BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

Geography
9 views

वायुमंडलीय परिसंचरण, आर्द्रता के प्रकार और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. निरपेक्ष आर्द्रता (Absolute Humidity) वायु के एक निश्चित आयतन में मौजूद जलवाष्प के द्रव्यमान की वास्तविक मात्रा होती है, जो तापमान में परिवर्तन के साथ बदल जाती है क्योंकि तापमान बढ़ने पर वायु का आयतन फैलता है।
  2. 2. 'सहसंबद्ध वर्षा' (Convectional Rainfall) मुख्य रूप से भूमध्यरेखीय क्षेत्रों में प्रतिदिन दोपहर के बाद होने वाली वर्षा है, जिसमें अत्यधिक सूर्यताप के कारण गर्म हवा ऊपर उठती है, ठंडी होती है और कपासी-वर्षी बादलों (Cumulonimbus clouds) का निर्माण कर मूसलाधार वर्षा करती है।
  3. 3. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विकास के लिए समुद्र की सतह का तापमान न्यूनतम 27°C होना आवश्यक है, और Coriolis बल की उपस्थिति अनिवार्य होने के कारण ये चक्रवात भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर (0° से 5° अक्षांश के बीच) सबसे अधिक तीव्रता से उत्पन्न होते हैं।
  4. 4. 'पश्चिमी विक्षोभ' (Western Disturbances) भूमध्य सागर में उत्पन्न होने वाली शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातीय प्रणालियाँ हैं, जिन्हें क्षोभमंडल की ऊपरी परतों में बहने वाली जेट स्ट्रीम द्वारा भारतीय उपमहाद्वीप की ओर खींचा जाता है और यह उत्तर-पश्चिम भारत में रबी फसलों के लिए अत्यंत लाभदायक होती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: निरपेक्ष आर्द्रता प्रति इकाई आयतन में जलवाष्प का वास्तविक भार है (ग्राम प्रति घन मीटर), जो तापमान परिवर्तन के साथ वायु प्रसार या संकुचन के कारण बदलती है। कथन 2 सही है: संवहनी वर्षा (Convectional Rainfall) भूमध्यरेखीय क्षेत्रों की मुख्य विशेषता है जहाँ प्रतिदिन दोपहर बाद कपासी-वर्षी बादलों से गरज और चमक के साथ भारी वर्षा होती है। कथन 3 गलत है: हालांकि 27°C तापमान और Coriolis बल दोनों आवश्यक हैं, किंतु Coriolis बल भूमध्य रेखा (0°) पर शून्य होता है, जिसके कारण भूमध्य रेखा के 0° से 5° अक्षांश के बीच उष्णकटिबंधीय चक्रवातों का निर्माण नहीं होता है। कथन 4 सही है: पश्चिमी विक्षोभ भूमध्यसागरीय क्षेत्र में उत्पन्न होने वाली शीतोष्ण कटिबंधीय प्रणालियाँ हैं जो उपोष्ण कटिबंधीय पछुआ जेट स्ट्रीम के प्रभाव से भारतीय उपमहाद्वीप तक पहुँचती हैं। इस प्रक्रिया में उच्च वायुमंडलीय परिसंचरण और चक्रवात की गतिशीलता महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Share:

