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General Science
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रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) की अवधारणाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लुईस अम्ल संकल्पना के अनुसार, वे सभी रासायनिक स्पीशीज लुईस अम्ल (Lewis acids) के रूप में कार्य करती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करने की प्रवृत्ति रखती हैं, जबकि लुईस क्षार वे होते हैं जो एकाकी इलेक्ट्रॉन युग्म (Lone pair of electrons) दान कर सकते हैं।
- 2. कठोर-मृदु अम्ल-क्षार (HSAB) सिद्धांत के अनुसार, 'कठोर अम्ल' सामान्यतः बड़े आकार, निम्न धनात्मक आवेश और उच्च ध्रुवणनीयता वाले धनायन होते हैं, जो मृदु क्षारों के साथ अत्यधिक स्थिर और मजबूत सहसंयोजक संकुल का निर्माण करते हैं।
- 3. ब्रॉन्स्टेड-लॉरी संकल्पना के अनुसार, एक प्रबल अम्ल का संयुग्म क्षार (Conjugate base) अत्यंत दुर्बल होता है, तथा जल का स्वतः आयनन स्थिरांक ($K_w$) तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ता है।
- 4. फजान के नियमों (Fajans' rules) के अनुसार, किसी आयनिक यौगिक में सहसंयोजक लक्षण (Covalent character) तब बढ़ जाते हैं जब धनायन का आकार छोटा हो, ऋणायन का आकार बड़ा हो और धनायन पर आवेश का घनत्व उच्च हो।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: लुईस अम्ल वे स्पीशीज (इलेक्ट्रॉन न्यून) हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण कर सकती हैं, और लुईस क्षार वे हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म दान कर सकते हैं। कथन 2 गलत है: HSAB सिद्धांत के अनुसार, कठोर अम्ल छोटे आकार, उच्च धनात्मक आवेश और कम ध्रुवणनीयता वाले धनायन होते हैं, जो कठोर क्षारों के साथ मजबूत आयनिक संकुल बनाते हैं, न कि मृदु क्षारों के साथ। कथन 3 सही है: ब्रॉन्स्टेड-लॉरी सिद्धांत के अनुसार प्रबल अम्ल का संयुग्म क्षार बहुत दुर्बल होता है, और तापमान बढ़ने पर $K_w$ बढ़ता है। कथन 4 सही है: फजान के नियमों के अनुसार छोटे धनायन, बड़े ऋणायन और उच्च आवेश वाले यौगिकों में सहसंयोजक लक्षण अधिक होते हैं। विकिपीडिया संदर्भ
Related Questions
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मानव अंतःस्रावी तंत्र में हॉर्मोन्स के नियंत्रण, उनकी रासायनिक प्रकृति और उससे संबंधित विकारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अग्नाशय (Pancreas) की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) में स्थित अल्फा कोशिकाएं 'ग्लूकागॉन' हॉर्मोन का स्राव करती हैं, जो एक ग्लाइकोजेनोलिसिस और ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करने वाला हाइपरग्लाइसेमिक कारक है।
2. एड्रेनल मेड्यूला द्वारा स्रावित 'एपिनेफ्रीन' (एड्रेनालाईन) और 'नॉरएपिनेफ्रीन' (नॉरएड्रेनालाईन) कैटेकोलामीन हॉर्मोन हैं, जो आपातकालीन परिस्थितियों (लड़ो या भागो प्रतिक्रिया) के दौरान हृदय स्पंदन, श्वसन दर और पुतली के फैलाव को बढ़ाते हैं।
3. हाइपोथैलेमस द्वारा स्रावित 'ऑक्सीटोसिन' हॉर्मोन मुख्य रूप से वृक्क नलिकाओं पर कार्य करके जल के पुनरअवशोषण को नियंत्रित करता है, जबकि 'वैसोप्रेसिन' (ADH) गर्भाशय की पेशियों के संकुचन और दुग्ध निष्कासन को प्रेरित करता है।
