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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत में 'श्री विधि' (System of Rice Intensification - SRI) पद्धति का संबंध मुख्य रूप से धान की खेती से है, जिसमें कम पानी के उपयोग, पौधों के बीच अधिक दूरी रखने और जैविक खादों के प्रयोग पर जोर दिया जाता है, जिससे जल की बचत और उत्पादन में वृद्धि होती है।
- 2. 'शून्य जुताई कृषि' (Zero-Tillage Farming) या न्यूनतम जुताई पद्धति में पिछली फसल के अवशेषों को खेत में ही छोड़ दिया जाता है, जिससे मृदा के कटाव में कमी आती है, नमी संरक्षित रहती है और ट्रैक्टर के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन तथा ईंधन की खपत घटती है।
- 3. 'ड्रिप सिंचाई' (Drip Irrigation) प्रणाली सतह पर होने वाले वाष्पीकरण और सतही अपवाह (Runoff) को पूरी तरह से समाप्त कर देती है, जिससे जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, किंतु यह प्रणाली केवल उथले जड़ तंत्र वाली फसलों जैसे धान और गेहूँ के लिए ही उपयुक्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 'श्री विधि' (SRI) धान उगाने की एक आधुनिक और वैज्ञानिक पद्धति है जिसमें कम पानी, छोटे पौधों के रोपण और बेहतर वायु संचार का उपयोग किया जाता है। कथन 2 भी सही है क्योंकि शून्य जुताई (Zero-Tillage) कृषि पद्धतिकी में मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने, खरपतवार नियंत्रण और नमी संरक्षण के लिए बिना खेत जोते बीज बोए जाते हैं। कथन 3 गलत है क्योंकि ड्रिप सिंचाई जल उपयोग दक्षता को तो बहुत अधिक बढ़ा देती है, किंतु यह केवल धान जैसी अत्यधिक जल की आवश्यकता वाली फसलों के लिए नहीं, बल्कि बागवानी, फल और चौड़ी पंक्ति वाली फसलों के लिए सबसे अधिक प्रभावी है, जबकि धान के लिए सतही या बाढ़ सिंचाई का पारंपरिक रूप से उपयोग होता है। भारत की कृषि और सिंचाई प्रणालियों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के वितरण और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में कोयला भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा 'गोंडवाना कोयला क्षेत्रों' में पाया जाता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों तक सीमित हैं और देश के कुल कोयला उत्पादन का लगभग 98% हिस्सा प्रदान करते हैं।
2. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के संदर्भ में, असम का 'डिगबोई' क्षेत्र एशिया का सबसे पुराना तेल उत्पादक क्षेत्र है, जबकि अपतटीय क्षेत्रों में 'मुंबई हाई' (Mumbai High) देश का सबसे बड़ा अपतटीय पेट्रोलियम उत्पादक क्षेत्र है जो मध्य-मीोजेन युग की चूना पत्थर संरचनाओं से जुड़ा है।
3. भारत के परमाणु खनिज भंडारों में 'थोरियम' का प्रमुख स्रोत 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite sand) है, जो केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों के साथ-साथ झारखंड के राँची के पठार पर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
4. एंथracite (एंथ्रेसाइट) कोयला भारत में पाया जाने वाला सबसे उच्च कोटि का कोयला है, जिसका भंडार मुख्य रूप से झारखंड के झरिया और बोकारो क्षेत्रों में प्रचुर मात्रा में खनन किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म सिंचाई तकनीक (ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) बाढ़ सिंचाई (Flood Irrigation) की तुलना में जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अत्यधिक बढ़ा देती है, लेकिन यह तकनीक सभी प्रकार की फसलों और मृदाओं के लिए समान रूप से अनुपयुक्त मानी जाती है।
2. भारत में 'मल्टीपल क्रॉपिंग' (बहु-फसलीय कृषि) और 'अल्टरनेटिव क्रॉपिंग' पद्धतियाँ जलवायु परिवर्तन के जोखिमों को कम करने और कृषि विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए अपनाई जाती हैं।
3. देश में 'दालों' (Pulses) के उत्पादन के अंतर्गत चना और तूर (अरहर) प्रमुख फसलें हैं, जो नाइट्रोजन स्थिरीकरण (Nitrogen Fixation) के माध्यम से मृदा की उर्वरता को प्राकृतिक रूप से बढ़ाने में सहायता करती हैं।
4. भारत में खरीफ की फसलें मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन के साथ जून-जुलाई में बोई जाती हैं और सितंबर-अक्टूबर में काटी जाती हैं, जिनके अंतर्गत धान, मक्का, ज्वार और बाजरा प्रमुख हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालय की अधिकांश प्रमुख नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उदाहरण हैं, अर्थात उन्होंने हिमालय के उत्थान से पहले ही अपने मार्ग निर्धारित कर लिए थे और उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व महाखड्डों (Gorges) का निर्माण किया है।
2. प्रायद्वीपीय भारत की नर्मदा और तापी नदियाँ रिफ्ट घाटियों (Rift Valleys) से होकर पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं और अरब सागर में डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि गोदावरी और कृष्णा जैसी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं।
3. प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी युवावस्था में हैं और इनका अनुदैर्ध्य प्रोफाइल अत्यधिक असंतुलित है, जिसके कारण ये वर्ष भर निरंतर जलप्रवाह बनाए रखती हैं और तीव्र अपरदन कार्यों में संलग्न रहती हैं।
4. कोसी नदी एक पूर्ववर्ती हिमालयी नदी है जो अपने मार्ग परिवर्तन के लिए कुख्यात है, किंतु इसके विपरीत ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करने से पहले तिब्बत के क्षेत्र में 'سانگپो' (Tsangpo) के नाम से जानी जाती है और यह एक अनुगामी नदी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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जनसंख्या की दृष्टि से भारत का सबसे बड़ा राज्य कौन सा है?
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत गहराई लगभग 200 मीटर तक होती है, और यह क्षेत्र खनिज तेल, प्राकृतिक गैस तथा विश्व के प्रमुख मत्स्य क्षेत्रों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
2. 'वसंत ज्वार' (Spring Tide) के दौरान सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा समकोण (Right Angle) की स्थिति में होते हैं, जिसके कारण सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के प्रभाव को संतुलित कर देते हैं और सबसे कमजोर ज्वार उत्पन्न होता है।
3. 'सुण्डा जलडमरूमध्य' (Sunda Strait) जावा द्वीप को सुमात्रा द्वीप से अलग करता है और जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है, जबकि 'बास जलडमरूमध्य' (Bass Strait) ऑस्ट्रेलिया को तस्मानिया द्वीप से अलग करता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार ज्वार-भाटा की उत्पत्ति में चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण बल पृथ्वी पर सूर्य के गुरुत्वाकर्षण बल की तुलना में अधिक प्रभावी होता है क्योंकि चंद्रमा पृथ्वी के बहुत अधिक निकट स्थित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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