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General Science
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में विद्युत के कुचालक होते हैं क्योंकि उनके आयन स्थिरवैद्युत आकर्षण बलों द्वारा क्रिस्टल जालक में दृढ़ता से बंधे होते हैं, किंतु गलित अवस्था या जलीय विलयन में वे विद्युत का चालन करते हैं क्योंकि आयन गति के लिए स्वतंत्र हो जाते हैं।
- 2. लुईस अम्ल वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकती हैं (अर्थात इलेक्ट्रॉन-न्यून), जबकि लुईस क्षार वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म प्रदान कर सकती हैं, जैसे कि अमोनिया ($NH_3$)।
- 3. जब किसी दुर्बल अम्ल ($CH_3COOH$) का उदासीनीकरण प्रबल क्षार ($NaOH$) के साथ किया जाता है, तो प्राप्त लवण का जलीय विलयन जलीय जल-अपघटन के कारण अम्लीय प्रकृति का होता है।
- 4. बफर विलयन वे विलयन होते हैं जो बाहरी मात्रा में प्रबल अम्ल या प्रबल क्षार मिलाने पर भी अपने pH मान में परिवर्तन का प्रभावी विरोध करते हैं, और अम्लीय बफर का एक उत्कृष्ट उदाहरण एसिटिक अम्ल एवं सोडियम एसिटेट का मिश्रण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि आयनिक यौगिक ठोस अवस्था में मजबूत इलेक्ट्रोस्टैटिक बलों के कारण अपने आयनों को स्वतंत्र रूप से गति नहीं करने देते, जिससे वे विद्युत के कुचालक होते हैं, लेकिन पिघली हुई अवस्था या पानी में घुलने पर वे आयनों में टूटकर विद्युत का चालन करते हैं। कथन 2 सही है क्योंकि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार लुईस सिद्धांत के तहत इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने वाले को लुईस अम्ल और प्रदान करने वाले को लुईस क्षार कहा जाता है। कथन 3 गलत है; दुर्बल अम्ल और प्रबल क्षार के लवण का जलीय विलयन जल-अपघटन के कारण क्षारीय प्रकृति का होता है, न कि अम्लीय, क्योंकि इसमें ऋणायन का जल-अपघटन होता है जिससे $OH^-$ आयन मुक्त होते हैं। कथन 4 सही है क्योंकि एक दुर्बल अम्ल और उसके प्रबल क्षार के लवण का मिश्रण एक अम्लीय बफर विलयन के रूप में कार्य करता है जो pH परिवर्तन का विरोध करता है। अतः सही विकल्प (a) है।
Related Questions
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भौतिक राशियों और उनके विमाओं (Dimensions) तथा मापन प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गुप्त ऊष्मा' (Latent Heat) और 'गुरुत्वीय विभव' (Gravitational Potential) दोनों की विमीय सूत्र ($[L^2 T^{-2}]$) समान होती है, क्योंकि दोनों ही ऊर्जा या कार्य को प्रति इकाई राशि (द्रव्यमान) के रूप में व्यक्त करते हैं।
2. 'पारसेक' (Parsec) और 'प्रकाश वर्ष' (Light-year) दोनों खगोलीय दूरियों को मापने की बड़ी इकाइयाँ हैं, जिनमें से पारसेक दूरी का सबसे बड़ा व्यावहारिक मात्रक है और यह लगभग $3.26$ प्रकाश वर्ष के बराबर होता है।
3. 'प्लांक नियतांक' (Planck's Constant) और 'कोणीय संवेग' (Angular Momentum) की विमाएं भिन्न होती हैं, क्योंकि प्लांक नियतांक ऊर्जा और आवृत्ति का अनुपात है जबकि कोणीय संवेग रैखिक संवेग और त्रिज्या का गुणनफल है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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सुकेन्द्रिक (Eukaryotic) कोशिकाओं के विभिन्न कोशिकांगों और उनके विशिष्ट कार्यों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूत्रकणिका (Mitochondria) के आंतरिक झिल्ली के वलय 'क्रिस्टी' (Cristae) कहलाते हैं, जिन पर ऑक्सीडेटिव फॉस्फोरिलीकरण के लिए एटीपी सिंथेस एंजाइम (F0-F1 कण) स्थित होते हैं, तथा माइटोकॉन्ड्रियल मैट्रिक्स में क्रेब्स चक्र के एंजाइम पाए जाते हैं।
2. खुरदरी अंतःप्रद्रव्यी जालिका (Rough Endoplasmic Reticulum) की सतह पर राइबोसोम जुड़े होते हैं, और यह मुख्य रूप से लिपिड संश्लेषण और स्टेरॉयड हॉर्मोन के उपापचय के लिए प्रमुख स्थल के रूप में कार्य करती है।
3. गॉल्जीकाय (Golgi apparatus) में 'सिटर्नी' (Cisternae) के उत्तल (Convex) या 'स्रावी' (Trans) चेहरे से प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का संशोधन होकर पुटिकाएँ निकलती हैं, जबकि इसका अवतल (Concave) या 'निर्माकारी' (Cis) चेहरा अंतःप्रद्रव्यी जालिका से जुड़ा होता है।