Related Questions

→ भारतीय मानसून की उत्पत्ति, वर्षा के वितरण और उसकी क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'अरब सागर शाखा' पश्चिमी घाट से टकराकर भारी वर्षा करती है, जिसके कारण पश्चिमी घाट के पवनविमुखी (Windward) ढालों पर अत्यधिक वर्षा होती है, जबकि वृष्टिछाया (Rain Shadow) क्षेत्र होने के कारण दक्कन के पठार का आंतरिक भाग अपेक्षाकृत शुष्क रहता है। 2. 'अल-निनो' (El Nino) घटना के दौरान प्रशांत महासागर में पूर्वी पेरू के तट पर ठंडे पानी का अपवेलिंग (Upwelling) अत्यधिक प्रबल हो जाता है, जिससे भारतीय उपमहाद्वीप पर दक्षिण-पश्चिम मानसून की वर्षा में सामान्य से अधिक वृद्धि होती है। 3. उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकालीन मानसून) के दौरान भारत के अधिकांश भागों में सूखा रहता है, परंतु तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय क्षेत्रों में इस अवधि में शीतकालीन वर्षा होती है क्योंकि ये हवाएँ बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारतीय मानसून एक मौसमी हवाओं का व्युत्क्रमण (Reversal of Winds) तंत्र है, जो मुख्य रूप से थल और जल के असमान रूप से गर्म होने, अंतः उष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र (ITCZ) के उत्तर की ओर खिसकने और ऊपरी क्षोभमंडल में जेट स्ट्रीम के प्रभाव से संचालित होता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → महासागरीय उच्चावच और प्रमुख जलडमरूमध्यों (Straits) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. महासागरीय नितल का सबसे विस्तृत भाग 'महासागरीय मैदान' (Abyssal Plain) होता है, जो महाद्वीपीय ढाल के ठीक नीचे 3000 से 6000 मीटर की गहराई के बीच फैला हुआ एक अत्यंत समतल और मंद ढाल वाला क्षेत्र है। 2. 'बेरिंग जलसंधि' (Bering Strait) आर्कटिक महासागर को प्रशांत महासागर के बेरिंग सागर से जोड़ती है और यह जलमार्ग एशिया महाद्वीप के साइबेरिया क्षेत्र को उत्तर अमेरिका के अलास्का से अलग करता है। 3. 'सुंडा जलसंधि' (Sunda Strait) जावा सागर को हिंद महासागर से जोड़ती है और यह इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप को जावा द्वीप से अलग करती है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'जिब्राल्टर जलसंधि' (Strait of Gibraltar) भूमध्य सागर को अटलांटिक महासागर से जोड़ती है और इसे 'भूमध्य सागर की कुंजी' भी कहा जाता है, जो यूरोप के स्पेन को अफ्रीका के मोरक्को से अलग करती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पृथ्वी की आंतरिक संरचना, असंबद्धता (Discontinuities) और शैलों के कायांतरण (Metamorphism) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. कॉनराड असंबद्धता (Conrad Discontinuity) ऊपरी क्रस्ट (Upper Crust) और निचली क्रस्ट (Lower Crust) के बीच स्थित होती है, जबकि मोहरोविकिक असंबद्धता (Mohorovičić Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा का निर्धारण करती है। 2. आग्नेय शैलों (Igneous Rocks) में जीवाश्म (Fossils) पूरी तरह से अनुपस्थित होते हैं क्योंकि इनका निर्माण तप्त मैग्मा या लावा के ठंडा होकर जमने से होता है, जिसके अत्यधिक उच्च तापमान के कारण जैविक अवशेष नष्ट हो जाते हैं। 3. कायांतरण (Metamorphism) की प्रक्रिया के दौरान चूना पत्थर (Limestone) का कायांतरण होकर 'क्वार्ट्जाइट' (Quartzite) का निर्माण होता है, जबकि बलुआ पत्थर (Sandstone) के कायांतरण से 'संगमरमर' (Marble) बनता है। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार पृथ्वी के क्रोड (Core) का मुख्य हिस्सा निकल (Nickel) और लोहे (Iron) से बना है, जिसे 'निफे' (Nife) परत कहा जाता है, और यह पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र (Magnetic Field) की उत्पत्ति में प्रमुख भूमिका निभाता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → भारत के खनिज और ऊर्जा संसाधनों की भौगोलिक अवस्थिति एवं उनके वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. भारत का अधिकांश कोयला भंडार 'गोंडवाना क्रम' की चट्टानों से प्राप्त होता है, जिसमें झारखंड का झरिया और पश्चिम बंगाल का रानीगंज क्षेत्र 'कोकिंग कोयला' के प्रमुख उत्पादक हैं, जबकि तृतीयक (Tertiary) काल का लिग्नाइट कोयला मुख्य रूप से तमिलनाडु के नेवेली और राजस्थान के पालाना क्षेत्रों में पाया जाता है। 2. देश में पेट्रोलियम के प्रमुख तटीय (Onshore) भंडार असम (डिगबोई, नहरकटिया), गुजरात (अंकलेश्वर) और राजस्थान (बाड़मेर बेसिन) में स्थित हैं, जबकि अपतटीय (Offshore) क्षेत्रों में मुंबई हाई के अलावा कृष्णा-गोदबारी बेसिन और कावेरी बेसिन में भी हाइड्रोकार्बन के प्रचुर भंडार खोजे गए हैं। 3. भारत में थोरियम के विशाल भंडार 'मोनाज़िट' रेत के रूप में मुख्य रूप से केरल, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय इलाकों में पाए जाते हैं, और भारतीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम का तीसरा चरण पूरी तरह से यूरेनियम को प्रतिस्थापित कर सीधे थोरियम पर आधारित संवर्धित प्रजनक रिएक्टरों (Breeder Reactors) परिकल्पना पर कार्य करता है। 4. यूरेनियम के प्रमुख भंडार झारखंड के सिंहभूम तांबा मेखला के साथ-साथ आंध्र प्रदेश के तुमलापल्ली क्षेत्र में स्थित हैं, जिन्हें दुनिया के सबसे बड़े यूरेनियम भंडारों में से एक माना जाता है, तथा यह कार्बोनेट-समृद्ध चट्टानी संरचनाओं में संचित है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → पृथ्वी के प्रमुख भू-आकृतिक स्वरूपों (पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल) की उत्पत्ति, संरचना और उनकी विशेषताओं के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. विश्व के अधिकांश नवीन वलित पर्वत (Fold Mountains), जैसे हिमालय, आल्प्स और रॉकीज, विवर्तनिक प्लेटों के अभिसारी सीमाओं (Convergent Boundaries) पर महाद्वीपीय-महाद्वीपीय या महासागरीय-महाद्वीपीय टक्कर के परिणामस्वरूप बने हैं और इनमें रूपांतरित व अवसादी चट्टानों की प्रधानता होती है। 2. 'पामीर का पठार' (Pamir Knot) एक अंतर-पर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो त्शियन शान, कुनलुन, काराकोरम और हिंदूकुश पर्वतमालाओं के मध्य स्थित है और इसे 'विश्व की छत' कहा जाता है। 3. 'ग्रेट बेसिन मरुस्थल' (Great Basin Desert) संयुक्त राज्य अमेरिका का एक शीत/शीतोष्ण मरुस्थल है, जो वर्षाछाया क्षेत्र (Rain Shadow Area) के अंतर्गत स्थित होने के कारण एक अंतःप्रवाह बेसिन (Inland Drainage Basin) का निर्माण करता है और यहाँ की अधिकांश नदियाँ महासागर तक नहीं पहुँच पाती हैं। 4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'दक्कन का पठार' एक अंतर-पर्वतीय पठार है जिसका निर्माण पोटाश और चूना पत्थर के अत्यधिक संचयन से हुआ है, और यह लावा प्रवाह से पूरी तरह अछूता क्षेत्र है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.