BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
15 views

पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूपर्पटी (Crust) के रासायनिक संघटन और चट्टानों के चक्र के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में भार के अनुसार सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व ऑक्सीजन है, जिसके बाद सिलिकॉन, एल्युमिनियम और लोहा का स्थान आता है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी (Whole Earth) के स्तर पर लोहे (Iron) की मात्रा सर्वाधिक होती है।
  2. 2. 'बेसाल्टिक मैग्मा' (Basaltic Magma) में सिलिका की मात्रा कम (लगभग 45-55%) होती है, जिसके कारण यह अधिक तरल और कम चिपचिपा होता है, और इसके शीतलन से आग्नेय चट्टानें बनती हैं जो प्रायः क्षारीय और फेरोमैग्नेशियन खनिजों से समृद्ध होती हैं।
  3. 3. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) केवल अवसादी चट्टानों के अत्यधिक ताप और दाब के प्रभाव से अपने रूप परिवर्तन के फलस्वरूप बनती हैं, तथा आग्नेय चट्टानों का कायांतरण (Metamorphism) इस प्रक्रिया में शामिल नहीं होता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में ऑक्सीजन (लगभग 46.6%) सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व है, इसके बाद सिलिकॉन (27.7%), एल्युमिनियम (8.1%) और आयरन (5.0%) आते हैं। संपूर्ण पृथ्वी के कुल द्रव्यमान का सबसे बड़ा हिस्सा लोहा बनाता है। कथन 2 सही है: बेसाल्टिक मैग्मा में सिलिका की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, जिससे इसका श्यानता (Viscosity) कम होती है और यह दूर तक फैल सकता है। इसके जमने से फेरोमैग्नेशियन खनिजों से युक्त आग्नेय चट्टानों का निर्माण होता है। कथन 3 गलत है क्योंकि रूपांतरित चट्टानें केवल अवसादी से नहीं, बल्कि आग्नेय (Igneous) और पहले से मौजूद रूपांतरित चट्टानों के उच्च ताप, दाब और रासायनिक सक्रिय द्रवों के प्रभाव से भी बनती हैं। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की संरचना, उद्गम और जल-प्रवाह विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ अपने विकास के युवा अवस्था में हैं और ये महाखड्ड (Gorges), V-आकार की घाटियों, क्षिप्रिकाओं (Rapids) और जलप्रपातों का निर्माण करती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ अपने परिपक्व चरण में हैं और इनका ढाल मंद होने के कारण ये व्यापक विसर्पण (Meandering) करती हैं। 2. चंबल, बेतवा और केन जैसी नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार से निकलकर उत्तर की ओर बहते हुए यमुना नदी में मिलती हैं, जो इस बात का प्रमाण है कि उत्तरी भारत का संपूर्ण ढाल प्रारंभिक काल से ही दक्षिण से उत्तर की ओर था। 3. लूनी नदी अरावली श्रेणी के पश्चिम में पुष्कर के पास दो धाराओं—सर और साबर—के रूप में उत्पन्न होती है, जो दक्षिण-पश्चिम दिशा में बहते हुए कच्छ के रण में विलुप्त हो जाती है और यह एक अंतःस्थलीय (Inland) अपवाह तंत्र का उत्कृष्ट उदाहरण है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार गोदावरी नदी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है, जिसे 'दक्षिण गंगा' या 'वृद्ध गंगा' कहा जाता है, और यह महाराष्ट्र के नासिक जिले के त्र्यंबक से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) तथा हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'सिंधु नदी प्रणाली' के अंतर्गत आने वाली सतलज, व्यास और रावी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) नदियों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो हिमालय के उत्थान से पहले से बह रही हैं और इन्होंने गहरे गार्ज का निर्माण किया है। 2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ मुख्य रूप से 'वृक्षाकार' (Dendritic) अपवाह पैटर्न का अनुसरण करती हैं, जिनमें गोदावरी, कृष्णा और कावेरी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में गिरते समय बड़े और उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं। 