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सुपरकंडक्टर की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
इसका प्रतिरोध शून्य हो जाता है।
Related Questions
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विलयन के अणुसंख्यक गुणधर्म (Colligative properties) और रासायनिक अभिक्रियाओं में उत्प्रेरण (Catalysis) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर वाष्प दाब में होने वाला अपेक्षिक अवनमन विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह एक अणुसंख्यक गुणधर्म है जो विलेय के कणों की प्रकृति पर निर्भर करता है, न कि उनकी संख्या पर।
2. क्वथनांक में उन्नयन ($\Delta T_b$) और हिमांक में अवनमन ($\Delta T_f$) दोनों ही molal सांद्रता (मोललता) के सीधे आनुपातिक होते हैं, तथा इनके आनुपातिक स्थिरांक क्रमशः मोलल उन्नयन स्थिरांक ($K_b$) और मोलल अवनमन स्थिरांक ($K_f$) कहलाते हैं, जो केवल विलायक की प्रकृति पर निर्भर करते हैं।
3. समांगी उत्प्रेरण (Homogeneous catalysis) में उत्प्रेरक और अभिकारकों की भौतिक अवस्था (phase) समान होती है, जैसे सींबर प्रक्रिया में सल्फर डाइऑक्साइड का सल्फर ट्राइऑक्साइड में ऑक्सीकरण, जबकि विषमांगी उत्प्रेरण में उत्प्रेरक और अभिकारक भिन्न कलाओं में होते हैं।
4. एन्जाइम उत्प्रेरण (Enzyme catalysis) अत्यधिक विशिष्ट और प्रभावी होता है, तथा इसकी कार्यप्रणाली 'ताला-चाबी' मॉडल (Lock and key model) या प्रेरित फिट मॉडल पर आधारित होती है, जिसमें सक्रिय ऊर्जा (Activation energy) का मान उत्प्रेरक की उपस्थिति में बढ़ जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विद्युत चुंबकीय प्रेरण (Electromagnetic Induction) और प्रत्यावर्ती धारा (Alternating Current) की जटिल परिघटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैराडे के विद्युत चुंबकीय प्रेरण के नियम के अनुसार, किसी बंद कुंडली से जुड़े चुंबकीय फ्लक्स में परिवर्तन की दर उस कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल (EMF) के परिमाण के समानुपाती होती है, और लेंस का नियम (Lenz's law) ऊर्जा संरक्षण के सिद्धांत का पालन करते हुए प्रेरित धारा की दिशा को इस प्रकार निर्धारित करता है कि वह उस कारण का विरोध करती है जिससे वह स्वयं उत्पन्न होती है।
2. 'स्वप्रेरण' (Self-induction) किसी कुंडली का वह गुण है जिसके कारण वह अपने ही भीतर प्रवाहित होने वाली धारा के परिवर्तन का विरोध करती है, और इसका एसआई मात्रक 'हेनरी' (Henry) है, जो कि वेबर प्रति ऐम्पियर के तुल्य होता है।
3. एक आदर्श ट्रांसफॉर्मर में प्राथमिक और द्वितीयक कुंडलियों के फेरों की संख्या का अनुपात वोल्टेज को परिवर्तित करता है, और यदि किसी ट्रांसफॉर्मर में ऊर्जा हानि पूरी तरह शून्य मान ली जाए, तो द्वितीयक कुंडली से प्राप्त निर्गत शक्ति (Output power) प्राथमिक कुंडली को दी गई निवेश शक्ति (Input power) से अधिक हो जाती है ताकि धारा का मान बढ़ सके।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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प्रत्यास्थ संघट्ट (Elastic Collision) और ऊर्जा-संवेग संरक्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. द्विविमीय या एकविमीय पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट में न केवल निकाय का कुल रैखिक संवेग संरक्षित रहता है, बल्कि संघट्ट के दौरान और उसके पश्चात कुल गतिज ऊर्जा (Total Kinetic Energy) भी पूर्ण रूप से संरक्षित रहती है, और इस प्रक्रिया में यांत्रिक ऊर्जा का क्षय ऊष्मा, ध्वनि या विरूपण के रूप में नहीं होता है।
