त्वरित लिंक्स
General Science
20 views
त्वरण का मात्रक?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
त्वरण की इकाई।
Related Questions
→
विलयन के अणुसंख्यक गुणों (Colligative properties) और उत्प्रेरण (Catalysis) की क्रियाविधि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी विलायक में अवाष्पशील विलेय मिलाने पर विलयन के वाष्प दाब में होने वाला आपेक्षिक अवनमन (Relative lowering of vapour pressure) विलेय के मोल अंश के बराबर होता है, और यह राउल्ट के नियम द्वारा निर्धारित होता है।
2. 'वांट हॉफ गुणांक' ($i$) का मान यदि किसी वैद्युत अपघट्य के जलीय विलयन में संगुणन (Association) होता है, तो 1 से कम होता है, जबकि पूर्ण वियोजन की स्थिति में यह उत्पन्न होने वाले कुल आयनों की संख्या के बराबर होता है।
3. समांगी और विषमांगी उत्प्रेरण में, उत्प्रेरक रासायनिक अभिक्रिया की सक्रियण ऊर्जा (Activation energy) को बढ़ा देता है, जिससे अभिकारकों के अणुओं को ऊर्जा अवरोध पार करने में आसानी होती है और अभिक्रिया की दर तीव्र हो जाती है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
रासायनिक बंधन, अम्ल, क्षार और लवण (Acids, Bases and Salts) के वैचारिक परिप्रेक्ष्य में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लुईस अम्ल (Lewis acid) वे रासायनिक स्पीशीज होती हैं जो इलेक्ट्रॉन युग्म (Electron pair) को ग्रहण कर सकती हैं, जबकि लुईस क्षार (Lewis base) इलेक्ट्रॉन युग्म का त्याग कर सकते हैं, जिसके फलस्वरूप इनके मध्य उपसहसंयोजक बंध (Coordinate covalent bond) का निर्माण होता है।
2. ब्रॉन्स्टेड-लोरी संकल्पना के अनुसार, किसी अम्ल का 'संयुग्मी क्षार' (Conjugate base) उस अम्ल द्वारा एक प्रोटॉन ($H^+$) त्यागने के पश्चात शेष बची हुई स्पीशीज होती है, और एक दुर्बल अम्ल का संयुग्मी क्षार हमेशा एक प्रबल क्षार होता है।
3. बहुprotic अम्लों के जलीय विलयन में क्रमिक आयनन स्थिरांकों ($K_{a1}, K_{a2}, K_{a3}$) के मानों में सामान्यतः निरंतर ह्रास ($K_{a1} > K_{a2} > K_{a3}$) देखा जाता है, जिसका मुख्य कारण ऋणावेशित आयन से धनात्मक प्रोटॉन को अलग करने के लिए अधिक स्थिर वैद्युत आकर्षण बल के विरुद्ध अतिरिक्त ऊर्जा की आवश्यकता होना है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
धातुओं के निष्कर्षण, मिश्रधातुओं के संगठन और उनके विशिष्ट रासायनिक गुणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कॉपर पाइराइट्स ($CuFeS_2$) से तांबे के निष्कर्षण के दौरान 'प्रतापन' (Bessemerisation) प्रक्रिया में पिघले हुए मैटे (Matte) को सिलिका की अस्तर वाली परिवर्तनीय भट्टी में हवा के साथ उड़ाया जाता है, जिससे अंततः 'फोफोलेदार तांबा' (Blister copper) प्राप्त होता है, जो सल्फर डाइऑक्साइड गैस के बुलबुले बाहर निकलने के कारण छालेदार हो जाता है।
2. 'पीतल' (Brass) तांबे और जस्ते की एक मिश्रधातु है, जबकि 'कांस्य' (Bronze) तांबे और टिन की मिश्रधातु है; इसके विपरीत, 'जर्मन सिल्वर' में चांदी की उपस्थिति अनिवार्य रूप से 5% से 10% तक होती है जो इसके संक्षारण प्रतिरोध को बढ़ाती है।
3. क्षार धातुएँ (जैसे सोडियम और पोटेशियम) और क्षारीय मृदा धातुएँ अत्यधिक प्रतिक्रियाशील होती हैं, और इनमें से कुछ को जल के साथ तीव्र अभिक्रिया के दौरान हाइड्रोजन गैस मुक्त करने के कारण मिट्टी के तेल (Kerosene) के भीतर संग्रहीत किया जाता है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
→
मानव अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अग्र पीयूष ग्रंथि (Anterior Pituitary) द्वारा स्रावित प्रोलैक्टिन (Prolactin) हॉर्मोन का मुख्य कार्य दुग्ध उत्पादन को प्रेरित करना है, जबकि ऑक्सीटोसिन (Oxytocin) हॉर्मोन जो कि पश्च पीयूष ग्रंथि से स्रावित होता है, दुग्ध के निष्कासन (Milk Ejection Reflex) को नियंत्रित करता है।
2. अधिवृक्क वल्कल (Adrenal Cortex) के ग्लोमेरुलोसा क्षेत्र से 'एल्डोस्टेरोन' हॉर्मोन का स्रावण होता है, जो वृक्क नलिकाओं में सोडियम और जल के पुनअवशोषण को बढ़ाता है तथा पोटेशियम और हाइड्रोजन आयनों के उत्सर्जन को नियंत्रित करता है।
3. अग्न्याशय की लैंगरहैंस की द्वीपिकाओं (Islets of Langerhans) की अल्फा कोशिकाएँ 'ग्लूकागन' हॉर्मोन का स्रावण करती हैं, जो ग्लाइकोजेनोलिसिस (Glycogenolysis) और ग्लूकोनियोजेनेसिस को प्रेरित करके रक्त में शर्करा के स्तर को कम करने का कार्य करती हैं।
4. थायराइड ग्रंथि द्वारा स्रावित 'कैल्सीटोनिन' एक हाइपोकैल्सीमिक हॉर्मोन है, जो रक्त में कैल्शियम और फॉस्फेट आयनों के स्तर को कम करता है, इसके विपरीत पैराथाइराइड हॉर्मोन (PTH) एक हाइपरकैल्सीमिक हॉर्मोन है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
कृत्रिम उपग्रहों की गति और गुरुत्वाकर्षण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. किसी दीर्घवृत्ताकार कक्षा में चक्कर लगा रहे उपग्रह की कुल ऊर्जा (यांत्रिक ऊर्जा) ऋणात्मक होती है, जो यह दर्शाती है कि उपग्रह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र से बंधा हुआ है, और दीर्घवृक्ष के अपोजी (Apogee) पर उपग्रह की गतिज ऊर्जा न्यूनतम तथा स्थितिज ऊर्जा अधिकतम होती है।
2. भू-स्थिर उपग्रह (Geostationary satellite) की कक्षीय चाल लगभग 3.07 किमी/सेकंड होती है और यह पृथ्वी की सतह से लगभग 36,000 किमी की ऊँचाई पर पूर्व से पश्चिम की दिशा में पृथ्वी की परिक्रमा करता है।
3. जब कोई उपग्रह पृथ्वी के वायुमंडल में पुनः प्रवेश करता है, तो वायुमंडलीय घर्षण के कारण अत्यधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जिसका मुख्य कारण उपग्रह की उच्च गतिज ऊर्जा का तापीय ऊर्जा में रूपांतरण है।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.