BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
1 views

भारत की जनगणना 2011 और जनसंख्या वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत के कुल जनसंख्या घनत्व (382 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) में राज्यों के आधार पर, 'बिहार' राज्य (1106 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी) देश में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व वाला राज्य है, जबकि केंद्रशासित प्रदेशों में 'दिल्ली' का जनसंख्या घनत्व सबसे अधिक है।
  2. 2. वर्ष 2001 से 2011 के दशक के दौरान भारत की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर लगभग 17.64 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें मेघालय राज्य ने सभी राज्यों में सर्वाधिक दशकीय वृद्धि दर (27.9%) दर्ज की, जबकि नागालैंड एकमात्र ऐसा राज्य रहा जहाँ ऋणात्मक (नकारात्मक) दशकीय वृद्धि दर्ज की गई।
  3. 3. भारत की कुल साक्षरता दर 74.04 प्रतिशत दर्ज की गई, जिसमें पुरुष साक्षरता (82.14%) और महिला साक्षरता (65.46%) के बीच का लिंग अंतर केरल राज्य में सबसे कम और राजस्थान राज्य में सबसे अधिक है।
  4. 4. भारत की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों (Scheduled Castes - SC) का कुल जनसंख्या प्रतिशत लगभग 16.6 प्रतिशत है, और राज्यवार कुल एससी जनसंख्या के मामले में 'उत्तर प्रदेश' देश में प्रथम स्थान पर है, जबकि कुल अनुसूचित जनजातियों (Scheduled Tribes - ST) की संख्या में 'मध्य प्रदेश' शीर्ष पर है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पूर्णतः सत्य हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार, बिहार (1106 व्यक्ति/वर्ग किमी) राज्यों में सर्वाधिक घनत्व वाला है। दशक 2001-11 में भारत की वृद्धि दर 17.64% रही, जिसमें मेघालय शीर्ष पर और नागालैंड (लगभग -0.6%) नकारात्मक वृद्धि वाला एकमात्र राज्य था। साक्षरता दर 74.04% थी तथा लिंग अंतराल केरल में न्यूनतम और राजस्थान में सर्वाधिक देखा गया। कुल एससी जनसंख्या में उत्तर प्रदेश और एसटी जनसंख्या में मध्य प्रदेश शीर्ष स्थान पर हैं।
Share:

