त्वरित लिंक्स
General Science
1 views
रासायनिक बंधन और अम्ल-क्षार अवधारणाओं (Acid-Base Theories) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. फजान के नियम (Fajans' rules) के अनुसार, किसी आयनिक यौगिक में सहसंयोजक लक्षण (Covalent character) तब बढ़ जाते हैं जब धनायन का आकार छोटा, उस पर आवेश उच्च होता है तथा ऋणायन का आकार बड़ा होता है।
- 2. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी संकल्पना (Bronsted-Lowry concept) के अनुसार, अम्ल वे स्पीशीज हैं जो प्रोटॉनों (H⁺) का त्याग करते हैं, और इसके संयुग्म अम्ल-क्षार युग्म (Conjugate acid-base pair) में एक प्रबल अम्ल का संयुग्म क्षार हमेशा एक दुर्बल क्षार होता है।
- 3. लुईस अम्ल-क्षार सिद्धांत के अंतर्गत, वे सभी धनायन और इलेक्ट्रॉन-न्यून यौगिक (जैसे $BF_3$) लुईस क्षार की भाँति व्यवहार करते हैं, जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की क्षमता रखते हैं।
- 4. जल-अपघटन (Hydrolysis) के दौरान, जब किसी प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार से बने लवण (जैसे $NH_4Cl$) को जल में घोला जाता है, तो उसका जलीय विलयन ऋणायन जल-अपघटन के कारण क्षारीय प्रकृति का हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है; फजान के नियम के अनुसार धनायन का छोटा आकार, उच्च आवेश और ऋणायन का बड़ा आकार यौगिक में ध्रुवणीयता (Polarization) बढ़ाकर सहसंयोजक लक्षण उत्पन्न करता है। कथन 2 सही है; ब्रॉन्स्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार प्रबल अम्ल का संयुग्म क्षार दुर्बल होता है और इसके विपरीत। कथन 3 गलत है क्योंकि $BF_3$ और धनायन इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं, इसलिए वे **लुईस अम्ल** (Lewis acids) होते हैं न कि लुईस क्षार। कथन 4 गलत है क्योंकि प्रबल अम्ल और दुर्बल क्षार के लवण का जलीय विलयन धनायन जल-अपघटन के कारण अम्लीय (pH < 7) होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
जीवाणुभोजी (Bacteriophages) के आनुवंशिक संगठन और हर्षे-चेस (Hershey-Chase) प्रयोग के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षे-चेस प्रयोग ने यह निर्णायक प्रमाण दिया कि आनुवंशिक पदार्थ डीएनए है, जिसके लिए उन्होंने रेडियोधर्मी समस्थानिकों सल्फर-35 ($^{35}S$) का उपयोग प्रोटीन कोट को चिह्नित करने के लिए और फॉस्फोरस-32 ($^{32}P$) का उपयोग डीएनए को चिह्नित करने के लिए किया था।
2. जब एक टी-समूह ($T_2$) जीवाणुभोजी किसी बैक्टीरिया को संक्रमित करता है, तो उसका संपूर्ण न्यूक्लियोप्रोटीन कैप्सिड (Protein coat) बैक्टीरिया की कोशिका भित्ति को भेदकर अंदर प्रवेश कर जाता है, जबकि डीएनए बाहर ही छूट जाता है।
3. अधिकांश जीवाणुभोजी में आनुवंशिक पदार्थ के रूप में द्वि-रज्जुक डीएनए (Double-stranded DNA) पाया जाता है, किंतु कुछ ऐसे भी भोजी होते हैं जिनमें एकल-रज्जुक डीएनए या आरएनए भी आनुवंशिक पदार्थ के रूप में उपस्थित हो सकता है।
4. जीवाणुभोजी द्वारा अनुवांशिक सूचनाओं के एक जीवाणु से दूसरे जीवाणु में स्थानांतरण की प्रक्रिया को पारक्रमण (Transduction) कहा जाता है, जिसकी खोज जेंडर और लेडरबर्ग द्वारा साल्मोनेला टाइफिमुरियम में की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मानव रोगों और उनके संचरण तंत्र (Transmission Mechanisms) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ट्राइकोफाइटन (Trichophyton) और माइक्रोज़्स्पोरम (Microsporum) जैसे कवक (Fungi) दाद (Ringworm) रोग के लिए उत्तरदायी हैं, जो मुख्य रूप से मिट्टी या संक्रमित व्यक्तियों के तौलिये, कपड़ों और कंघों के उपयोग से फैलते हैं।
2. फाइलेरियासिस (Elephantiasis) या श्लीपद रोग 'वुचेरेरिया बैनक्रॉफ्टी' (Wuchereria bancrofti) नामक गोलकृमि (Nematode) के कारण होता है, और इसका संचरण मादा क्यूलेक्स मच्छरों के काटने से होता है जो लसीका वाहिनियों (Lymphatic vessels) को प्रभावित करता है।
3. अमीबायसिस (Amoebiasis) या अमीबी अतिसार 'एंटअमीबा हिस्टोलिटिका' (Entamoeba histolytica) द्वारा होता है, जो एक जीवाणु जनित संक्रमण है और यह संदूषित जल तथा भोजन के माध्यम से फैलता है।
4. न्यूमोनिया 'स्ट्रैप्टोकॉकस न्यूमोनिया' और 'हीमोफिलस इन्फ्लुएंजा' द्वारा होता है, जिसमें संक्रमित व्यक्ति के खांसने या छींकने से निकलने वाली बूंदों (Droplets) के अंतःश्वसन से स्वस्थ व्यक्ति में यह रोग फैल सकता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
