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Geography
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महासागरीय उच्चावच, ज्वार-भाटा और प्रमुख जलसंधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. महासागरीय मग्नतट (Continental Shelf) महाद्वीपों का डूबा हुआ वह विस्तारित भाग होता है, जिसकी औसत प्रवणता अत्यंत कम होती है और यह क्षेत्र विश्व के सबसे समृद्ध मतस्यन (Fishing) क्षेत्रों के रूप में विकसित होता है क्योंकि यहाँ सूर्य का प्रकाश पर्याप्त मात्रा में पहुँचता है।
- 2. जब सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी अंतरिक्ष में एक समकोण (Right Angle) की स्थिति में होते हैं, तब दोनों के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के प्रभाव को आंशिक रूप से संतुलित कर देते हैं, जिससे 'लघु ज्वार' (Neap Tide) की उत्पत्ति होती है।
- 3. 'बेरिंग जलसंधि' (Bering Strait) अलास्का और रूस के बीच स्थित है, जो आर्कटिक महासागर को बेरिंग सागर (प्रशांत महासागर) से जोड़ती है और इसी जलसंधि से अंतर्राष्ट्रीय तिथि रेखा गुजरती है।
- 4. अपोजी (Apogee) की स्थिति में जब चंद्रमा पृथ्वी से अधिकतम दूरी पर होता है, तब चंद्रमा का ज्वारोत्पादक बल न्यूनतम होता है, जिससे इस स्थिति में आने वाले ज्वार को 'दीर्घ ज्वार' कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि महासागरीय मग्नतट महाद्वीपों का मंद ढलान वाला डूबा हुआ भाग होता है, जहाँ सूर्य का प्रकाश पहुँचने के कारण प्लवक (Plankton) पनपते हैं जो मछलियों का मुख्य आहार हैं। कथन 2 सही है क्योंकि समकोण की स्थिति (चतुर्थी के दिन) में सूर्य और चंद्रमा के गुरुत्वाकर्षण बल एक-दूसरे के विपरीत दिशा में कार्य करते हैं, जिससे लघु ज्वार आता है। कथन 3 सही है क्योंकि बेरिंग जलसंधि एशिया और उत्तरी अमेरिका को अलग करती है तथा आर्कटिक और प्रशांत महासागर को जोड़ती है। कथन 4 गलत है क्योंकि अपोजी (अपभू) की स्थिति में चंद्रमा के पृथ्वी से दूर होने के कारण न्यूनतम ज्वार ('निम्न ज्वार') उत्पन्न होता है, न कि दीर्घ ज्वार। ज्वार-भाटा के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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हमारे सौर मंडल के खगोलीय पिंडों, उनकी कक्षीय गति, आंतरिक संरचना और लघु पिंडों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'शनि' (Saturn) का सबसे बड़ा प्राकृतिक उपग्रह 'टाइटन' (Titan) सौर मंडल का एकमात्र ऐसा उपग्रह है जिसका अपना एक घना वायुमंडल है, जिसमें मुख्य रूप से नाइट्रोजन गैस और मीथेन पाई जाती है।
2. 'बृहस्पति' (Jupiter) के पास अपनी धुरी पर घूर्णन करने का काल सौर मंडल के सभी ग्रहों में सबसे कम है, जो लगभग 10 घंटे से भी कम है, जिसके कारण यह विषुवत रेखा पर थोड़ा चपटा और ध्रुवों पर उभरा हुआ दिखाई देता है।
3. 'एस्ट्रॉइड बेल्ट' (Asteroid Belt) में सूर्य की परिक्रमा करने वाला 'वेस्का' (Vesta) एकमात्र ऐसा क्षुद्रग्रह है जिसे कभी-कभी बिना किसी दूरबीन के नग्न आँखों से पृथ्वी से देखा जा सकता है, तथा यह मुख्य पेटी का दूसरा सबसे भारी पिंड है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार जब कोई अंतरिक्ष चट्टान (Meteoroid) पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करती है और घर्षण के कारण जलकर चमकने लगती है, तो उसे 'उल्का' (Meteor) कहा जाता है, और यदि वह पूरी तरह जलने से बचकर पृथ्वी की सतह पर गिरती है, तो उसे 'उल्कापिंड' (Meteorite) कहा जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों (कोयला, पेट्रोलियम, परमाणु खनिज) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में पाए जाने वाले कुल कोयले का लगभग 98% हिस्सा गोंडवाना क्रम (Gondwana Coal) की चट्टानों से प्राप्त होता है, जो मुख्य रूप से दामोदर, महानदी, सोन और गोदावरी नदी घाटियों में संकेंद्रित हैं और यह उच्च श्रेणी का बिटुमिनस कोयला है जिसमें सल्फर की मात्रा बहुत कम होती है।
2. 'मुंबई हाई' (Mumbai High) भारत का सबसे बड़ा अपतटीय (Offshore) पेट्रोलियम क्षेत्र है, जो खंभात की खाड़ी के शेल्फ क्षेत्र में स्थित है और यहाँ पेट्रोलियम का उत्पादन मुख्य रूप से मियोसीन (Miocene) युग के चूना पत्थर के संस्तरों से होता है।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के जनक डॉ. होमी जहांगीर भाभा थे, और देश में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन के लिए आवश्यक 'यूरेनियम' के प्रमुख भंडार झारखंड के सिंहभूम (जादूगोड़ा) तथा आंध्र प्रदेश के तुमलापल्ली क्षेत्र में पाए जाते हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार टर्शरी युगीन कोयला (Tertiary Coal) मुख्य रूप से भारत के पूर्वोत्तर राज्यों (जैसे असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और नागालैंड) में पाया जाता है, जो कम गुणवत्ता वाला और उच्च सल्फर युक्त होता है, तथा इसका अधिकांश भाग लिग्नाइट या निम्न कोटि का बिटुमिनस होता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विश्व का सबसे गहरा महासागरीय गर्त (Trench) कौन सा है?