Related Questions

भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हिमालयी नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करती हैं, जिसका अर्थ है कि ये नदियाँ हिमालय के उत्थान से पहले भी प्रवाहित होती थीं और उन्होंने उत्थान के साथ-साथ गहरी घाटियों व गॉर्ज का निर्माण किया है। 2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ अपने विकास के परिपक्व चरण में हैं और अपनी घाटियों के क्षैतिज कटाव (Lateral erosion) के कारण विसर्प (Meanders) बनाने के लिए जानी जाती हैं, जबकि ये अपने मुहानों पर बहुत बड़े सक्रिय डेल्टा का ही निर्माण करती हैं, एश्चुअरी कभी नहीं बनातीं। 3. कोसी नदी को 'बिहार का शोक' कहा जाता है, जो नेपाल से निकलकर गंगा में मिलती है और अपने मार्ग बदलने की अत्यधिक प्रवृत्ति के कारण भयंकर बाढ़ लाने के लिए कुख्यात है। 4. नर्मदा और तापी नदियाँ प्रायद्वीपीय पठार की उन प्रमुख नदियों में से हैं जो पश्चिम की ओर बहते हुए रिफ्ट घाटी से गुजरती हैं और बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले सुंदर डेल्टा का निर्माण करती हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत का सबसे बड़ा मरुस्थल कौन सा है? भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति तथा वर्षा के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'अरब सागर शाखा' पश्चिमी घाट से टकराने के कारण पश्चिमी तटीय मैदानों में भारी वर्षा करती है, किंतु पश्चिमी घाट के वृष्टि-छाया क्षेत्र (Rain-shadow Area) में स्थित होने के कारण दक्कन के पठार का आंतरिक भाग अपेक्षाकृत शुष्क रहता है। 2. 'अल-निनो' (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर के पश्चिमी तट (ऑस्ट्रेलिया और इंडोनेशिया के पास) पर वायुदाब में वृद्धि और दक्षिण अमेरिकी तट (पेरू के पास) पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून कमजोर हो जाता है और देश के अधिकांश भागों में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। 3. 'मैरियन ओर्विग' या तिब्बत के पठार पर ग्रीष्मकाल में तीव्र तापीय तापन (Thermal Heating) के कारण बनने वाला निम्न वायुदाब क्षेत्र मानसून की उत्पत्ति के लिए ऊपरी क्षोभमंडलीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Easterly Jet Stream) को जन्म देता है, जो मानसून को भारत की ओर खींचने में सहायक होता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकालीन मानसून) से देश के अधिकांश भागों में वर्षा नहीं होती है, किंतु तमिलनाडु का तटीय क्षेत्र (कोरोमंडल तट) इस काल में उत्तर-पूर्वी हवाओं के बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करने के कारण शीतकाल में भी अच्छी वर्षा प्राप्त करता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भौगोलिक अवस्थिति तथा उनके निष्कर्षण क्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 'कोरवा कोयला क्षेत्र' (Korva Coalfield) छत्तीसगढ़ राज्य में महानदी बेसिन के अंतर्गत स्थित नहीं है, बल्कि यह हसदेव-अरंड नदी घाटी (जो महानदी की सहायक सोन की नहीं बल्कि महानदी की प्रमुख सहायक नदी है) क्षेत्र में फैला हुआ है और मुख्य रूप से तापीय विद्युत घरों को कोयला आपूर्ति करता है। 2. 'कालोल और मेहसाणा' पेट्रोलियम क्षेत्र गुजरात बेसिन के अंतर्गत आते हैं, जो अंतःस्थलीय (Onshore) तेल क्षेत्र हैं और यहाँ टर्टियरी युगीन तलछटी चट्टानों में पेट्रोलियम के विशाल भंडार पाए जाते हैं। 3. 'नवेली लिग्नाइट कोयला क्षेत्र' तमिलनाडु के दक्षिण-अर्कट जिले में स्थित है, जहाँ तृतीयक (Tertiary) काल के कम श्रेणी के भूरे कोयले (Lignite) का बड़े पैमाने पर खनन किया जाता है जिसका उपयोग मुख्य रूप से तापीय विद्युत उत्पादन के लिए होता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में पाए जाने वाले कुल कोयला भंडार का लगभग 90% से अधिक हिस्सा गोंडवाना क्रम की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों तक सीमित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारत के विभिन्न भागों में पाई जाने वाली मृदाओं के सूक्ष्म पोषक तत्वों, उनके वितरण तथा भौगोलिक और रासायनिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. देश की 'शुष्क मृदा' (Arid Soil) मुख्य रूप से पश्चिमी राजस्थान और गुजरात के कुछ हिस्सों में पाई जाती है, जिसका रंग लाल से भूरा होता है और इसमें घुलनशील लवणों तथा फास्फोरस की मात्रा अत्यधिक अधिक होती है, जबकि नाइट्रोजन और ह्यूमस की गंभीर कमी पाई जाती है। 2. 'पीठीय या पीटमय मृदा' (Peaty Soils) भारी वर्षा और उच्च आर्द्रता वाले क्षेत्रों में वनस्पति के भारी संचय के कारण विकसित होती है, जहाँ जल की अधिकता के कारण बड़ी मात्रा में घुलनशील कार्बनिक पदार्थ जमा हो जाते हैं, और ये मृदाएँ सामान्यतः अम्लीय तथा गहरे काले या नीले रंग की होती हैं। 3. 'लाल मृदा' (Red Soil) का लाल रंग मुख्य रूप से रवेदार आग्नेय और रूपांतरित चट्टानों में लोहे के व्यापक विसरण (Diffusion) के कारण होता है, जबकि जल योजन (Hydration) के बाद जब यह पीली दिखाई देती है, तो इसे 'पीली मृदा' कहा जाता है। 4. लैटेराइट मृदा (Laterite Soil) मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय पठार के उच्च वर्षा वाले भागों जैसे पश्चिमी घाट और मेघालय के पठार पर मिलती है, जिसमें सिलिका का पूर्ण निक्षालन हो जाने के कारण नाइट्रोजन, पोटाश और चूने की प्रचुरता होती है जबकि आयरन और एल्युमिनियम के ऑक्साइड कम पाए जाते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.