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Geography
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सौर मण्डल के उद्भव, ग्रहों की आंतरिक संरचना और खगोलीय पिंडों (उल्कापिंडों एवं क्षुद्रग्रहों) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'नेबुला परिकल्पना' (Nebular Hypothesis), जिसे मुख्य रूप से इммаनुअल कांट और पियरे-साइमन लाप्लास द्वारा प्रतिपादित किया गया था, के अनुसार सौर मंडल का निर्माण एक विशाल घूमते हुए गैसीय और धूल भरे नेबुला के संकुचन एवं शीतलन के फलस्वरूप हुआ है।
- 2. 'शुक्र' (Venus) और 'यूरेनस' (Uranus) हमारे सौर मण्डल के ऐसे ग्रह हैं जिनका घूर्णन (Rotation) अन्य अधिकांश ग्रहों के विपरीत पूर्व से पश्चिम (Clockwise) दिशा में होता है, जिसके कारण इन ग्रहों पर सूर्य पश्चिम में उगता हुआ प्रतीत होता है।
- 3. 'उल्कापिंड' (Meteoroids) जब पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करते हैं, तो घर्षण के कारण अत्यधिक गर्म होकर चमक उठते हैं, जिन्हें 'शूटिंग स्टार' या टूटता तारा कहा जाता है, और यदि कोई पिंड वायुमंडल में पूरी तरह न जलकर पृथ्वी के धरातल पर गिरता है, तो उसे 'उल्काश्म' (Meteorite) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। नेबुला परिकल्पना सौर मंडल की उत्पत्ति के प्रारंभिक वैज्ञानिक सिद्धांतों में से एक है। शुक्र और यूरेनस की घूर्णन दिशा अन्य ग्रहों से भिन्न (प्रतिकूल) है। इसके अतिरिक्त, अंतरिक्ष से आने वाले चट्टानी टुकड़े जब पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरते हैं तो घर्षण के कारण जल जाते हैं; इन्हें विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उल्कापिंड कहा जाता है।
Related Questions
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भारत के प्रमुख पर्वतीय दर्रों और उनकी भौगोलिक अवस्थिति तथा संबंधित मार्गों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'अघिल दर्रा' (Aghil Pass) काराकोरम श्रेणी के उत्तर में लद्दाख क्षेत्र में स्थित है, जो लद्दाख को चीन के शिनजियांग (Xinjiang) प्रान्त से जोड़ता है और यह सर्दियों में अत्यधिक हिमपात के कारण बंद रहता है।
2. 'चांग ला दर्रा' (Chang La) लद्दाख को तिब्बत से जोड़ने वाला एक उच्च पर्वतीय दर्रा है, जिससे होकर प्रसिद्ध पंगोंग त्सो झील के रास्ते जाने का मार्ग गुजरता है और यह जास्कर श्रेणी का हिस्सा है।
3. 'बुर्जिल दर्रा' (Burzil Pass) कश्मीर घाटी को सीधे गिलगित-बाल्टिस्तान से जोड़ता है और यह महान हिमालय श्रेणी के पश्चिमी छोर पर स्थित है, जो प्राचीन काल में भारत और मध्य एशिया के बीच एक प्रमुख व्यापार मार्ग हुआ करता था।
4. 'बारालाचा ला दर्रा' (Baralacha La) हिमाचल प्रदेश के लाहुल और स्पीति जिले को लद्दाख के लेह क्षेत्र से जोड़ता है, जिससे होकर चिनाब नदी की दो प्रमुख स्रोत धाराएँ—चंद्रा और भागा प्रवाहित होती हैं, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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महासागरीय जलधाराओं (Ocean Currents) और उनके प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'फोकलैंड जलधारा' (Falkland Current) अटलांटिक महासागर में दक्षिण अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे प्रवाहित होने वाली एक ठंडी जलधारा है, जो ब्राजील की गर्म जलधारा से मिलकर 'ब्राजील-फोकलैंड अभिसरण' क्षेत्र का निर्माण करती है और यहाँ घना कोहरा व समृद्ध मतस्य क्षेत्र उत्पन्न होता है।
2. 'अगुल्हास जलधारा' (Agulhas Current) हिंद महासागर की एक गर्म जलधारा है, जो अफ्रीका के पूर्वी तट के साथ दक्षिण की ओर बहती है और मुख्य रूप से मोजाम्बिक धारा का ही विस्तारित रूप है।
