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Geography
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पृथ्वी के प्रमुख भू-आकारों, पर्वतों, पठारों और मरुस्थलों की उत्पत्ति तथा उनकी भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण अमेरिका में स्थित 'एंडीज पर्वतमाला' (Andes Mountains) विश्व की सबसे लंबी वलित पर्वत श्रृंखला है, जिसका निर्माण नाज़का प्लेट और दक्षिण अमेरिकी प्लेट के अभिसरण (Convergence) के फलस्वरूप हुआ है।
- 2. 'तिब्बत का पठार' (Tibetan Plateau) एक अंतःपर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) का उत्कृष्ट उदाहरण है, जो हिमालय और कुतुन शैन पर्वतश्रेणियों के बीच स्थित है और इसे 'विश्व की छत' कहा जाता है।
- 3. अटाकामा मरुस्थल दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित एक अति शुष्क मरुस्थल है, जिसके अत्यधिक शुष्क होने का प्रमुख कारण वहाँ बहने वाली ठंडी 'हम्बोल्ट धारा' (पेरू धारा) और अपतटीय हवाओं का चलना है।
- 4. 'कोलोरैडो का पठार' एक अंतःपर्वतीय पठार का उदाहरण है, जिससे होकर प्रसिद्ध कोलोरैडो नदी प्रवाहित होती है और उसने अपनी अपरदन क्रिया द्वारा इस पठार को काटकर 'ग्रैंड कैनियन' (Grand Canyon) का निर्माण किया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि एंडीज पर्वतमाला विश्व की सबसे लंबी वलित पर्वत श्रृंखला है और इसकी उत्पत्ति महाद्वीपीय-महाद्वीपीय/महासागरीय अभिसरण के अंतर्गत नाज़का और दक्षिण अमेरिकी प्लेट के टकराने से हुई है। कथन 2 सही है क्योंकि तिब्बत का पठार दुनिया का सबसे ऊंचा और सबसे बड़ा अंतःपर्वतीय पठार है जो हिमालय और कुतुन शैन के मध्य स्थित है। कथन 3 सही है क्योंकि अटाकामा मरुस्थल पृथ्वी के सबसे सूखे स्थानों में से एक है और यहाँ हम्बोल्ट ठंडी जलधारा तथा वृष्टिछाया प्रभाव मुख्य कारण हैं। कथन 4 गलत है क्योंकि कोलोरैडो का पठार एक 'गुंबदाकार पठार' (Dome Plateau) या लावा पठार का प्रकार है, न कि अंतःपर्वतीय पठार।
Related Questions
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भारत में सिंचाई, कृषि पद्धतियों और प्रमुख फसलों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में 'श्री विधि' (System of Rice Intensification - SRI) पद्धति का संबंध मुख्य रूप से धान की खेती से है, जिसमें कम पानी के उपयोग, पौधों के बीच अधिक दूरी रखने और जैविक खादों के प्रयोग पर जोर दिया जाता है, जिससे जल की बचत और उत्पादन में वृद्धि होती है।
2. 'शून्य जुताई कृषि' (Zero-Tillage Farming) या न्यूनतम जुताई पद्धति में पिछली फसल के अवशेषों को खेत में ही छोड़ दिया जाता है, जिससे मृदा के कटाव में कमी आती है, नमी संरक्षित रहती है और ट्रैक्टर के उपयोग से कार्बन उत्सर्जन तथा ईंधन की खपत घटती है।
3. 'ड्रिप सिंचाई' (Drip Irrigation) प्रणाली सतह पर होने वाले वाष्पीकरण और सतही अपवाह (Runoff) को पूरी तरह से समाप्त कर देती है, जिससे जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) लगभग 90 से 95 प्रतिशत तक बढ़ जाती है, किंतु यह प्रणाली केवल उथले जड़ तंत्र वाली फसलों जैसे धान और गेहूँ के लिए ही उपयुक्त है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत के अपवाह तंत्र, विशेषकर हिमालयी और प्रायद्वीपीय नदियों के उद्गम, जल-विभाजन और उनकी अनुदैर्ध्य (longitudinal) विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. सिंधु, सतलज और ब्रह्मपुत्र नदियाँ पूर्ववर्ती (Antecedent) अपवाह तंत्र के उत्कृष्ट उदाहरण हैं, क्योंकि ये हिमालय के उत्थान से पहले से प्रवाहित हो रही थीं और इन्होंने हिमालय को काटकर गहरे गार्ज (Gorges) का निर्माण किया है।
2. प्रायद्वीपीय भारत का जल-विभाजन मुख्य रूप से पश्चिमी घाट (Sahyadri) द्वारा निर्मित होता है, जो तट के बहुत करीब उत्तर से दक्षिण की ओर चलता है और अधिकांश बड़ी प्रायद्वीपीय नदियाँ (जैसे गोदावरी, कृष्णा और कावेरी) पश्चिम से पूर्व की ओर बहते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती हैं, जबकि नर्मदा और ताप्ती इसके अपवाद स्वरूप पश्चिम की ओर बहती हैं।