2. जब समान द्रव्यमान का एक गतिशील पिंड किसी अन्य स्थिर पिंड के साथ आमने-सामने का पूर्णतः प्रत्यास्थ संघट्ट करता है, तो संघट्ट के पश्चात पहला पिंड अपनी गति पूरी तरह से खो देता है और रुक जाता है, जबकि दूसरा पिंड पहले पिंड के प्रारंभिक वेग से आगे बढ़ने लगता है (अर्थात वेगों का पूर्ण आदान-प्रदान होता है)।
3. यदि संघट्ट करने वाले दोनों पिंडों के द्रव्यमान असमान हैं और उनमें से एक अत्यधिक भारी तथा दूसरा अत्यंत हल्का है, तो भारी पिंड के साथ संघट्ट के पश्चात हल्के पिंड की अंतिम चाल भारी पिंड की प्रारंभिक चाल की लगभग आधी हो जाती है, चाहे संघट्ट की प्रकृति कुछ भी हो।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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कृत्रिम उपग्रहों की कक्षीय गति और गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में परिक्रमा कर रहे उपग्रह का कोणीय संवेग (Angular momentum) पृथ्वी के केंद्र के सापेक्ष संरक्षित रहता है, क्योंकि पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा लगाया गया बल आघूर्ण (Torque) शून्य होता है, जिसके कारण उपग्रह के प्रतिषेध (Apsides) पर क्षेत्रीय चाल अचर रहती है।
2. भू-तुल्यकालिक उपग्रह (Geosynchronous satellite) का आवर्त काल पृथ्वी के अपने अक्ष पर घूर्णन काल के ठीक बराबर होता है, किंतु यह अनिवार्य नहीं है कि इसकी कक्षा पूर्णतः वृत्ताकार हो और यह विषुवत वृत्त (Equator) के ठीक तल में स्थित हो।
3. जब कोई उपग्रह अपनी दीर्घवृत्ताकार कक्षा के पेरिजी (Perigee) से अपोजी (Apogee) की ओर गति करता है, तो पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के विरुद्ध कार्य होने के कारण उसकी गतिज ऊर्जा घटती है और स्थितिज ऊर्जा बढ़ती है, किंतु कुल यांत्रिक ऊर्जा (Total mechanical energy) अपरिवर्तित रहती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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अनुदैर्ध्य तरंगों (Longitudinal waves) और अनुप्रस्थ तरंगों (Transverse waves) की प्रकृति तथा ध्वनि संचरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ध्वनि तरंगें वायु में अनुदैर्ध्य तरंगों के रूप में संचरित होती हैं, जिसमें माध्यम के कण तरंग संचरण की दिशा के समांतर संपीड़न (Compression) और विरलन (Rarefaction) क्षेत्रों का निर्माण करते हैं, और इनमें ध्रुवण (Polarization) की परिघटना नहीं देखी जा सकती है।
2. किसी ठोस माध्यम में ध्वनि की चाल उस माध्यम के यंग प्रत्यास्थता गुणांक (Young's modulus) और उसके घनत्व के वर्गमूल के सीधे समानुपाती होती है, जिसके कारण ठोस पदार्थों में ध्वनि की चाल गैसों की तुलना में काफी अधिक होती है।
3. जब कोई ध्वनि तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है, तो उसकी आवृत्ति (Frequency) और तरंगदैर्ध्य दोनों बदल जाती हैं, जबकि उसका वेग अपरिवर्तित रहता है क्योंकि वेग माध्यम की भौतिक अवस्था पर निर्भर करता है।
4. लाप्लास (Laplace) द्वारा न्यूटन के ध्वनि की चाल के सूत्र में किए गए संशोधन के अनुसार, वायु में ध्वनि का संचरण एक समतापीय (Isothermal) प्रक्रिया के बजाय एक रुद्धोष्म (Adiabatic) प्रक्रिया है, क्योंकि संपीड़न और विरलन की प्रक्रिया अत्यंत तीव्र गति से होती है और ऊष्मा का आदान-प्रदान संभव नहीं होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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