4. लाइसोसोम (Lysosomes) एक झिल्लीबद्ध पुटीय संरचना है जिसमें हाइड्रोलाइटिक एंजाइम (जैसे लाइपेस, प्रोटीएज और कार्बोहाइड्रेटेज) प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो अम्लीय pH (लगभग 4-5) पर सबसे अधिक सक्रिय होते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) और हार्मोनल नियमन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइपोथैलेमस से स्रावित होने वाले 'रिलीजिंग हार्मोन' (Releasing hormones) अग्र पीयूष ग्रंथि (Adenohypophysis) के हॉर्मोनों के स्राव को नियंत्रित करते हैं, जबकि पश्च पीयूष ग्रंथि (Neurohypophysis) का अपना कोई पाचक या अंतःस्रावी संश्लेषण नहीं होता, बल्कि यह हाइपोथैलेमस द्वारा निर्मित ऑक्सीटोसिन और वैसोप्रेसिन (ADH) का केवल भंडारण और विमोचन करती है।
2. अधिवृक्क ग्रंथि (Adrenal Gland) का वल्कुट (Cortex) भाग भ्रूण के एक्टोडर्म से उत्पन्न होता है और यह 'कैटकोलामाइन्स' (एपिलीनफ्राइन और नॉरएपिनीफ्राइन) का स्राव करता है, जो आपातकालीन परिस्थितियों में 'लड़ो या उड़ो' (Fight or Flight) प्रतिक्रिया को प्रेरित करते हैं।
3. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित थायरोक्सिन ($T_4$) और ट्राईआयोडोथायरोनिन ($T_3$) हॉर्मोन शरीर की आधारीय चयापचय दर (BMR), लाल रक्त कोशिकाओं के निर्माण और कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन तथा वसा के चयापचय को नियंत्रित करते हैं, तथा इनके संश्लेषण के लिए आयोडीन अनिवार्य होता है।
4. अग्न्याशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में स्थित अल्फा कोशिकाएं 'इंसुलिन' का और बीटा कोशिकाएं 'ग्लूकागन' का स्राव करती हैं, जो रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को विपरीत दिशा में संतुलित रखते हुए होमियोस्टैसिस बनाए रखते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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ऊष्मागतिकी के प्रथम और द्वितीय नियमों तथा तापमापी प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऊष्मागतिकी का शून्यवाँ नियम (Zeroth Law of Thermodynamics) तापमान की अवधारणा को परिभाषित करता है और यह स्थापित करता है कि यदि दो निकाय किसी तीसरे निकाय के साथ अलग-अलग तापीय साम्य में हैं, तो वे आपस में भी तापीय साम्य में होंगे।
2. स्थिर आयतन गैस तापमापी (Constant-volume gas thermometer) गैस के दाब और तापमान के रैखिक संबंध पर कार्य करती है, और इसमें प्रयुक्त गैस (जैसे ही हाइड्रोजन या हीلیم) आदर्श गैस व्यवहार के अत्यधिक निकट होती है।
3. ऊष्मागतिकी के प्रथम नियम के अनुसार, किसी निकाय को दी जाने वाली ऊष्मा का पूर्ण उपयोग उसकी आंतरिक ऊर्जा में वृद्धि करने में होता है, और यह नियम ऊर्जा संरक्षण के साथ-साथ ऊष्मा के प्रवाह की दिशा को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित करता है।
4. रुद्धोष्म प्रक्रम (Adiabatic process) के दौरान निकाय और परिवेश के बीच ऊष्मा का कोई आदान-प्रदान नहीं होता ($dQ = 0$), और ऐसे प्रक्रम में गैस का प्रसार होने पर उसकी आंतरिक ऊर्जा कम हो जाती है जिससे तापमान में गिरावट आती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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रासायनिक बंधन, अम्ल-क्षार अवधारणाओं और लवणों के जल-अपघटन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis Acid) वे रासायनिक स्पीशीज हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार (Lewis Base) इलेक्ट्रॉन युग्मदाता होते हैं, और इनके बीच बनने वाला उपसहसंयोजक बंध (Coordinate Covalent Bond) लुईस अम्ल-क्षार प्रणालियों की विशेषता है।
2. जब एक दुर्बल अम्ल और एक प्रबल क्षार से बने लवण (जैसे सोडियम एसीटेट) का जल-अपघटन (Hydrolysis) किया जाता है, तो परिणामी जलीय विलयन की प्रकृति क्षारीय होती है, क्योंकि इस प्रक्रिया में हाइड्रॉक्साइड आयनों ($OH^-$) की सांद्रता हाइड्रोजन आयनों से अधिक हो जाती है।
3. ब्रॉन्स्टेड-लोरी (Bronsted-Lowry) अवधारणा के अनुसार, किसी अम्ल का संयुग्म क्षार (Conjugate Base) उस अम्ल में से एक प्रोटॉन ($H^+$) आयन जोड़ने के पश्चात प्राप्त स्पीशीज होती है, और एक प्रबल अम्ल का संयुग्म क्षार भी उतना ही प्रबल होता है।
4. जल का आयनिक गुणनफल ($K_w$) तापमान पर निर्भर करता है, और तापमान में वृद्धि होने पर शुद्ध जल में $H^+$ और $OH^-$ आयनों की सांद्रता बढ़ने के कारण $K_w$ का मान बढ़ जाता है, किंतु जल का विलयन उदासीन ही बना रहता है क्योंकि दोनों आयनों की सांद्रता समान होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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