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Geography
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भारतीय जलवायु, मानसून की उत्पत्ति और वर्षा के स्थानिक वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराकर भारत के पश्चिमी तटीय मैदानों पर भारी वर्षा करती है, किंतु पश्चिमी घाट के वृष्टिछाया क्षेत्र (Rain shadow area) में स्थित होने के कारण दक्कन के पठार का आंतरिक भाग अपेक्षाकृत शुष्क रहता है।
  2. 2. 'अल-नीनो' (El Niño) घटना के दौरान पूर्वी प्रशांत महासागर (पेरू तट के पास) में सतह के तापमान में असामान्य वृद्धि हो जाती है, जो वाकर परिसंचरण (Walker Circulation) को कमजोर कर देती है और भारतीय उपमहाद्वीप में सामान्य मानसून वर्षा को बाधित कर सूखा या कम वर्षा का कारण बनती है।
  3. 3. 'भारतीय मानसून का ब्रेक' (Break in Monsoon) तब होता है जब मानसून गर्त (Monsoon Trough) अपनी सामान्य स्थिति से उत्तर की ओर यानी हिमालय की तलहटी (Foothills) की तरफ खिसक जाता है, जिससे पूर्वोत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में अचानक बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो जाती है जबकि शेष भारत में वर्षा का अस्थायी विराम हो जाता है।
  4. 4. उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकालीन मानसून), जो मुख्य रूप से लौटते हुए मानसून का परिणाम है, भारत के पश्चिमी तट पर स्थित केरल और कर्नाटक के तटीय जिलों में भारी मात्रा में वर्षा करता है, जो वहाँ की कॉफी की फसल के लिए अत्यधिक लाभदायक होती है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि पश्चिमी घाट की भौगोलिक स्थिति के कारण अरब सागर शाखा तट पर भारी वर्षा करती है और इसके पूर्वी हिस्से (वृष्टिछाया क्षेत्र) में वृष्टि कम होती है। कथन 2 सही है क्योंकि अल-नीनो की घटना प्रशांत महासागर में जल के गर्म होने से जुड़ी है जो भारतीय मानसून को कमजोर करती है। कथन 3 सही है क्योंकि मानसून गर्त के हिमालय की तलहटी की ओर खिसकने से देश के अधिकांश हिस्सों में वर्षा रुक जाती है और पूर्वोत्तर में भारी वर्षा होती है। कथन 4 गलत है क्योंकि उत्तर-पूर्वी मानसून (शीतकालीन मानसून) मुख्य रूप से भारत के पूर्वी तट (विशेषकर तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय भागों) में वर्षा करता है, न कि पश्चिमी तट पर (पश्चिमी तट पर वर्षा मुख्य रूप से दक्षिण-पश्चिम मानसून से होती है)। अतः सही विकल्प 'केवल 1, 2 और 3' है।
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