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Geography
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भारत की प्रमुख बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं और उनसे संबंधित नदियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. उकाई परियोजना - ताप्ती नदी (गुजरात)
  2. 2. चमेरा परियोजना - रावी नदी (हिमाचल प्रदेश)
  3. 3. बाणसागर परियोजना - सोन नदी (उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश)
  4. 4.

शरावती परियोजना - शरावती नदी, जिस पर प्रसिद्ध 'कुंचिकल जलप्रपात' स्थित है (कर्नाटक) उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी युग्म सही सुमेलित हैं। उकाई परियोजना गुजरात में ताप्ती नदी पर स्थित है। चमेरा परियोजना हिमाचल प्रदेश में रावी नदी पर बनी एक प्रमुख जलविद्युत परियोजना है। बाणसागर परियोजना मध्य प्रदेश के शहडोल जिले में सोन नदी पर स्थित एक अंतर-राज्यीय बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसका लाभ मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार को मिलता है। शरावती परियोजना कर्नाटक में शरावती नदी पर स्थित है, और इसी नदी पर भारत का सबसे ऊँचा जलप्रपात विकिपीडिया संदर्भ (कुंचिकल जलप्रपात) स्थित है।
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पृथ्वी की आंतरिक भू-गतिशीलता, प्लेट विवर्तनिकी तथा भूकंप, ज्वालामुखी और सुनामी की प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. प्रशांत महासागर की परिधि पर स्थित 'अग्नि वलय' (Ring of Fire) मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) और अपसारी (Divergent) दोनों प्रकार की प्लेट सीमाओं का एक जटिल क्षेत्र है, जहाँ दुनिया के लगभग 75% सक्रिय ज्वालामुखी और 90% भूकंप दर्ज किए जाते हैं। 2. हॉटस्पॉट (Hotspot) ज्वालामुखी प्रक्रियाएं प्लेट सीमाओं के भीतर अंतः-प्लेट (Intraplate) क्षेत्रों में मैग्मा के ऊपर उठने के कारण होती हैं, जैसे कि हवाई द्वीप समूह का निर्माण, और इनमें प्लेटों की गति के साथ ज्वालामुखियों की एक श्रृंखला बनती जाती है। 3. सुनामी तरंगें गहरे समुद्र में बहुत कम ऊँचाई और अत्यधिक लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे पानी में जहाजों को इनका आभास नहीं होता है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में उथले पानी के संपर्क में आने पर इनकी गति कम हो जाती है और ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है। 4. भूकंप के दौरान फोकस (Focus) या अवकेंद्र वह स्थान होता है जहाँ से सबसे पहले भूकंपीय तरंगें उत्पन्न होती हैं, जबकि अधिकेंद्र (Epicenter) ठीक उसके ऊपर पृथ्वी की सतह पर स्थित वह बिंदु होता है जहाँ सबसे पहले भूकंपीय तरंगों का अनुभव किया जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? पवन प्रणालियों, आर्द्रता, वर्षा के प्रकार और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कोरियॉलिस बल (Coriolis Force) पृथ्वी के घूर्णन के कारण उत्पन्न होने वाला एक आभासी बल है, जो उत्तरी गोलार्ध में पवनों को उनकी मूल दिशा के दाईं ओर तथा दक्षिणी गोलार्ध में बाईं ओर विक्षेपित कर देता है, और भूमध्य रेखा पर इस बल का मान अधिकतम होता है। 2. 'पर्वतीय वर्षा' (Orographic Rainfall) तब होती है जब आर्द्र पवनें किसी पर्वतीय अवरोध से टकराकर ऊपर उठती हैं और रुद्धोष्म शीतलन (Adiabatic Cooling) के कारण संतृप्त होकर पर्वत के पवन-विमुख ढाल (Leeward Side) पर भारी वर्षा करती हैं, जबकि पवन-मुखी ढाल पर वृष्टिछाया क्षेत्र बनता है। 3. शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclones) मुख्य रूप से 'वाताग्र' (Fronts) के सहारे विकसित होते हैं, जिनका प्रसार बहुत विस्तृत होता है और ये पछुआ पवनों के प्रभाव से पश्चिम से पूर्व की ओर गति करते हैं, जिससे भारत के उत्तर-पश्चिम में होने वाली 'मावठ' (Western Disturbances) भी इसी का एक रूप है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के केंद्र में 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) होती है, जो शांत मौसम, स्पष्ट आसमान और न्यूनतम वायुदाब वाला क्षेत्र होती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के अपवाह तंत्र के अंतर्गत हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की संरचना, उद्गम और प्रवाह विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) प्रवाह का उत्तम उदाहरण हैं, अर्थात ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले से बह रही थीं और इन्होंने अपने मार्ग में गहरी गार्ज (Gorges) और खड्डों का निर्माण करते हुए हिमालय को काटा है। 2. प्रायद्वीपीय नदियाँ मुख्य रूप से अधोरोपित (Superimposed) या अनुवर्ती (Consequent) प्रवाह प्रदर्शित करती हैं, जिनकी घाटियाँ चौड़ी, उथली और प्रौढ़ावस्था (Mature stage) को प्राप्त कर चुकी हैं, क्योंकि ये प्राचीन और स्थिर भू-भाग पर प्रवाहित होती हैं। 3. सिंधु, सतलुज और ब्रह्मपुत्र नदियाँ ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र से निकलती हैं और ये हिमालय की तीनों प्रमुख श्रेणियों को पार करती हुई 'एपिजेनिक' (Epigenetic) या पूर्ववर्ती नदियों की श्रेणी में आती हैं। 4. प्रायद्वीपीय भारत की अपवाह द्रोणियाँ जल-संभर (Water divides) द्वारा स्पष्ट रूप से विभाजित हैं, और इनकी ढाल प्रवणता (Gradient) हिमालयी नदियों की तुलना में बहुत तीव्र होती है, जिसके कारण ये अपने ऊपरी पाठ्यक्रमों में भीषण बाढ़ का कारण बनती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति तथा इसके विभिन्न घटकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. तिब्बत का पठार गर्मियों में अत्यधिक गर्म होकर एक विशाल थर्मल लो-PRESSURE (निम्न वायुदाब) केंद्र के रूप में कार्य करता है, जो दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक हवाओं को विषुवत रेखा पार करने के बाद फेरेल के नियम के कारण दक्षिण-पश्चिम दिशा में मुड़ने के लिए आकर्षित करता है। 2. 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