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Geography
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूपर्पटी (Crust) के रासायनिक संघटन और चट्टानों के वर्गीकरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पृथ्वी की भूपर्पटी (Crust) में भार के अनुसार सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला तत्व 'ऑक्सीजन' है, जिसके बाद क्रमशः सिलिकन, एल्युमिनियम और लोहे का स्थान आता है।
- 2. 'सियाल' (SIAL) परत मुख्य रूप से सिलिकन और एल्युमिनियम से बनी होती है, जो मुख्य रूप से महासागरीय पर्पटी का निर्माण करती है, जबकि महाद्वीपीय पर्पटी का मुख्य भाग 'सीमा' (SIMA) द्वारा निर्मित होता है जिसमें सिलिकन और मैग्नीशियम की प्रधानता होती है।
- 3. रूपांतरित चट्टानों में पर्णन (Foliation) या रेखापत्रण की विशेषता तब उत्पन्न होती है जब अत्यधिक विवर्तनिक दबाव के कारण खनिज कण या पट्टिकाएँ एक निश्चित दिशा में समानांतर रूप से व्यवस्थित हो जाती हैं, जिसका एक प्रमुख उदाहरण 'स्लेट' और 'शिष्ट' हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: पृथ्वी की संपूर्ण भूपर्पटी में भार (Weight %) के आधार पर सर्वाधिक मात्रा में ऑक्सीजन (लगभग 46.6%) पाई जाती है, उसके बाद सिलिकन (लगभग 27.7%), एल्युमिनियम (लगभग 8.1%) और लोहा (लगभग 5.0%) का स्थान आता है। कथन 2 गलत है क्योंकि 'सियाल' (SIAL) महाद्वीपीय पर्पटी का निर्माण करती है, जबकि महासागरीय पर्पटी मुख्य रूप से भारी तत्वों से युक्त 'सीमा' (SIMA - सिलिकन और मैग्नीशियम) या मुख्य रूप से बेसाल्टिक चट्टानों से बनी होती है। कथन 3 सही है; विवर्तनिक ताकतों और अत्यधिक दबाव के कारण रूपांतरित चट्टानों में खनिजों का समतलीकरण या पर्णन (Foliation) होता है, जिससे स्लेट, शिष्ट और नाइस जैसी चट्टानें बनती हैं। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारतीय जलवायु और मानसून की उत्पत्ति तथा वर्षा के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में उत्तर-पश्चिम भारत के विशाल मैदानों और थार मरुस्थल पर तीव्र ताप के कारण 'मानसूनी गर्त' (Monsoon Trough) या अंतर-उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) का उत्तर की ओर खिसकना दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
2. तिब्बत का पठार ग्रीष्मकाल में एक विशाल 'उष्मा इंजन' (Thermal Low) के रूप में कार्य करता है, जो गर्म होकर ऊपर की ओर वायु का संवहन करता है और क्षोभमंडल के ऊपरी स्तर पर पूर्वी जेट स्ट्रीम (Easterly Jet Stream) के विकास को प्रेरित करता है।
3. 'अल नीनो' (El Nino) घटना के दौरान दक्षिण अमेरिका के पेरू तट के पास ठंडी जलधारा के स्थान पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से प्रशांत महासागर के पूर्वी और पश्चिमी भागों के बीच वायुदाब में ऐसा परिवर्तन होता है जिससे भारत में मानसूनी हवाओं की तीव्रता बढ़ जाती है और सामान्य से अधिक वर्षा होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में होने वाली कुल वर्षा का अधिकांश भाग दक्षिण-पश्चिम मानसून से प्राप्त होता है, और पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढालों तथा उत्तर-पूर्व के पहाड़ी राज्यों में 200 सेंटीमीटर से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है, जबकि लद्दाख और पश्चिमी राजस्थान वृष्टिछाया क्षेत्र के कारण शुष्क रहते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की प्रमुख झीलों, जलप्रपातों और बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजनाओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लोकटक झील' (Loktak Lake), जो मणिपुर में स्थित है, पूर्वोत्तर भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील है, और इसमें तैरते हुए अनूठे वनस्पति और मृदा के द्वीप पाए जाते हैं जिन्हें 'फुम्दि' (Phumdis) कहा जाता है, तथा इसी झील पर प्रसिद्ध 'केइबुमलामजाओ राष्ट्रीय उद्यान' स्थित है।
2. 'शरावती नदी' पर कर्नाटक में स्थित 'गेरसोप्पा' या 'जोग जलप्रपात' (Jog Falls) भारत का सबसे ऊँचा सीधा (Plunge) गिरने वाला जलप्रपात है, जबकि कुंचिकल जलप्रपात भारत का सबसे ऊँचा समग्र जलप्रपात है।
