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Geography
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पृथ्वी की आंतरिक भू-गतिशीलता और विवर्तनिक प्रक्रियाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. 'रि्टर स्केल' (Richter Scale) एक लघुगणकीय (Logarithmic) पैमाना है जो भूकंप के दौरान मुक्त होने वाली ऊर्जा (Energy Released) को मापता है, और इस स्केल पर प्रत्येक अगली पूर्ण संख्या का मान पिछली संख्या की तुलना में लगभग 32 गुना अधिक ऊर्जा वृद्धि को दर्शाता है।
- 2. 'सुनामी' (Tsunami) तरंगें गहरे महासागरों में अत्यधिक लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और कम ऊँचाई वाली होती हैं, जिसके कारण गहरे समुद्र में नौकायन कर रहे जहाजों को इनका आसानी से आभास हो जाता है।
- 3. 'पाइरोक्लास्टिक प्रवाह' (Pyroclastic Flow) विस्फोटक ज्वालामुखी उद्गार के दौरान गैसों, राख, प्युमिस और चट्टानी टुकड़ों का एक अत्यंत गर्म, तेज गति से नीचे बहने वाला घातक मिश्रण होता है।
- 4. अभिसारी प्लेट सीमाओं (Convergent Plate Boundaries) के सहारे बनने वाले 'द्वीपीय चाप' (Island Arcs) जैसे जापान या फिलीपींस, मुख्य रूप से महासागरीय-महासागरीय प्लेटों के टकराने और सबडक्शन के परिणामस्वरूप उत्पन्न होते हैं, जिसके बारे में विकिपीडिया संदर्भ में विस्तृत जानकारी दी गई है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: रिक्टर पैमाना भूकंपीय तरंगों द्वारा मुक्त की गई ऊर्जा को मापता है और यह एक लघुगणकीय पैमाना है जहाँ प्रत्येक इकाई वृद्धि लगभग 32 गुना अधिक ऊर्जा को निरूपित करती है। कथन 2 गलत है: गहरे महासागरों में सुनामी तरंगों की तरंगदैर्ध्य बहुत अधिक और ऊँचाई बहुत कम (लगभग 1 मीटर से कम) होती है, इसलिए गहरे समुद्र में जहाजों को इसका आभास नहीं होता; उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर इनकी ऊँचाई अचानक बढ़ जाती है। कथन 3 सही है: पाइरोक्लास्टिक प्रवाह अत्यधिक विनाशकारी और गर्म गैसों व तेरहवीं मलबे का मिश्रण होता है जो विस्फोटक ज्वालामुखियों से ढलानों के नीचे गिरता है। कथन 4 सही है: द्वीपीय चाप (Island Arcs) महासागरीय-महासागरीय प्लेटों के अभिसरण और सबडक्शन क्षेत्रों में बनते हैं। विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भूकंप और प्लेट विवर्तनिकी अत्यधिक अंतसंबंधित हैं।
Related Questions
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भूकंपीय तरंगों की संचलन प्रकृति, छाया क्षेत्रों (Shadow Zones) की ज्यामिति और सुनामी की तरंग गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'S-तरंगें' (Secondary Waves) केवल ठोस माध्यमों में संचरित हो सकती हैं, और इसी गुण के कारण पृथ्वी के बाहरी क्रोड (Outer Core) के तरल माध्यम में प्रवेश करते ही ये पूरी तरह विलुप्त हो जाती हैं, जिससे 105° से 145° के बीच का क्षेत्र S-तरंगों का विशाल छाया क्षेत्र बन जाता है।
2. 'P-तरंगों' (Primary Waves) का छाया क्षेत्र S-तरंगों की तुलना में काफी छोटा होता है, क्योंकि ये तरल क्रोड से अपवर्तित (Refracted) होकर गुजर सकती हैं, जिसके परिणामस्वरूप 105° से 145° के बीच का संपूर्ण वलय दोनों ही तरंगों के लिए 'मृत क्षेत्र' (Zone of Silence) के रूप में दर्ज किया जाता है।
3. 'सुनामी तरंगें' गहरे महासागरों में अत्यंत लंबी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) और कम ऊँचाई वाली छिछली जल तरंगों के समान होती हैं, जिनकी गति उथले तटीय क्षेत्रों में पहुँचने पर जल की गहराई कम होने के कारण घट जाती है, जबकि उनकी तरंग ऊँचाई (Amplitude) में अचानक भारी वृद्धि हो जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रशांत महासागर के परिधीय क्षेत्रों में स्थित 'रिंग ऑफ फायर' (Ring of Fire) मुख्य रूप से अभिसारी (Convergent) और रूपांतर भ्रंश (Transform Fault) प्लेट सीमाओं का एक ऐसा नेटवर्क है जहाँ विश्व के लगभग 90% भूकंप और 75% सक्रिय ज्वालामुखी केंद्रित हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की 2011 की जनगणना के अनुसार जनसंख्या वितरण, घनत्व और भाषाई परिवारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के भाषाई वर्गीकरण के अनुसार, 'आस्ट्रिक' (Austroasiatic) भाषा परिवार बोलने वाले लोग मुख्य रूप से मध्य और पूर्वी भारत की जनजातियों में पाए जाते हैं, जबकि 'द्रविड़' भाषा परिवार का विस्तार मुख्य रूप से प्रायद्वीपीय भारत तक सीमित है।
2. वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आँकड़ों के अनुसार, भारत का कुल जनसंख्या घनत्व 382 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर था, जिसमें संपूर्ण राज्यों में सर्वाधिक जनसंख्या घनत्व बिहार राज्य में दर्ज किया गया, जबकि केंद्र शासित प्रदेशों में दिल्ली शीर्ष पर रहा।
