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Geography
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भारत में सिंचाई के प्रमुख साधनों, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic zones) और फसल प्रणालियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. भारत के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र में 'नलकूप और अन्य कुओं' (Tube wells and wells) का हिस्सा सर्वाधिक है, जिसमें उत्तर प्रदेश, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्य अग्रणी हैं, जबकि नहर सिंचाई का दूसरा सबसे बड़ा भाग उत्तर भारत के जलोढ़ मैदानों में पाया जाता है।
  2. 2. 'धान' (Rice) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है, जिसके लिए उच्च तापमान (25°C से ऊपर), उच्च आर्द्रता और 100 सेमी से अधिक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है, किंतु भारत के पूर्वी तटीय डेल्टा क्षेत्रों और पंजाब-हरियाणा जैसे कम वर्षा वाले राज्यों में इसे नहरों और नलकूपों की भारी सिंचाई के माध्यम से सफलतापूर्वक उगाया जाता है।
  3. 3. 'ड्रिप सिंचाई' (Drip Irrigation) और 'फव्वारा सिंचाई' (Sprinkler Irrigation) जैसी सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियाँ न केवल जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अधिकतम करती हैं, बल्कि मृदा के क्षारीय होने और भूजल स्तर के अत्यधिक दोहन को भी पूरी तरह से रोक देती हैं।
  4. 4. मिश्रित कृषि (Mixed Farming) के अंतर्गत फसलों के उत्पादन के साथ-साथ पशुपालन और कुक्कुट पालन को भी एक साथ अपनाया जाता है, जो भारतीय किसानों के लिए जोखिम को कम करने और वर्ष भर आय सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है क्योंकि भारत के शुद्ध सिंचित क्षेत्र में नलकूप और कुओं का हिस्सा सबसे अधिक है, जिससे लगभग 60% से अधिक सिंचाई होती है। कथन 2 सही है क्योंकि धान एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है जिसे पारंपरिक वर्षा के अलावा पंजाब और हरियाणा जैसे अर्ध-शुष्क राज्यों में भी भारी सिंचाई के बल पर उगाया जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि सूक्ष्म सिंचाई पद्धतियाँ (ड्रिप और स्प्रिंकलर) जल दक्षता को सुधारती हैं, लेकिन वे भूजल के 'अत्यधिक दोहन' को पूरी तरह से रोक नहीं पाती हैं, बल्कि बिना उचित नियमन के इनका अत्यधिक उपयोग भूजल स्तर में और गिरावट का कारण बन सकता है। कथन 4 सही है क्योंकि मिश्रित कृषि में फसलों के साथ-साथ पशुपालन को भी प्रमुखता दी जाती है। अधिक जानकारी के लिए सिंचाई विकिपीडिया लेख देखें।
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