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General Science
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सक्रियण ऊर्जा (Activation Energy) का मान हमेशा क्या होता है?

Detailed Explanation

अभिक्रिया के लिए ऊर्जा बाधा पार करना आवश्यक है।
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→ नाभिकीय भौतिकरी और कण त्वरकों (Particle Accelerators) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. साइक्लोट्रॉन (Cyclotron) एक ऐसा कण त्वरक है जिसका उपयोग आवेशित कणों (जैसे प्रोटॉन और ड्यूट्रॉन) को उच्च ऊर्जा तक त्वरित करने के लिए किया जाता है, और इसमें कणों को त्वरित करने के लिए एक समान चुंबकीय क्षेत्र और परिवर्ती (Oscillating) विद्युत क्षेत्र का एक साथ उपयोग होता है। 2. साइक्लोट्रॉन में उच्च ऊर्जा प्राप्त करने की एक मुख्य सीमा यह है कि जब इलेक्ट्रॉनों या हल्के कणों को अत्यधिक उच्च वेग तक त्वरित किया जाता है, तो आपेक्षिकीय प्रभाव (Relativistic effect) के कारण उनका द्रव्यमान बढ़ने लगता है, जिससे उनका आवर्तकाल उच्च आवृत्ति वाले प्रत्यावर्ती विभवांतर के साथ समकालिक (Synchronized) नहीं रह पाता है। 3. द्रव्यमान-ऊर्जा तुल्यता के सिद्धांत के अनुसार, जब किसी नाभिक का निर्माण उसके व्यक्तिगत न्यूट्रॉनों और प्रोटॉनों से होता है, तो कुल द्रव्यमान में होने वाली कमी (द्रव्यमान क्षति) नाभिकीय बंधन ऊर्जा के रूप में मुक्त होती है, और प्रति न्यूक्लियन बंधन ऊर्जा जितनी अधिक होती है, नाभिक उतना ही अधिक स्थायी होता है। 4. बीटा-क्षय ($eta$-decay) के दौरान उत्सर्जित होने वाले पॉजिट्रॉन ($e^+$) और इलेक्ट्रॉन ($e^-$) के अलावा, एक अनावेशित और अत्यंत कम द्रव्यमान वाला कण भी उत्सर्जित होता है जिसे 'न्यूट्रिनो' (Neutrino) कहा जाता है, और इसकी भविष्यवाणी सबसे पहले ऊर्जा और रैखिक संवेग संरक्षण के नियमों को संतुष्ट करने के लिए वोल्फगैंग पाउली द्वारा की गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं? → काजीरंगा? → T-कोशिका परिपक्वता? → पेनिसिलिन क्या है? → विद्युत परिपथों और चालकों के विद्युत गुणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. किसी धात्विक चालक का विद्युत प्रतिरोध (Electrical Resistance) उसके अनुप्रस्थ काट के क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है और तापमान में वृद्धि होने पर धात्विक चालकों का प्रतिरोध बढ़ जाता है क्योंकि मुक्त इलेक्ट्रॉनों का औसत विश्राम काल (Relaxation time) घट जाता है। 2. किर्चॉफ का द्वितीय नियम (पाश नियम या KVL) ऊर्जा संरक्षण के नियम पर आधारित है, जिसके अनुसार किसी बंद लूप में कुल विद्युत वाहक बलों का बीजगणितीय योग उस लूप के विभिन्न भागों में उत्पन्न विभवांतरों के बीजगणितीय योग के बराबर होता है। 3. जब कई प्रतिरोधकों को समांतर क्रम (Parallel) में जोड़ा जाता है, तो परिपथ का कुल समतुल्य प्रतिरोध प्रत्येक व्यक्तिगत प्रतिरोध से कम होता है, और परिपथ की कुल धारा व्यक्तिगत धाराओं के योग के बराबर होती है। 4. एक आदर्श अमीटर का आंतरिक प्रतिरोध अनंत होना चाहिए ताकि वह जिस श्रेणीक्रम में जोड़ा जाए, उससे अधिकतम धारा प्रवाहित हो सके और वह धारा का यथार्थ मापन कर सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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