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Geography
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भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति तथा उसके प्रसरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन 'मानसून प्रस्फोट' (Monsoon Burst) के रूप में होता है, जिसके तहत केरल तट पर अचानक भारी वर्षा शुरू हो जाती है और यह घटना मुख्य रूप से उत्तर-पश्चिम भारत में ग्रीष्मकालीन अत्यधिक तापन के कारण विकसित होने वाले तीव्र निम्न वायुदाब से जुड़ी होती है।
  2. 2. मानसून की अरब सागर शाखा पश्चिमी घाट से टकराने के बाद देश के आंतरिक भागों की ओर बढ़ती है, जबकि इसकी बंगाल की खाड़ी शाखा मेघालय के पठार पर स्थित खासी पहाड़ियों (खासकर मौसिनराम और चेरापूंजी) की कीप जैसी (Funnel-shaped) स्थलाकृति के कारण विश्व की सर्वाधिक औसत वार्षिक वर्षा प्राप्त करती है।
  3. 3. 'एल नीनो' (El Nino) की घटना प्रशांत महासागर में पेरू के तट पर गर्म जलधारा के रूप में प्रकट होती है, जो भारतीय ग्रीष्मकालीन मानसून के दौरान वायुदाब प्रतिरूप को बदलकर भारत में मानसून वर्षा को सुदृढ़ और अत्यधिक बढ़ाने का कार्य करती है।
  4. 4. मानसून का निवर्तन (Retreating Monsoon) या उत्तर-पूर्वी मानसून मुख्य रूप से सितंबर के अंत से शुरू होता है, जिसके दौरान सूर्य के दक्षिणायन होने से उत्तर-पश्चिम भारत में उच्च वायुदाब विकसित हो जाता है और हवाएँ थल से समुद्र की ओर (स्थलीय पवनें) बहने लगती हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: दक्षिण-पश्चिम मानसून का आगमन जून के पहले सप्ताह में केरल तट पर 'मानसून प्रस्फोट' (Monsoon Burst) के साथ होता है, जो उत्तर-पश्चिम भारत के अत्यधिक गर्म होने और वहाँ तीव्र निम्न दाब (Low Pressure) के विकास के कारण हिंद महासागर से आने वाली पवनों को आकर्षित करने से होता है। कथन 2 सही है: बंगाल की खाड़ी की शाखा मेघालय की खासी पहाड़ियों की कीप जैसी स्थलाकृति (Funnel-shaped topography) में फंसकर मूसलाधार वर्षा करती है, जिससे मौसिनराम और चेरापूंजी दुनिया में सबसे अधिक औसत वार्षिक वर्षा वाले स्थान बनते हैं। कथन 3 गलत है: 'एल नीनो' (El Nino) दक्षिण अमेरिकी तट पर पेरू के पास ठंडी जलधारा के स्थान पर गर्म जलधारा के प्रकट होने की घटना है, जो भारतीय मानसून के दौरान वायुदाब को प्रतिकूल रूप से प्रभावित करती है और भारत में सूखे या कमजोर मानसून का कारण बनती है। कथन 4 सही है: सितंबर के अंत से सूर्य के दक्षिणायन होने के साथ ही उत्तर-पश्चिम भारत में उच्च वायुदाब बनने लगता है, जिससे हवाएँ स्थल से समुद्र की ओर (उत्तर-पूर्वी मानसून) बहने लगती हैं और इसे मानसून का निवर्तन कहा जाता है।
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