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Geography
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पृथ्वी की विवर्तनिक गतिविधियों, ज्वालामुखी उद्गार के प्रकार और सुनामी तरंगों की गतिकी के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'स्ट्रॉम्बोली' (Stromboli) प्रकार के ज्वालामुखी उद्गार को भूमध्यसागर का 'प्रकाशस्तंभ' (Lighthouse of the Mediterranean) कहा जाता है, जिसमें चिपचिपे और गाढ़े लावा के बुलबुले फूटने के कारण नियमित अंतराल पर गैसों का जोरदार विस्फोट होता है।
- 2. सुनामी तरंगें खुले महासागर में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और कम ऊँचाई के कारण जहाजों को महसूस नहीं होती हैं, किंतु जब ये तट के उथले पानी में प्रवेश करती हैं, तो जल की गहराई कम होने के कारण इनकी तरंगदैर्ध्य घट जाती है और तरंग की ऊँचाई अत्यधिक बढ़ जाती है।
- 3. अभिसारी प्लेट किनारों (Convergent Plate Boundaries) पर उत्पन्न होने वाले भूकंप सामान्यतः उथले (Shallow-focus) होते हैं, जबकि सबडक्शन ज़ोन (Subduction Zone) में सबडक्टेड प्लेट के गर्त में जाने के कारण 700 किलोमीटर तक की गहराई वाले गहरे फोकस (Deep-focus) के भूकंप भी दर्ज किए जाते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। स्ट्रॉम्बोली ज्वालामुखी लिपारी द्वीप समूह, इटली में स्थित है और इसके लगातार प्रज्वलित रहने के कारण इसे भूमध्यसागर का प्रकाशस्तंभ कहा जाता है। सुनामी तरंगों की गतिथिकी के अनुसार, खुले समुद्र में इनकी तरंगदैर्ध्य सैकड़ों किलोमीटर लंबी होती है लेकिन आयाम (ऊँचाई) बहुत कम होता है, जो तट के पास पहुँचकर उथले जल में घर्षण के कारण संकुचित होकर बहुत ऊँची दीवारों जैसी लहरों में बदल जाती है। इसके अलावा, सबडक्शन जोन में प्लेटों के नीचे जाने से विभिन्न गहराइयों (उथले से लेकर गहरे फोकस तक) पर भूकंपीय ऊर्जा का विमोचन होता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा (परिक्रमण) पूरी करने में कितना समय लेती है?
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भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और उसके लिए आवश्यक कच्चे माल (परमाणु खनिजों) के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना तथा उनसे जुड़े औद्योगिक व ऊर्जा भंडारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा यूरेनियम के उत्खनन के लिए झारखंड के 'जादूगोड़ा' के अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के कडप्पा बेसिन में स्थित 'तुಮ್ಮलपल्ले' और 'लम्bapur' क्षेत्रों को देश के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में गिना जाता है, जहाँ यूरेनियम के निक्षेप मुख्य रूप से धारवाड़ क्रम की कायांतरित और डोलोमाइट चट्टानों में पाए जाते हैं।
2. भारत का 'थोरियम' आधारित परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अत्यधिक सामरिक महत्व रखता है, क्योंकि देश के पूर्वी और पश्चिमी तटीय मैदानों विशेषकर केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की 'मोनाज़ाइट रेत' (Monazite Sand) में थोरियम के अपार भंडार मौजूद हैं।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का त्रि-चरणीय (Three-stage Nuclear Power Programme) विकास मॉडल डॉ. होमी जहांगीर भाबा द्वारा परिकल्पित किया गया था, जिसके प्रथम चरण में प्राकृतिक यूरेनियम आधारित भारी पानी रिएक्टरों (PHWRs) का उपयोग किया जाता है, द्वितीय चरण में प्लूटोनियम-239 आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBRs) का संचालन होता है, और अंतिम चरण में थोरियम-यूरेनियम-233 चक्र को अपनाया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'बोरॉन' और 'बेरिलियम' जैसे मंदक (Moderators) और नियंत्रण छड़ों के रूप में उपयोग होने वाले खनिज पूरी तरह से अनुपलब्ध हैं, जिसके कारण भारत अपने संपूर्ण परमाणु ईंधन चक्र के लिए आयात पर पूर्णतः निर्भर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय मृदाओं की रासायनिक संरचना, उनके निर्माणकारी कारकों और उनके विशेष भौगोलिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लाल और पीली मृदा (Red and Yellow Soils) का विकास मुख्य रूप से दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी हिस्सों में रवेदार (Crystalline) और रूपांतरित आग्नेय चट्टानों पर लोहे के व्यापक प्रसार के कारण होता है, और इसमें फेरिक ऑक्साइड की उपस्थिति के कारण इसका रंग लाल होता है, जबकि जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रूप में परिवर्तित हो जाती है।