4. पीयूष ग्रंथि का अग्र भाग (Adenohypophysis) 'ग्रोथ हॉर्मोन' (GH) का स्राव करता है, जिसकी अत्यधिक कमी से बच्चों में 'बौनापन' (Pituitary dwarfism) होता है और वयस्कता में इसके अतिस्राव से 'एक्रेमेगली' (Acromegaly) नामक विकार उत्पन्न होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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पादप जगत के वर्गीकरण, प्रकाश संश्लेषण और पादप हॉर्मोन्स के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रायोफाइट्स (Bryophytes) को 'पादप जगत का उभयचर' कहा जाता है क्योंकि ये मृदा में उगते हैं लेकिन लैंगिक जनन के लिए जल पर निर्भर होते हैं, और इनका मुख्य पादप शरीर अगुणित युग्मकोद्भिद (Gametophyte) होता है।
2. C4 चक्र में प्राथमिक कार्बन डाइऑक्साइड स्थिरीकरण पर्णमध्योतक (Mesophyll) कोशिकाओं में 'PEP केस' एंजाइम द्वारा होता है, जिससे 4-कार्बन यौगिक (ऑक्जेलोएसेटिक एसिड) बनता है, और यह चक्र C3 पौधों की तुलना में उच्च तापमान और कम जल उपलब्धता वाले वातावरण में अधिक प्रभावी होता है।
3. ए abscisic acid (ABA) को 'तनाव हॉर्मोन' (Stress hormone) कहा जाता है क्योंकि यह प्रतिकूल पर्यावरणीय परिस्थितियों (जैसे जल की कमी) के दौरान रंध्रों (Stomata) को बंद करने को प्रेरित करता है और बीजों की प्रसुप्ति (Dormancy) को बढ़ावा देता है।
4. प्रकाश संश्लेषण की प्रकाशीय अभिक्रिया के दौरान चक्रीय फोटोफास्फोरिलेशन (Cyclic photophosphorylation) केवल फोटोसिस्टम-I (PS-I) से संबंधित होता है, जिसमें जल के प्रकाशीय अपघटन की आवश्यकता नहीं होती है और इससे केवल ATP का निर्माण होता है, NADPH का नहीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं?
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परमाणु संरचना और क्वांटम यांत्रिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हाइजेनबर्ग का अनिश्चितता का सिद्धांत यह बताता है कि किसी कण की स्थिति और उसके संवेग (या वेग) का एक साथ सटीक निर्धारण करना असंभव है, और इन दोनों अनिश्चितताओं का गुणनफल प्लांक स्थिरांक ($h$) के आधे या उसके आधे से अधिक ($h/4\pi$) के बराबर होता है।
2. आउफबाऊ नियम (Aufbau Principle) के अनुसार, परमाणु में कक्षकों को भरने का क्रम उनकी ऊर्जा के बढ़ते क्रम में होता है, जिसका निर्धारण $(n + l)$ नियम द्वारा किया जाता है, जहाँ समान $(n + l)$ मान होने पर उच्च मुख्य क्वांटम संख्या ($n$) वाले कक्षक को पहले भरा जाता है।
3. पाउली का अपवर्जन सिद्धांत (Pauli's Exclusion Principle) यह स्पष्ट करता है कि किसी परमाणु में किन्हीं भी दो इलेक्ट्रॉनों के लिए चारों क्वांटम संख्याओं का मान सर्वसम (समान) नहीं हो सकता है, और एक कक्षक में विपरीत चक्रण (Spins) वाले अधिकतम दो ही इलेक्ट्रॉन आ सकते हैं।
4. हुंड का अधिकतम बहुलकता नियम (Hund's Rule of Maximum Multiplicity) यह निर्देश देता है कि किसी उपकोश (Subshell) के कक्षकों में इलेक्ट्रॉनों का युग्मन तब तक नहीं होता जब तक कि प्रत्येक उपलब्ध कक्षक में एक-एक इलेक्ट्रॉन समानांतर चक्रण के साथ प्रवेश न कर ले।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अवतल दर्पण की फोकस दूरी?
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रात का जीव?
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