3. उत्तरी प्रशांत महासागर में 'कुरोशियो जलधारा' (Kuroshio Current) एक ठंडी जलधारा है, जिसे जापान की 'गल्फ स्ट्रीम' भी कहा जाता है, और यह एशिया के पूर्वी तट के सहारे उत्तर की ओर प्रवाहित होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार महासागरीय जलधाराओं की दिशा उत्तरी गोलार्द्ध में कोरियोलिस बल के प्रभाव के कारण दाईं ओर (क्लाॅकवाइज) तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बाईं ओर (एंटी-क्लॉकवाइज) विक्षेपित होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के खनिज संसाधनों, उनके भौगोलिक वितरण तथा ऊर्जा भंडारों (कोयला, पेट्रोलियम और परमाणु खनिज) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पाए जाने वाले कुल कोयला भंडारों का लगभग 98% हिस्सा 'गोंडवाना क्रम' के कोयले का है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित है, जबकि उच्च गुणवत्ता वाला 'एन्थरासाइट' कोयला मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर के रियासी क्षेत्र में सीमित मात्रा में पाया जाता है।
2. भारत के अपतटीय पेट्रोलियम क्षेत्रों में मुंबई हाई के पश्चात कृष्णा-गोदावरी बेसिन (KG Basin) और असम बेसिन देश के प्रमुख हाइड्रोकार्बन उत्पादक क्षेत्र हैं, जहाँ टर्शरी और मेसोज़ोइक युगीन तलछटी चट्टानों में तेल और प्राकृतिक गैस के विशाल भंडार मिलते हैं।
3. भारत में परमाणु ऊर्जा के लिए आवश्यक 'थोरियम' के वैश्विक स्तर पर सबसे बड़े भंडार केरल के तटीय क्षेत्रों की 'मोनाज़ाइट बालू' (Monazite Sand) में पाए जाते हैं, इसके अतिरिक्त झारखंड और राजस्थान के पेग्माटाइट निक्षेपों में भी यूरेनियम के बड़े भंडार स्थित हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत का अधिकांश पेट्रोलियम उत्पादन टर्शरी युग की अपतटीय और तटीय तलछटी द्रोणियों से होता है, जिसमें केजी बेसिन (KG Basin) का दीवाली-अन्वेषण क्षेत्र प्राकृतिक गैस के अपार भंडारों के लिए विश्व स्तर पर प्रसिद्ध है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत गहराई लगभग 200 मीटर तक होती है, और यहाँ सूर्य का प्रकाश प्रचुर मात्रा में पहुँचने के कारण यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मत्स्यन क्षेत्रों (Fishing Grounds) में गिना जाता है।
2. दीर्घ ज्वार (Spring Tide) की उत्पत्ति तब होती है जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी एक सीध में (सिजगी या Syzygy की स्थिति में) होते हैं, और यह स्थिति पूर्णिमा तथा अमावस्या दोनों दिनों में बनती है।
3. 'मलक्का जलसंधि' (Strait of Malacca) प्रशांत महासागर को हिंद महासागर से जोड़ती है और यह सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) तथा मलय प्रायद्वीप (मलेशिया) के मध्य अवस्थित है, जो विश्व के सबसे व्यस्त व्यापारिक मार्गों में से एक है।
4. दैनिक ज्वार-भाटा (Diurnal Tide) में प्रत्येक 24 घंटे की अवधि के भीतर किसी स्थान पर दो उच्च ज्वार और दो निम्न ज्वार आते हैं, जो चंद्रमा के आकर्षण बल का प्रत्यक्ष परिणाम हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी नदियों और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हिमालय की अधिकांश प्रमुख नदियाँ 'पूर्ववर्ती अपवाह' (Antecedent Drainage) का उदाहरण हैं, अर्थात उन्होंने हिमालय के उत्थान से पहले ही अपने मार्ग निर्धारित कर लिए थे और उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व महाखड्डों (Gorges) का निर्माण किया है।
2. प्रायद्वीपीय भारत की नर्मदा और तापी नदियाँ रिफ्ट घाटियों (Rift Valleys) से होकर पश्चिम की ओर प्रवाहित होती हैं और अरब सागर में डेल्टा का निर्माण करती हैं, जबकि गोदावरी और कृष्णा जैसी नदियाँ बंगाल की खाड़ी में ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं।
3. प्रायद्वीपीय नदियाँ अपनी युवावस्था में हैं और इनका अनुदैर्ध्य प्रोफाइल अत्यधिक असंतुलित है, जिसके कारण ये वर्ष भर निरंतर जलप्रवाह बनाए रखती हैं और तीव्र अपरदन कार्यों में संलग्न रहती हैं।
4. कोसी नदी एक पूर्ववर्ती हिमालयी नदी है जो अपने मार्ग परिवर्तन के लिए कुख्यात है, किंतु इसके विपरीत ब्रह्मपुत्र नदी भारत में प्रवेश करने से पहले तिब्बत के क्षेत्र में 'سانگپो' (Tsangpo) के नाम से जानी जाती है और यह एक अनुगामी नदी है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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