3. 'नर्मदा और तापी' नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की उन प्रमुख नदियों में शामिल हैं जो पश्चिम की ओर बहते हुए अरब सागर में गिरती हैं, और ये नदियाँ भ्रंश घाटियों (Rift Valleys) से होकर बहने के कारण डेल्टा का निर्माण न करके ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं। 4. 'कोसी नदी' को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो अपने मार्ग परिवर्तन (Course shifting) और भारी मात्रा में अवसाद (Silt) लाने के लिए कुख्यात है, और यह गंगा नदी में मिलने से पहले सोन नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी के रूप में जुड़ती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के अपवाह तंत्र (Drainage System) तथा हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ 'पूर्ववर्ती' (Antecedent) प्रकृति की होती हैं, जो हिमालय के उत्थान से पहले से प्रवाहित हो रही हैं और इन्होंने गहरे गार्ज (Gorges) का निर्माण किया है, जैसे कि सिंधु, सतलज और ब्रह्मपुत्र नदियाँ। 2. प्रायद्वीपीय भारत की नर्मदा और तापी नदियाँ रिफ्ट घाटी (भ्रंश घाटी) से होकर पश्चिम की ओर बहती हैं और अपने मुहाने पर विशाल उपजाऊ डेल्टा का निर्माण करती हैं। 3. 'कोसी नदी' अपने मार्ग परिवर्तन और भारी अवसाद (Silt) प्रेषण के लिए कुख्यात है, और यह गंगा नदी में मिलने से पहले बागमती और अरुण जैसी सहायक नदियों के साथ मिलकर एक बड़ा जलोढ़ शंकु (Alluvial Fan) बनाती है। 4. प्रायद्वीपीय नदियों में गोदावरी नदी बेसिन क्षेत्रफल और लंबाई दोनों दृष्टियों से दक्षिण भारत की सबसे बड़ी नदी प्रणाली है, जिसे 'वृद्ध गंगा' या 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत में मिलने वाला अधिकांश कोयला 'गोंडवाना' क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो कुल कोयला भंडार का लगभग 98% है और इसमें मुख्य रूप से बिटुमिनस प्रकार का कोयला पाया जाता है। 2. 'लिग्नाइट' (भूरा कोयला) का सबसे बड़ा भंडार तमिलनाडु के नेवेली क्षेत्र में स्थित है, जबकि देश का अधिकांश कोकिंग कोयला झारखंड के झरिया और बोकारो क्षेत्रों से निकाला जाता है। 3. भारत में पेट्रोलियम (कच्चा तेल) का सर्वाधिक उत्पादन अपतटीय (Offshore) क्षेत्रों से होता है, जिसमें 'मुंबई हाई' (Mumbai High) सबसे बड़ा उत्पादक क्षेत्र है, जो खंभात की खाड़ी में स्थित एक मध्य Miocene कार्बोनेट जवसंधि संरचना है। 4. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए आवश्यक 'यूरेनियम' का सबसे प्रमुख भंडार झारखंड के जादूगोड़ा में स्थित है, जबकि थोरियम का विशाल भंडार केरल और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट' रेत में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों (शैल चक्र) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) ऊपरी मेंटल का अत्यधिक चिपचिपा और अर्ध-पिघला हुआ या प्लास्टिक अवस्था वाला भाग है, जिस पर स्थलमंडल (Lithosphere) की विवर्तनिक प्लेटें तैरती हैं। 2. रूपांतरित चट्टानों (Metamorphic Rocks) का निर्माण अत्यधिक तापमान, दबाव या रासायनिक रूप से सक्रिय तरल पदार्थों के प्रभाव से पूर्ववर्ती आग्नेय और अवसादी चट्टानों के संगठन या खनिज संरचना में परिवर्तन के कारण होता है। 3. ग्रेनाइट एक प्रकार की आंतरिक आग्नेय चट्टान (Intrusive Igneous Rock) है, जो पृथ्वी के भीतर मैग्मा के बहुत धीमी गति से ठंडे होने के कारण बड़े क्रिस्टल के रूप में जमती है, जबकि बेसाल्ट बाह्य आग्नेय (ज्वालामुखीय) चट्टान का उदाहरण है। 4. अवसादी चट्टानें (Sedimentary Rocks) हमेशा रवेदार (Crystalline) और अत्यधिक कठोर होती हैं क्योंकि इनका निर्माण पृथ्वी के अत्यधिक गहरे आंतरिक भागों में अत्यधिक उच्च दाब के कारण होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.