिससे सभी उपकरणों को समान विभव प्राप्त होता है। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
→
मानव शरीर में वृहद पोषक तत्वों और उनके जैव-रासायनिक उपापचय (Metabolism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) वह प्रक्रिया है जिसमें यकृत और कंकाल पेशियों में संचित ग्लाइकोजन का ग्लूकोज-1-फास्फेट में अपघटन होता है, जिसे 'ग्लाइकोजन फास्फोराइलेज' एंजाइम उत्प्रेरित करता है।
2. ग्लूकोनियोजेनेसिस (Gluconeogenesis) के दौरान, गैर-कार्बोहाइड्रेट स्रोतों जैसे कि लैक्टेट, ग्लिसरोल और ग्लूकोजेनिक अमीनो अम्ल से ग्लूकोज का संश्लेषण होता है, जो मुख्य रूप से अग्न्याशय की बीटा कोशिकाओं में संपन्न होता है।
3. वसा अम्लों के बीटा-ऑक्सीडेशन (Beta-oxidation) की प्रक्रिया माइटोकॉन्ड्रिया के मैट्रिक्स में होती है, जिससे एसिटाइल-CoA के अणु बनते हैं जो सीधे क्रेब्स चक्र में प्रवेश करके एटीपी का उत्पादन करते हैं।
4. प्रोटीन कुपोषण के कारण होने वाले गंभीर विकार 'क्वाशियोकोर' (Kwashiorkor) में केवल कैलोरी की भारी कमी होती है, जबकि 'मॅरास्मस' (Marasmus) प्रोटीन और कुल कैलोरी दोनों की भीषण कमी के कारण उत्पन्न होता है और इसमें एडिमा (Edema) प्रमुख लक्षण के रूप में देखा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
विलयन और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वाष्प दाब का आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) एक अणुसंख्यक गुणधर्म है, जो विलायक में घुले हुए अवाष्पशील विलेय के मोल प्रभाज के पूर्णतः बराबर होता है तथा यह विलेय की रासायनिक प्रकृति पर निर्भर नहीं करता है।
2. समांग उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारक दोनों एक ही भौतिक अवस्था (जैसे सभी गैस या सभी द्रव) में होते हैं, और इस प्रक्रिया की क्रियाविधि को 'मध्यवर्ती यौगिक निर्माण सिद्धांत' (Intermediate compound formation theory) द्वारा समझाया जाता है।
3. जिग्लर-नट्टा उत्प्रेरक ($TiCl_4 + Al(C_2H_5)_3$) एक विषमांग उत्प्रेरक का उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसका उपयोग उच्च घनत्व वाले पॉलीइथिलीन (HDPE) के औद्योगिक उत्पादन में किया जाता है।
4. एंजाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अपनी अत्यधिक विशिष्ट प्रकृति के लिए जाने जाते हैं, और 'ताला-कुंजी' (Lock and Key) मॉडल के अनुसार एंजाइम रासायनिक अभिक्रिया के साम्यावस्था स्थिरांक ($K_{eq}$) को परिवर्तित कर पश्च अभिक्रिया की दर को अत्यधिक तीव्र कर देते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव शरीर के तंत्रों की कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आमाशय (Stomach) की भित्ति में पाई जाने वाली पेप्टिक या मुख्य कोशिकाएँ (Chief cells) निष्क्रिय प्रोएंजाइम 'पेप्सिनोजेन' का स्रावण करती हैं, जो हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) के संपर्क में आने पर सक्रिय पेप्सिन में परिवर्तित हो जाता है।
2. मनुष्य के श्वसन तंत्र में, गैसीय विनिमय मुख्य रूप से कूपिकाओं (Alveoli) में होता है, जिसकी भित्ति अत्यंत पतली होती है और इस पर विसरण (Diffusion) की प्रक्रिया मुख्य रूप से आंशिक दाब प्रवणता (Partial Pressure Gradient) द्वारा संचालित होती है।
3. परिसंचरण तंत्र के अंतर्गत, दाएं निलये (Right Ventricle) से निकलने वाला अशुद्ध रक्त फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Artery) के माध्यम से फेफड़ों में जाता है, और यह एकमात्र ऐसी धमनी है जिसमें ऑक्सीजन-समृद्ध (शुद्ध) रक्त प्रवाहित होता है।
4. केंद्रीय तंत्रिका तंत्र में, मस्तिष्कावरण (Meninges) की सबसे बाहरी परत को 'ड्यूरा मेटर' (Dura mater) कहा जाता है, जो मस्तिष्क को यांत्रिक आघातों से सुरक्षा प्रदान करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
एक अवतल लेंस द्वारा बना प्रतिबिंब हमेशा कैसा होता है?
→
विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्मों और उत्प्रेरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर उसके वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative Lowering of Vapour Pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम का सीधा परिणाम है।
2. वेंट-हॉफ कारक ($i$) का मान उन विलेय पदार्थों के लिए एक से अधिक होता है जो जलीय विलयन में पूर्ण रूप से संघनित (Association) हो जाते हैं, क्योंकि अणुओं के जुड़ने से कणों की कुल संख्या बढ़ जाती है।
3. उत्प्रेरक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) को परिवर्तित करके अभिक्रिया के वेग को प्रभावित करते हैं, किंतु वे अग्र और पश्च अभिक्रियाओं के वेग को समान रूप से प्रभावित करते हैं जिससे साम्य स्थिरांक (Equilibrium Constant) का मान अपरिवर्तित रहता है।
4. जिओलाइट्स (Zeolites) त्रि-विमीय सिलिकेट नेटवर्क संरचना वाले सूक्ष्मछिद्रित उत्प्रेरक हैं जो 'आकार-वरण उत्प्रेरण' (Shape-selective Catalysis) प्रदर्शित करते हैं, क्योंकि इनकी उत्प्रेरकीय सक्रियता अभिकारकों और उत्पादों के अणुओं के आकार तथा छिद्रों के आकार पर निर्भर करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.