2. क्षारीय और लवणीय मृदा (Saline and Alkaline Soils), जिन्हें 'उसर', 'रेह' या 'कल्लर' भी कहा जाता है, में सोडियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम का अनुपात अत्यधिक होता है, और इनका विकास मुख्य रूप से उन क्षेत्रों में होता है जहाँ शुष्क जलवायु, अत्यधिक वाष्पीकरण और बिना मुहाने की जल निकासी के कारण लवण भू-सतह पर केशिका क्रिया (Capillary Action) द्वारा ऊपर आ जाते हैं।
3. पीटमय और दलदली मृदाएँ (Peaty and Marshy Soils) भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में मृत कार्बनिक पदार्थों के बड़े पैमाने पर संचय से बनती हैं, जिनमें ह्यूमस की मात्रा 10 से 40 प्रतिशत तक होती है, और यह मृदा सामान्यतः अम्लीय प्रकृति की होने के साथ-साथ पोटैशियम और फॉस्फेट में भी प्रचुर होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की अधिकांश मृदाएँ नाइट्रोजन, ह्यूमस और फास्फोरस जैसे आवश्यक पादप पोषकों की कमी से ग्रसित हैं, जिसे दूर करने के लिए देश में संतुलित उर्वरक प्रबंधन और मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना जैसी पहलें चलाई जा रही हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सौर मंडल, ग्रहों की गति और खगोलीय पिंडों (Asteroids, Comets and Meteoroids) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मंगल और बृहस्पति की कक्षाओं के बीच स्थित क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) के अधिकांश पिंडों का उद्गम मुख्य रूप से एक पूर्ण ग्रह के टूटने से हुआ था, जो बृहस्पति के शक्तिशाली ज्वारीय गुरुत्वाकर्षण बलों के कारण बिखर गया था।
2. 'क्यूपर बेल्ट' (Kuiper Belt) नेपच्यून की कक्षा के परे सूर्य से लगभग 30 AU से 50 AU की दूरी तक फैली हुई एक तश्तरीनुमा डिस्क है, जो कम अवधि वाले धूमकेतुओं (Short-period Comets) का प्रमुख स्रोत है और इसी क्षेत्र में बौना ग्रह 'प्लूटो' स्थित है।
3. उल्कापिंड (Meteoroids) जब पृथ्वी के वायुमंडल में अत्यधिक वेग से प्रवेश करते हैं, तो वायुमंडलीय घर्षण के कारण जलकर चमकने लगते हैं, जिन्हें 'टूटता तारा' या उल्का (Meteor) कहा जाता है, और जो टुकड़े बिना पूरी तरह जले पृथ्वी की सतह पर गिरते हैं, उन्हें उल्कापिंड (Meteorites) कहा जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार हमारे सौर मंडल के सभी ग्रह सूर्य की परिक्रमा पश्चिम से पूर्व की ओर (वामावर्त या Counter-clockwise) करते हैं, और शुक्र (Venus) तथा अरुण (Uranus) को छोड़कर सभी ग्रहों का घूर्णन (Rotation) भी इसी दिशा में होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के वन क्षेत्रों, बायोस्फीयर रिजर्व और वन्यजीव संरक्षण से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'भारत में उष्णकटिबंधीय सदाबहार वन' मुख्य रूप से पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलानों, पूर्वोत्तर भारत की पहाड़ियों और अंडमान व निकोबार द्वीप समूह में पाए जाते हैं, जहाँ वार्षिक वर्षा 200 सेमी से अधिक होती है।
2. 'नंदा देवी बायोस्फीयर रिजर्व' यूनेस्को के विश्व नेटवर्क बायोस्फीयर रिजर्व की सूची में शामिल है, जो उत्तराखंड में महान हिमालय क्षेत्र में स्थित है और यहाँ 'हिन्दू कुश-हिमालयी' पारिस्थितिकी तंत्र का अनूठा प्रतिनिधित्व मिलता है।
3. 'सुंदरवन राष्ट्रीय उद्यान' विश्व का सबसे बड़ा एकल मैंग्रोव वन क्षेत्र है, जो गंगा-ब्रह्मपुत्र डेल्टा क्षेत्र में फैला हुआ है और यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर के संरक्षण के लिए विशेष रूप से 'प्रोजेक्ट टाइगर' के तहत कार्य किया जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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