धातुओं, अधातुओं और उनके यौगिकों के निष्कर्षण तथा रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सल्फाइड अयस्कों का सांद्रण करने के लिए 'फेन प्लवन विधि' (Froth Floatation Process) का उपयोग किया जाता है, जिसमें चीड़ का तेल (Pine oil) और सोडियम एथिल जैंथेट का उपयोग संग्राहक (Collector) के रूप में किया जाता है, जबकि कार्बोनेट अयस्कों को ऑक्साइड में बदलने के लिए 'निस्थापन' (Calcination) प्रक्रिया अपनाई जाती है।
2. जब एल्युमिनियम के निष्कर्षण के लिए हॉल-हैरॉल्ट प्रक्रम में एल्युमिनियम ऑक्साइड ($Al_2O_3$) का विद्युत अपघटन किया जाता है, तो इसमें मिलाया जाने वाला 'क्रायोलाइट' ($Na_3AlF_6$) और फ्लूस्पर ($CaF_2$) मुख्य रूप से मिश्रण के गलनांक को कम करने और उसकी विद्युत चालकता को बढ़ाने का कार्य करते हैं।
3. 'डाईबोरेन' ($B_2H_6$) बोरॉन का एक प्रसिद्ध हाइड्राइड है जिसमें दो हाइड्रोजन परमाणु दो बोरॉन परमाणुओं के साथ सेतु (Bridge) का निर्माण करते हैं, और इसमें सभी छह हाइड्रोजन परमाणु एक ही तल में स्थित होते हैं।
4. जब सफेद फॉस्फोरस को सांद्र सोडियम हाइड्रोक्साइड (NaOH) विलयन के साथ अक्रिय वातावरण (जैसे $CO_2$) में गर्म किया जाता है, तो यह अत्यधिक विषैली और लहसुन जैसी गंध वाली फॉस्फीन गैस ($PH_3$) उत्पन्न करता है, जिसका विस्तृत विवरण विकिपीडिया संदर्भ में दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
आधुनिक आवर्त सारणी और तत्वों के आवर्ती गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी आवर्त में बाएं से दाएं जाने पर परमाणु क्रमांक में वृद्धि के साथ प्रभावी नाभिकीय आवेश (Effective Nuclear Charge) बढ़ता है, जिससे परमाणु त्रिज्या में निरंतर कमी आती है, किंतु समूह-18 के उत्कृष्ट गैसों की वांडरवाल्स त्रिज्या उनके ठीक पहले आने वाले हैलोजन तत्वों की सहसंयोजक त्रिज्या से काफी बड़ी होती है।
2. नाइट्रोजन की प्रथम आयनन एन्थैल्पी (First Ionization Enthalpy) का मान ऑक्सीजन की तुलना में अधिक होता है, जिसका मुख्य कारण नाइट्रोजन के 2p कक्षकों का अर्ध-पूर्ण (Half-filled) होना है जो अतिरिक्त स्थायित्व प्रदान करता है।
3. आवर्त सारणी में फ्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एन्थैल्पी (Electron Gain Enthalpy) का ऋणात्मक मान क्लोरीन की तुलना में अधिक होता है, क्योंकि फ्लोरीन का आकार अत्यंत छोटा होने के कारण आने वाले इलेक्ट्रॉन और पहले से उपस्थित 2p कक्षकीय इलेक्ट्रॉनों के बीच अंतःइलेक्ट्रॉनिक प्रतिकर्षण कम हो जाता है।
4. लैंथेनाइड संकुचन (Lanthanide Contraction) के कारण 4d और 5d संक्रमण श्रेणी के तत्वों (जैसे जिरकोनियम और हाफ़िज़ियम) की परमाणु त्रिज्याएँ लगभग समान हो जाती हैं, जिसका मुख्य कारण 4f कक्षकों का आवरण प्रभाव अत्यंत दुर्बल होना है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
नाभिकीय भौतिकी और रेडियोएक्टिवता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी रेडियोएक्टिव तत्व की अर्ध-आयु (Half-life) उस समयाराश के बराबर होती है जिसमें परमाणु नाभिकों की प्रारंभिक संख्या घटकर अपनी मूल संख्या की आधी रह जाती है, और यह अर्ध-आयु काल उस तत्व के रेडियोएक्टिव क्षय नियतांक (Decay Constant) के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
2. 'द्रव्यमान क्षति' (Mass Defect) किसी नाभिक के वास्तविक कुल द्रव्यमान और उसके व्यक्तिगत प्रोटॉनों व न्यूट्रॉनों के द्रव्यमानों के योग के बीच का अंतर है, और यही द्रव्यमान क्षति अल्बर्ट आइंस्टीन के संबंध $E=mc^2$ के अनुसार नाभिकीय बंधन ऊर्जा (Nuclear Binding Energy) में परिवर्तित होती है।
3. नाभिकीय विखंडन (Nuclear Fission) की प्रक्रिया में यूरेनियम-235 पर जब एक धीमा न्यूट्रॉन आघात करता है, तो यह अस्थिर यूरेनियम-236 बनाता है जो लगभग समान आकार के दो छोटे नाभिकों में टूट जाता है, तथा इस प्रक्रिया में प्रति विखंडन औसत रूप से 2 से 3 तीव्र न्यूट्रॉन उत्सर्जित होते हैं।
4. सूर्य और अन्य तारों में ऊर्जा का मुख्य स्रोत 'नाभिकीय संलयन' (Nuclear Fusion) है, जिसमें अत्यधिक उच्च तापमान और दाब पर चार हाइड्रोजन नाभिक मिलकर एक हीलियम नाभिक का निर्माण करते हैं, और इस संलयन प्रक्रिया के दौरान द्रव्यमान में होने वाली मामूली क्षति ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.