3. सोन नदी, जो गंगा के दाहिने किनारे की एक प्रमुख सहायक नदी है, अमरकंटक पठार के उत्तर-पश्चिम हिस्से से निकलती है और कैमूर श्रेणी को पार करते हुए सीधे गंगा में मिलती है, जो प्रायद्वीपीय भारत से उत्तर की ओर प्रवाहित होने वाली एक अनूठी नदी है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार प्रायद्वीपीय नदियों की घाटियाँ परिपक्व अवस्था (Mature Stage) में पहुँच चुकी हैं और उनकी प्रवणता (Gradient) बहुत कम होती है, जिसके कारण वे उत्तर भारत की नदियों की तरह मण्डर (Meanders) या सर्पीलाकार मार्ग का निर्माण नहीं करती हैं और उनकी अधिकांश नदियाँ डेल्टा की बजाय ज्वारनदमुख (Estuaries) बनाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की जनगणना 2011 और मानवशास्त्रीय (Anthropological) जनसांख्यिकी के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जनजातियों (ST) का कुल प्रतिशत लगभग 8.6% है, और राज्यवार कुल जनसंख्या के अनुपात के आधार पर लक्षद्वीप और मिजोरम में ST आबादी का हिस्सा 90% से अधिक है।
2. भारत में अनुसूचित जनजातियों की कुल जनसंख्या का राज्यवार निरपेक्ष (Absolute) वितरण देखने पर, देश की कुल अनुसूचित जनजाति जनसंख्या का सबसे बड़ा हिस्सा मध्य प्रदेश राज्य में निवास करता है, जिसके पश्चात् महाराष्ट्र और ओडिशा का स्थान आता है।
3. बी.एस. गुहा (B.S. Guha) के शास्त्रीय मानवशास्त्रीय वर्गीकरण के अनुसार, भारत की मुख्य मानवजातियाँ प्रोटो-ऑस्ट्रोलायड, नेग्रिटो, मंगोलियाइड, भूमध्यसागरीय (Mediterranean) और नॉर्डिक हैं, जिनमें दक्षिण भारत की कुरुंबा, इरुला और पियन जैसी जनजातियाँ मुख्य रूप से प्रोटो-ऑस्ट्रोलायड प्रजाति से संबंध रखती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आंकड़ों के अनुसार भारत की कुल जनसंख्या में अनुसूचित जातियों (SC) का प्रतिशत लगभग 16.6% है, जिसमें उत्तर प्रदेश राज्य में देश की सर्वाधिक एससी (SC) जनसंख्या निवास करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय जलवायु और मानसून की उत्पत्ति से जुड़े 'जेट स्ट्रीम' (Jet Stream) तथा वायुमंडलीय क्रियाप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ग्रीष्मकाल में उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम (Subtropical Westerly Jet Stream) का तिब्बती पठार के दक्षिण से उत्तर की ओर विस्थापन होता है, जो भारत के ऊपर दक्षिण-पश्चिम मानसून के अचानक आगमन के लिए अनुकूल परिस्थितियां पैदा करता है।
2. भारतीय उपमहाद्वीप के ऊपर मानसूनी गर्त (Monsoon Trough) की स्थिति आईटीसीजेड (ITCZ) के उत्तर की ओर खिसकने का परिणाम है, जो गंगा के मैदान के ऊपर कम वायुदाब का एक क्षेत्र बनाता है।
3. शीतकाल में पश्चिमी जेट स्ट्रीम हिमालय पर्वत श्रृंखला द्वारा दो शाखाओं में विभाजित हो जाती है, जिसकी दक्षिणी शाखा भारत के उत्तरी मैदानों में 'पश्चिमी विक्षोभ' के माध्यम से वर्षा लाने में अप्रत्यक्ष रूप से मदद करती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Tropical Easterly Jet Stream) शीतकाल के दौरान भारत के ऊपर प्रवाहित होती है और प्रायद्वीपीय भारत में उत्तर-पूर्वी मानसून से भारी वर्षा कराती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पृथ्वी के प्रमुख पर्वत, पठार, मैदान और मरुस्थल की भू-आकृतिक विशेषताओं एवं उनकी उत्पत्ति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'एटलस पर्वतमाला' (Atlas Mountains) उत्तर-पश्चिम अफ्रीका में स्थित एक नवीन वलित पर्वत (Young Fold Mountain) है, जिसका निर्माण अल्पाइन भू-संचलन के दौरान अफ्रीकी और यूरेशियन प्लेटों के अभिसरण के फलस्वरूप हुआ है।
2. 'कोलोरैडो का पठार' (Colorado Plateau) संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित एक अंतरापर्वतीय पठार (Intermontane Plateau) है, जिसमें नदियो के अपरदन के कारण प्रसिद्ध 'ग्रैंड कैन्यन' (Grand Canyon) का निर्माण हुआ है।
3. 'ग्रेट विक्टोरिया मरुस्थल' ऑस्ट्रेलिया के दक्षिणी और पश्चिमी भाग में स्थित एक उष्णकटिबंधीय मरुस्थल है, जिसके शुष्क होने का मुख्य कारण उपोष्णकटिबंधीय उच्च वायुदाब पेटी का प्रभाव और महाद्वीप के आंतरिक भाग में अवस्थित होना है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'पेटागोनिया का पठार' (Patagonia Plateau) अर्जेंटीना में स्थित एक वृष्टिछाया मरुस्थलीय पठार है, जो एंडीज पर्वतमाला के पूर्व में स्थित होने के कारण मानसूनी वर्षा से वंचित रह जाता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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