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जेट स्ट्रीम (Jet Stream) और ऊपरी क्षोभमंडलीय परिसंचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Subtropical Westerly Jet Stream) शीतकाल में हिमालय के उत्तर में प्रवाहित होती है, लेकिन ग्रीष्मकाल आते ही तिब्बती पठार के तापीय प्रभाव के कारण यह हिमालय के दक्षिण में विस्थापित हो जाती है।
- 2. उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Tropical Easterly Jet Stream) ग्रीष्मकाल में लगभग 9 से 14 किलोमीटर की ऊँचाई पर अफ्रीका और प्रायद्वीपीय भारत के ऊपर पूर्व से पश्चिम की ओर प्रवाहित होती है, जो दक्षिण-पश्चिमी मानसून को स्थायित्व प्रदान करती है।
- 3. 'रॉसबी तरंगें' (Rossby Waves) पृथ्वी के घूर्णन और कोरिolis बल के प्रभाव से ऊपरी क्षोभमंडल में वायुमंडलीय दाब पेटियों के बड़े पैमाने पर तरंगनुमा विचलन को दर्शाती हैं, जो मौसम प्रणालियों के संचलन को नियंत्रित करती हैं।
- 4. ध्रुवीय वाताग्र जेट स्ट्रीम (Polar Front Jet Stream) ठंडी ध्रुवीय वायु और गर्म मध्य-अक्षांशीय वायु के तापमान प्रवणता के सहारे विकसित होती है, और यह शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों (Mid-latitude Cyclones) के मार्ग एवं तीव्रता को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि शीतकाल में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम तिब्बती पठार के दक्षिण में प्रवाहित होती है, जबकि ग्रीष्मकाल में यह पठार के उत्तर में विस्थापित हो जाती है। अन्य सभी कथन सही हैं। जेट स्ट्रीम और वायुमंडलीय परिसंचरण के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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भारत के भौगोलिक विस्तार, अक्षांशीय-देशांतरीय स्थिति और सीमावर्ती बिंदुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत की मुख्य भूमि का अक्षांशीय विस्तार 8°4' उत्तर से 37°6' उत्तर तथा देशांतरीय विस्तार 68°7' पूर्व से 97°25' पूर्व के मध्य है, जिसके कारण देश के सबसे पूर्वी और पश्चिमी छोर (अरुणाचल प्रदेश और गुजरात) के स्थानीय समय में लगभग 2 घंटे (116 मिनट) का वास्तविक देशांतरीय अंतर पाया जाता है।
2. भारत का सबसे उत्तरी बिंदु इंदिरा कॉल (Indira Col) लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश में काराकोरम श्रेणी पर स्थित है, जबकि मुख्य भूमि का सबसे दक्षिणी छोर कन्याकुमारी (केप कोमोरिन) है, और संपूर्ण देश का सबसे सुदूर दक्षिणी बिंदु इंदिरा पॉइंट (पिकमेल पॉइंट) अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के ग्रेट निकोबार में स्थित है जो 6°45' उत्तर अक्षांश पर है।
3. भारत की स्थलीय सीमा की कुल लंबाई लगभग 15,106.7 किलोमीटर है, जो उत्तर-पश्चिम, उत्तर और उत्तर-पूर्व में सात देशों (पाकिस्तान, अफ़गानिस्तान, चीन, नेपाल, भूटान, म्यांमार और बांग्लादेश) से लगती है, जिसमें सबसे लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा बांग्लादेश के साथ और सबसे छोटी सीमा अफ़गानिस्तान के साथ साझा होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत की मुख्य भूमि की तटीय रेखा (द्वीप समूहों को छोड़कर) लगभग 6,100 किलोमीटर लंबी है, जबकि लक्षद्वीप और अंडमान-निकोबार द्वीप समूह के तटों को शामिल करने पर कुल तटीय लंबाई 7,516.6 किलोमीटर हो जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों—पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल—की उत्पत्ति, वर्गीकरण और विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. एंडीज और रॉकीज जैसी पर्वतमालाएँ 'वलित पर्वत' (Fold Mountains) के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जो महाद्वीपीय-महासागरीय तथा महाद्वीपीय-महाद्वीपीय अभिसारी प्लेट किनारों पर संपीडन बलों (Compressional Forces) के कारण अवसाद के मुड़ने से बनी हैं।
2. 'तिब्बत का पठार' (Tibetan Plateau) एक अंतःप्रतीय (Intermontane) पठार है, जो भारतीय और यूरेशियन प्लेटों के अभिसरण के परिणामस्वरूप क्षेत्रीय उत्थान के कारण निर्मित हुआ है और यह विश्व का सबसे ऊंचा तथा बड़ा पठार है।