3. भारत की कुल नगरीय जनसंख्या का सबसे बड़ा हिस्सा उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में संकेंद्रित है, और वर्ष 2001-2011 के दशक के दौरान देश में नगरीय जनसंख्या की वार्षिक वृद्धि दर ग्रामीण जनसंख्या की तुलना में कम दर्ज की गई थी।
4. भारत के कुल जनसंख्यकीय इतिहास में वर्ष 1921 के वर्ष को 'महान विभाजक वर्ष' (Year of the Great Divide) कहा जाता है, क्योंकि इस वर्ष के बाद से भारत की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर में कभी भी ऋणात्मक वृद्धि दर्ज नहीं की गई और इसमें निरंतर तीव्र वृद्धि देखी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के प्रमुख पर्वतीय क्षेत्रों, पर्वत श्रेणियों और उनमें स्थित घाटियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'जास्कर श्रेणी' (Zanskar Range) ट्रांस-हिमालय प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो महान हिमालय के उत्तर में समानांतर फैली हुई है और इसी क्षेत्र में प्रसिद्ध 'स्कार्दू घाटी' तथा लद्दाख क्षेत्र की कई नदियाँ प्रवाहित होती हैं।
2. 'पालघाट गैप' (Palghat Gap) पश्चिमी घाट के दक्षिणी भाग में स्थित एक प्रमुख दर्रा है, जो नीलगिरी पहाड़ियों को अन्नामलाई और कार्डामम (इलायची) पहाड़ियों से अलग करता है और केरल तथा तमिलनाडु के बीच सड़क एवं रेल संपर्क प्रदान करता है।
3. 'चुंबी घाटी' (Chumbi Valley) एक रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण घाटी है जो भारत, भूटान और तिब्बत (चीन) की त्रिसंधि (Tri-junction) के पास स्थित है और यह सिक्किम के नाथू ला दर्रे के निकट क्षेत्र को नियंत्रित करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'महान हिमालय' (Greater Himalayas) या हिमाद्री श्रृंखला अपनी अत्यधिक ऊँचाई के लिए जानी जाती है, जिसमें माउंट एवरेस्ट, कंचनजंगा और मकालु जैसी विश्व की सर्वोच्च शिखर शृंखलाएँ निरंतर रूप से ग्रेनाइट और नीस चट्टानों से निर्मित होकर पाई जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूकंपीय तरंगों के संचरण और चट्टानों के भौतिक-रासायनिक गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'लेहमान असंतोषह' (Lehmann Discontinuity) पृथ्वी के बाहरी क्रोड और आंतरिक क्रोड के बीच स्थित है, जहाँ प्राथमिक भूकंपीय तरंगों (P-waves) की गति में अचानक वृद्धि होती है, जो आंतरिक क्रोड के ठोस होने का मुख्य प्रमाण देती है।
2. आग्नेय चट्टानों के अंतर्गत 'बैथोलिथ' (Batholiths) एक विशाल अंतर्भेदी (Intrusive) आग्नेय भू-आकृति है, जिसका निर्माण मैग्मा के धरातल के काफी नीचे बड़े पैमाने पर ठंडे होने से होता है और यह ग्रेनाइट चट्टानों के रूप में अपरदन के बाद प्रकट होती है।
3. 'मेटामॉर्फिज्म' या कायांतरण प्रक्रिया के दौरान, शेल (Shale) का रूपांतरण स्लेट (Slate) में, ग्रेनाइट का रूपांतरण नाइस (Gneiss) में तथा कोयले (Bituminous Coal) का रूपांतरण ग्रेफाइट या हीरे में होता है, जो क्षेत्रीय (Regional) कायांतरण के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी की क्रस्ट (Crust) और मैन्टल के बीच की सीमा को 'मोहरोविक असंतोषह' (Mohorovicic Discontinuity) कहा जाता है, जहाँ से भूकंपीय तरंगों (P-waves) की वेग में अचानक तीव्र कमी आ जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों (शैल) के चक्रीय स्वरूप (Rock Cycle) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पृथ्वी की क्रस्ट (Bhoopurpat) में 'ऑक्सीजन' और 'सिलिकॉन' के बाद तीसरा सबसे प्रचुर मात्रा में पाया जाने वाला तत्व 'एल्युमिनियम' है, जबकि सम्पूर्ण पृथ्वी के आंतरिक भाग (Core समेत) में सबसे अधिक प्रचुर मात्रा में 'लोहा' (Iron) पाया जाता है।
2. 'आग्नेय चट्टानें' (Igneous Rocks) प्राथमिक चट्टानें कहलाती हैं क्योंकि मैग्मा या लावा के ठंडे होने से इनका निर्माण होता है, और इनमें जीवाश्म (Fossils) प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं क्योंकि ये परतदार रूप में जमती हैं।
3. 'रूपांतरित चट्टानें' (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप और दाब के प्रभाव से अपनी मूल आग्नेय या अवसादी संरचना को बदल लेती हैं, और इस प्रक्रिया में चूना पत्थर का संगमरमर (Marble) में तथा बलुआ पत्थर का क्वार्ट्जाइट (Quartzite) में परिवर्तन इसके प्रमुख उदाहरण हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार मोहरोविकिक असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा रेखा को प्रदर्शित करता है, जहाँ भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक परिवर्तन होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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