3. 'सरदार सरोवर परियोजना' (Sardar Sarovar Project) नर्मदा नदी पर निर्मित एक अंतर-राज्यीय बहुउद्देशीय परियोजना है, जिसका लाभ मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान चार राज्यों को प्राप्त होता है, और इस परियोजना के अंतर्गत पर्यावरण और पुनर्वास से जुड़े मुद्दों को लेकर 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' चलाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सूक्ष्म सिंचाई (Micro-irrigation) के अंतर्गत ड्रिप और स्प्रिंकलर प्रणालियों को शामिल किया जाता है, जो पारंपरिक बाढ़ सिंचाई की तुलना में जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अत्यधिक बढ़ाती हैं और भूजल स्तर के अत्यधिक दोहन को नियंत्रित करने में सहायक हैं।
2. भारत में कृषि-जलवायु क्षेत्रों (Agro-Climatic Zones) का निर्धारण राष्ट्रीय नीति आयोग (पूर्व में योजना आयोग) द्वारा मुख्य रूप से वर्षा, तापमान, मृदा प्रकार और स्थलाकृति जैसी भौगोलिक विशेषताओं के आधार पर किया गया है, जिसके अंतर्गत देश को कुल 15 प्रमुख कृषि-जलवायु क्षेत्रों में विभाजित किया गया है।
3. 'धान की गहनता प्रणाली' (System of Rice Intensification - SRI) पारंपरिक बाढ़ सिंचाई पद्धति की तुलना में अधिक पानी की खपत करती है, क्योंकि इसमें पौधों की जड़ों में निरंतर जल भराव बनाए रखना अनिवार्य होता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में कुल बोए गए क्षेत्र का सबसे बड़ा हिस्सा चावल (Paddy) की कृषि के अंतर्गत आता है, और इसके उत्पादन में पश्चिम बंगाल देश का अग्रणी राज्य है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की विभिन्न मृदा प्रणालियों (जैसे जलोढ़, काली, लाल-पीली और लैटेराइट मृदा) के वितरण, रासायनिक संरचना और उनकी कृषि संबंधी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'नवीन जलोढ़ मृदा' को खादर कहा जाता है, जो बाढ़ के मैदानों में प्रतिवर्ष नई परतों के रूप में जमा होती है, जबकि 'पुरानी जलोढ़ मृदा' को बांगर कहा जाता है जिसमें चूने के कंकड़ (Nodules) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं और यह तुलनात्मक रूप से कम उपजाऊ होती है।
2. लाल और पीली मृदा का विकास मुख्य रूप से दक्कन के पठार के पूर्वी और दक्षिणी भागों में क्रिस्टलीय आग्नेय चट्टानों के अपक्षय से होता है, जहाँ लोहे के व्यापक प्रसार के कारण इसका रंग लाल होता है तथा जलयोजन (Hydration) के बाद यह पीले रंग में परिवर्तित हो जाती है।
3. भारत की लैटेराइट मृदाओं में नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और ह्यूमस की प्रचुरता होती है, जिसके कारण बिना किसी रासायनिक उर्वरक के ये मृदाएँ दलहनी फसलों और गन्ने की व्यावसायिक खेती के लिए देश में सर्वोच्च स्थान रखती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार शुष्क और मरुस्थलीय मृदाओं (Arid Soils) में घुलनशील लवणों और कैल्शिएम कार्बोनेट की अधिकता होती है, जिससे नीचे की परतों में कैनाइन (Kankar) की परत बनने के कारण जल का अंतःस्यंदन (Infiltration) अवरुद्ध हो जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की वायुमंडलीय प्रणालियों, आर्द्रता के प्रकार और चक्रवातों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. संतृप्त हवा में जब ओसांक (Dew Point) हिमांक से नीचे होता है, तब जलवाष्प सीधे बर्फ के क्रिस्टलों में परिवर्तित हो जाती है, जिसे उर्ध्वपातन (Sublimation) कहा जाता है और इसके परिणामי संघनन से 'पाला' (Frost) या बादलों में बर्फ के कण बनते हैं।
2. 'रोस्सी तरंगें' (Rossby Waves) ऊपरी क्षोभमंडल और समताप मंडल में प्रवाहित होने वाली लंबी वायुमंडलीय तरंगें हैं, जो पृथ्वी के घूर्णन (कोरिolis प्रभाव) के कारण उत्पन्न होती हैं और ध्रुवीय ठंडी हवा को भूमध्य रेखा की ओर तथा उष्ण हवा को ध्रुवों की ओर स्थानांतरित करने में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों (Tropical Cyclones) के विपरीत, शीतोष्ण चक्रवातों (Temperate Cyclones) की उत्पत्ति केवल महासागरीय सतहों पर होती है जहाँ समुद्र का तापमान न्यूनतम 27° सेल्सियस होना अनिवार्य है, और इनमें वाताग्र (Fronts) का पूर्णतः अभाव होता है।
4. संवहनी वर्षा (Convectional Rainfall) मुख्य रूप से विषुवतीय प्रदेशों में प्रतिदिन दोपहर के समय होती है, जिसमें अत्यधिक भू-ताप के कारण हवा गर्म होकर तेजी से ऊपर उठती है, एडियाबेटिक शीतलन (Adiabatic Cooling) से संतृप्त होती है और गरज-चमक के साथ मूसलाधार वर्षा करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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