3. 'सहारा मरुस्थल' (Sahara Desert) और 'ऑस्ट्रेलियाई मरुस्थल' मुख्य रूप से उपोष्ण उच्च वायुदाब पेटियों (Subtropical High-Pressure Belts) के अंतर्गत आने वाले अवतलन (Subsidence) और व्यापारिक पवनों के महाद्वीपीय प्रभाव के कारण विकसित हुए उष्णकटिबंधीय मरुस्थल हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार अटाकामा मरुस्थल (Atacama Desert) पृथ्वी के सबसे शुष्क स्थानों में से एक है, जो दक्षिण अमेरिका में स्थित है और इसके निर्माण का मुख्य कारण हंबोल्ट (पेरू) ठंडी महासागरीय धारा तथा एंडीज पर्वतमाला का वृष्टिछाया (Rain Shadow) प्रभाव है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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हमारे सौर मंडल और ब्रह्माण्ड की संरचना, ग्रहों की गतिकी तथा खगोलीय पिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'कैपरनिकس के हेलियोसेंट्रिक सिद्धांत' (Heliocentric Model) के अनुसार सौर मंडल का केंद्र सूर्य है, जिसके चारों ओर पृथ्वी सहित सभी ग्रह दीर्घवृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते हैं, और इस मॉडल की पुष्टि बाद में जोहान्स केप्लर के ग्रहों की गति के नियमों द्वारा की गई।
2. क्षुद्रग्रह पेटी (Asteroid Belt) मुख्य रूप से मंगल और बृहस्पति ग्रह की कक्षाओं के मध्य स्थित है, और इसमें पाए जाने वाले सबसे बड़े खगोलीय पिंड 'सेरेस' (Ceres) को अंतर्राष्ट्रीय खगोलीय संघ (IAU) द्वारा बौने ग्रह (Dwarf Planet) के रूप में वर्गीकृत किया गया है।
3. 'ऑर्ट क्लाउड' (Oort Cloud) सौर मंडल की सबसे बाहरी सीमा पर स्थित बर्फीले खगोलीय पिंडों का एक गोलाकार आवरण है, जिसे दीर्घकालिक (Long-period) धूमकेतुओं (Comets) का मुख्य स्रोत माना जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार हमारे सौर मंडल के सभी बाह्य ग्रह (Outer/Jovian Planets जैसे बृहस्पति, शनि, अरुण और वरुण) मुख्य रूप से गैसीय या बर्फीले दिग्गजों (Gas or Ice Giants) के रूप में जाने जाते हैं और इन सभी के चारों ओर वलय प्रणालियाँ (Ring Systems) पाई जाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, भूकंपीय तरंगों के संचरण और चट्टानों के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'गुटेनबर्ग असंभाव्यता' (Gutenberg Discontinuity) पृथ्वी के मेंटल (Mantle) और क्रोड (Core) की सीमा पर स्थित है, जहाँ प्राथमिक (P) भूकंपीय तरंगों की गति में अचानक भारी गिरावट आती है और द्वितीयक (S) तरंगें पूरी तरह से लुप्त (Absorb) हो जाती हैं।
2. रूपांतरित या कायांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) अत्यधिक ताप, दाब और रासायनिक रूप से सक्रिय तरल पदार्थों के प्रभाव से अपने मूल रूप को बदल लेती हैं, उदाहरण के लिए 'चूना पत्थर' (Limestone) के कायांतरण से 'संगमरमर' (Marble) और 'शेल' (Shale) के कायांतरण से 'स्लेट' (Slate) का निर्माण होता है।
3. पृथ्वी की पपड़ी (Crust) में सर्वाधिक मात्रा में पाया जाने वाला धातु तत्व 'लोहा' (Iron) है, जबकि संपूर्ण पृथ्वी के कुल द्रव्यमान में सर्वाधिक प्रचुर मात्रा 'ऑक्सीजन' और 'सिलिकॉन' तत्त्वों की होती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी की ऊपरी पर्पटी (Continental Crust) का औसत घनत्व लगभग 2.7 g/cm³ होता है और यह मुख्य रूप से 'सिलिका और एल्युमिनियम' (Sial) से बनी होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों—पर्वतों, पठारों, मैदानों और मरुस्थलों—की उत्पत्ति, प्रकार और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'रॉकीज़', 'एंडिज' और 'अल्प्स' पर्वतमालाएँ नवीन वलित (Fold) पर्वतों के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, जिनका निर्माण विवर्तनिक प्लेटों के अभिसरण के फलस्वरूप संपीडन बलों के कारण हुआ है, जबकि भारत की 'अरावली' पर्वतमाला दुनिया की सबसे प्राचीन वलित पर्वत प्रणालियों में से एक है जो वर्तमान में अवशिष्ट (Residual) पर्वत का प्रतिनिधित्व करती है।
2. 'तिब्बत का पठार' और 'कोलोरैडो का पठार' अंतर्पर्वतीय पठार (Intermontane Plateaus) के प्रमुख उदाहरण हैं, जो चारों तरफ से ऊँची पर्वत श्रेणियों से घिरे होते हैं तथा इनका निर्माण विवर्तनिक हलचलों और भूपर्पटी के उत्थान से हुआ है।
3. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'आटाकामा मरुस्थल' दुनिया के सबसे शुष्क मरुस्थलों में से एक है, जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित है और इसकी अत्यधिक शुष्कता का मुख्य कारण प्रशांत महासागर की ठंडी 'हम्बोल्ट जलधारा' (Peru Current) का प्रभाव तथा वृष्टिछाया (Rain Shadow) प्रभाव है।
4. 'पामीर का पठार', जिसे 'विश्व की छत' (Roof of the World) कहा जाता है, एक लावा पठार (Volcanic Plateau) का क्लासिक उदाहरण है, जिसका निर्माण विशाल बेसॉल्टिक लावा के दरारी उद्गार (Fissure Eruption) के कारण हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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