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भारत में परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम और उसके लिए आवश्यक कच्चे माल (परमाणु खनिजों) के वितरण, उनकी भूवैज्ञानिक संरचना तथा उनसे जुड़े औद्योगिक व ऊर्जा भंडारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में परमाणु ऊर्जा विभाग द्वारा यूरेनियम के उत्खनन के लिए झारखंड के 'जादूगोड़ा' के अतिरिक्त आंध्र प्रदेश के कडप्पा बेसिन में स्थित 'तुಮ್ಮलपल्ले' और 'लम्bapur' क्षेत्रों को देश के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में गिना जाता है, जहाँ यूरेनियम के निक्षेप मुख्य रूप से धारवाड़ क्रम की कायांतरित और डोलोमाइट चट्टानों में पाए जाते हैं।
2. भारत का 'थोरियम' आधारित परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम दुनिया के अन्य देशों की तुलना में अत्यधिक सामरिक महत्व रखता है, क्योंकि देश के पूर्वी और पश्चिमी तटीय मैदानों विशेषकर केरल, तमिलनाडु, ओडिशा और आंध्र प्रदेश की 'मोनाज़ाइट रेत' (Monazite Sand) में थोरियम के अपार भंडार मौजूद हैं।
3. भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का त्रि-चरणीय (Three-stage Nuclear Power Programme) विकास मॉडल डॉ. होमी जहांगीर भाबा द्वारा परिकल्पित किया गया था, जिसके प्रथम चरण में प्राकृतिक यूरेनियम आधारित भारी पानी रिएक्टरों (PHWRs) का उपयोग किया जाता है, द्वितीय चरण में प्लूटोनियम-239 आधारित फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों (FBRs) का संचालन होता है, और अंतिम चरण में थोरियम-यूरेनियम-233 चक्र को अपनाया जाता है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'बोरॉन' और 'बेरिलियम' जैसे मंदक (Moderators) और नियंत्रण छड़ों के रूप में उपयोग होने वाले खनिज पूरी तरह से अनुपलब्ध हैं, जिसके कारण भारत अपने संपूर्ण परमाणु ईंधन चक्र के लिए आयात पर पूर्णतः निर्भर है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना, प्लेट विवर्तनिकी (Plate Tectonics) और भूकंपीय तरंगों के प्रसार के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भूकंप के दौरान उत्पन्न होने वाली 'P-तरंगें' (Primary Waves) अनुदैर्ध्य (Longitudinal) तरंगें होती हैं, जो ध्वनि तरंगों की तरह ठोस, तरल और गैस—तीनों माध्यमों से गुजर सकती हैं, लेकिन तरल माध्यम से गुजरने पर इनकी गति धीमी हो जाती है।
2. 'S-तरंगें' (Secondary Waves) अनुप्रस्थ (Transverse) प्रकृति की होती हैं और ये केवल ठोस माध्यम से ही गुजर सकती हैं, जिसके कारण वैज्ञानिकों को पृथ्वी के बाह्य क्रोड (Outer Core) के तरल होने का ठोस प्रमाण मिला है।
3. अभिक्रमी या अभिसारी प्लेट सीमाओं (Convergent Plate Boundaries) पर उत्पन्न होने वाले भूकंप केवल उथले फोकस (Shallow-focus) वाले होते हैं, और यहाँ कभी भी गहरे फोकस वाले भूकंप दर्ज नहीं किए जाते हैं।
4. सुनामी (Tsunami) लहरें सामान्य समुद्री लहरों से पूरी तरह भिन्न होती हैं, जिनकी तरंगदैर्ध्य (Wavelength) अत्यधिक लंबी और खुले समुद्र में ऊँचाई बहुत कम होती है, लेकिन तटीय क्षेत्रों में उथले पानी के संपर्क में आने पर इनकी ऊँचाई तेजी से बढ़ जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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