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Geography
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भारत के अपवाह तंत्र के संदर्भ में, हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों की विशेषताओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हिमालयी नदियाँ मुख्य रूप से बारहमासी (Perennial) होती हैं क्योंकि इन्हें जल वर्षा के अतिरिक्त हिमनदों (Glaciers) के पिघलने से भी प्राप्त होता है, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ अधिकांशतः अनित्य (Seasonal) होती हैं और इनका मुख्य स्रोत मानसूनी वर्षा है।
  2. 2. प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ अपने विकास के 'युवावस्था' (Youth Stage) में हैं और ये अपने मार्ग में अत्यधिक विसर्जन (Meandering) तथा तीव्र गतिकी के कारण उत्तरी भारत के मैदानों की तरह विशाल डेल्टा और विसर्प बनाती हैं।
  3. 3. 'कोसी नदी', जिसे 'बिहार का शोक' कहा जाता है, एक पूर्ववर्ती नदी (Antecedent River) का उदाहरण है, जो अपने मार्ग परिवर्तन और भारी गाद (Silt) निक्षेपण के लिए कुख्यात है और यह नेपाल से निकलकर गंगा में मिलती है।
  4. 4. प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी 'गोदावरी' है, जिसे 'दक्षिण गंगा' भी कहा जाता है, और यह महाराष्ट्र के नासिक जिले में त्र्यंबकेश्वर से निकलकर बंगाल की खाड़ी में गिरती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि हिमालयी नदियाँ बर्फ और हिमनदों के पिघलने से पोषित होती हैं, जिससे वे बारहमासी होती हैं, जबकि प्रायद्वीपीय नदियाँ वर्षा पर निर्भर होने के कारण मौसमी होती हैं। कथन 2 गलत है क्योंकि प्रायद्वीपीय भारत की नदियाँ अपनी परिपक्व अवस्था (Mature Stage) में हैं, जिनके घाट उथले और चौड़े होते हैं तथा वे विसर्प या अत्यधिक मार्ग परिवर्तन नहीं करतीं, बल्कि अपने कठोर बेसिन में बहती हैं। कथन 3 सही है; कोसी नदी एक पूर्ववर्ती नदी है जो मार्ग बदलने के लिए जानी जाती है। कथन 4 भी सही है; गोदावरी प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है। इस विषय पर अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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