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Geography
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पृथ्वी की आंतरिक संरचना और चट्टानों (शैल चक्र) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पृथ्वी की क्रस्ट (Crust) और ऊपरी मेंटल के ठोस हिस्से को मिलाकर 'स्थलमंडल' (Lithosphere) कहा जाता है, जिसकी औसत मोटाई महाद्वीपों के नीचे लगभग 100 किमी होती है और यह दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) पर तैरता है।
- 2. रूपांतरित चट्टानें (Metamorphic Rocks) मूल रूप से आग्नेय या अवसादी चट्टानों के अत्यधिक ताप, दाब और रासायनिक सक्रिय द्रवों के प्रभाव से अपने मूल रूप और खनिज संयोजन में परिवर्तन (कायांतरण) के फलस्वरूप बनती हैं, जैसे चूना पत्थर का संगमरमर में बदलना।
- 3. मोहरोविकिक असांतत्य (Mohorovicic Discontinuity) क्रस्ट और मेंटल के बीच की सीमा रेखा है, जबकि गुटेनबर्ग असांतत्य (Gutenberg Discontinuity) बाहरी क्रोड (Outer Core) और आंतरिक क्रोड (Inner Core) के बीच स्थित है।
- 4. बेसाल्टिक मैग्मा के ठंडे होने से बनी 'ग्रेनाइट' चट्टानें अंतर्भेदी (Intrusive) आग्नेय चट्टानों का प्रमुख उदाहरण हैं, जो महाद्वीपीय क्रस्ट के निर्माण में मुख्य भूमिका निभाती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि स्थलमंडल (Lithosphere) क्रस्ट और ऊपरी ठोस मेंटल से मिलकर बनता है, जिसकी औसत मोटाई लगभग 100 किमी होती है और यह अर्द्ध-पिघले दुर्बलतामंडल (Asthenosphere) के ऊपर तैरता है। कथन 2 सही है क्योंकि अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण आग्नेय या अवसादी चट्टानों का कायांतरण (Metamorphism) होता है, जिससे चूना पत्थर संगमरमर में परिवर्तित हो जाता है। कथन 3 गलत है क्योंकि गुटेनबर्ग असांतत्य 'निचले मेंटल' और 'बाहरी क्रोड' के बीच स्थित है, न कि बाहरी और आंतरिक क्रोड के बीच (आंतरिक और बाहरी क्रोड के बीच लेहमैन असांतत्य होता है)। कथन 4 गलत है क्योंकि ग्रेनाइट एक अंतर्भेदी (Intrusive) आग्नेय चट्टान है जो सिलिका-समृद्ध (Felsic) होती है और महाद्वीपीय क्रस्ट बनाती है, किंतु बेसाल्टिक मैग्मा से मुख्य रूप से 'ग्रेनाइट' नहीं बल्कि 'बेसाल्ट' (एक बहिर्भेदी चट्टान) का निर्माण होता है। पृथ्वी की परतों और चट्टानों के विस्तृत अध्ययन के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि क्षेत्रों और फसल वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत के कुल शुद्ध सिंचित क्षेत्र (Net Irrigated Area) में 'नलकूप और अन्य कुओं' (Tube wells and other wells) का हिस्सा सर्वाधिक है, जो देश की कुल सिंचाई का लगभग 60% से अधिक भाग सिंचित करते हैं, जबकि नहरें दूसरे स्थान पर आती हैं।
2. 'गेहूँ' एक शीतोष्ण कटिबंधीय रबी फसल है, जिसके सफल उत्पादन के लिए अंकुरण के समय ठंडी और नम जलवायु तथा पकते समय तेज धूप की आवश्यकता होती है, और यह देश के उत्तर-पश्चिमी मैदानी भागों (विशेषकर पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश) में व्यापक रूप से उगाई जाती है।
3. 'ज्वार' एक प्रमुख खरीफ फसल है जो मुख्य रूप से दक्षिणी और मध्य भारत के कम वर्षा वाले अर्ध-शुष्क (Semi-arid) क्षेत्रों में उगाई जाती है, क्योंकि यह सूखा सहन करने में सक्षम होती है।
4. सूक्ष्म सिंचाई तकनीकों (जैसे ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई) का प्रसार जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अत्यधिक बढ़ाता है और वाष्पीकरण तथा क्षरण द्वारा होने वाले जल की बर्बादी को नियंत्रित करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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पवन प्रणालियों, आर्द्रता के प्रकारों और चक्रवातों की गतिशीलता के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'नार्वेस्टर' (Norwesters) या 'काल बैसाखी' स्थानीय रूप से उत्पन्न होने वाली तड़ित झंझावात (Thunderstorms) हैं, जो मुख्य रूप से असम और पश्चिम बंगाल राज्यों में ग्रीष्मकाल के अंत में आती हैं और चाय, जूट तथा धान की फसलों के लिए अत्यधिक लाभकारी होती हैं।
2. सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) किसी वायु parcel में मौजूद जलवाष्प के वास्तविक भार और उसी तापमान पर उस वायु की अधिकतम जलवाष्प धारण करने की क्षमता का अनुपात होती है, और यह तापमान में वृद्धि के साथ बढ़ती है।
3. 'फॉन' (Foehn) एक स्थानीय गर्म और शुष्क पवन है, जो आल्प्स पर्वत को पार करते समय उसकी उत्तर की ढलान पर नीचे उतरती है, जिससे घाटी के क्षेत्रों में बर्फ जल्दी पिघलती है और अंगूर की फसल पकने में सहायता मिलती है।
4. उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के विपरीत, शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात (Temperate Cyclones) केवल महासागरों पर उत्पन्न होते हैं और इनमें उष्णकटिबंधीय चक्रवातों की तरह कोई स्पष्ट 'चक्रवात की आँख' (Eye of the Cyclone) नहीं पाई जाती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत की जलवायु और दक्षिण-पश्चिम मानसून की उत्पत्ति तथा वर्षा के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. दक्षिण-पश्चिम मानसून की 'अरब सागर शाखा' और 'बंगाल की खाड़ी शाखा' दोनों की उत्पत्ति का मुख्य कारण ग्रीष्मकाल में भारतीय उपमहाद्वीप पर अत्यधिक ताप के कारण विकसित होने वाला तीव्र निम्न वायुदाब (Low Pressure) और मेडागास्कर के पूर्व में स्थित मस्कारेन उच्च दबाव पेटी से उत्पन्न होने वाली दक्षिणी गोलार्ध की व्यापारिक हवाओं का उत्तर की ओर बढ़ना है।
2. तमिलनाडु के तट पर शीतकाल में वर्षा मुख्य रूप से 'उत्तर-पूर्वी मानसून' (Retreating Monsoon / Winter Monsoon) के कारण होती है, क्योंकि ये हवाएं बंगाल की खाड़ी से नमी ग्रहण करके कोरोमंडल तट पर वर्षा करती हैं, जबकि ग्रीष्मकाल में यह क्षेत्र वृष्टिछाया क्षेत्र (Rain shadow area) में स्थित होने के कारण सूखा रहता है।
3. 'एल नीनो' (El Niño) घटना, जो प्रशांत महासागर में पेरू के तट पर गर्म जलधारा के प्रकट होने से संबंधित है, भारतीय मानसून को आमतौर पर मजबूत करती है और इसके प्रभाव से भारत में सामान्य से अधिक वर्षा दर्ज की जाती है।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में मानसून का 'प्रस्फोट' (Burst of Monsoon) सबसे पहले केरल के तट पर जून के प्रथम सप्ताह में होता है, जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय पूर्वी जेट स्ट्रीम (Tropical Easterly Jet Stream) और उत्तर भारत के मैदानी भागों में थर्मल लो प्रेशर के सक्रिय होने से जुड़ा हुआ है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत में सिंचाई पद्धतियों, कृषि जलवायु क्षेत्रों (Agro-climatic Zones) और प्रमुख फसलों के वितरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 'सूक्ष्म सिंचाई' (Micro-irrigation) के अंतर्गत टपक सिंचाई (Drip Irrigation) और फव्वारा सिंचाई (Sprinkler Irrigation) प्रणालियाँ आती हैं, जो जल उपयोग दक्षता (Water Use Efficiency) को अधिकतम करती हैं और इनके तहत राष्ट्रीय सूक्ष्म सिंचाई मिशन (NMMI) में भूजल एवं सतही जल दोनों के कुशल उपयोग पर बल दिया जाता है।
2. भारत में 'धान' (Rice) एक उष्णकटिबंधीय खरीफ फसल है, जिसके सफल उत्पादन के लिए उच्च तापमान (25°C से ऊपर), उच्च आर्द्रता और वार्षिक वर्षा 100 सेमी से अधिक की आवश्यकता होती है, किंतु पंजाब और हरियाणा जैसे कम वर्षा वाले राज्यों में नहरों के जाल और नलकूपों के माध्यम से इसकी बड़े पैमाने पर खेती की जाती है।
3. 'झूम कृषि' (Shifting Cultivation), जिसे उत्तर-पूर्वी राज्यों में 'झूम' कहा जाता है, एक प्रकार की स्थाई कृषि पद्धति है जिसमें रासायनिक उर्वरकों का अत्यधिक उपयोग करके एक ही भूमि पर वर्षभर गहन फसलें उगाई जाती हैं।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार भारत में 'गेहूँ' रबी की एक प्रमुख फसल है, जिसके लिए समशीतोष्ण जलवायु, मध्यम तापमान (बुवाई के समय 10°-15°C और पकते समय 20°-25°C) तथा लगभग 50 से 75 सेमी वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत की पर्वत प्रणालियों, प्रमुख पर्वत श्रेणियों और घाटियों के निर्माण तथा उनकी भौगोलिक विशेषताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महान हिमालय (Great Himalaya) श्रेणी मुख्य रूप से अत्यधिक कायांतरित और क्रिस्टलीय चट्टानों (जैसे ग्रेनाइट और गनीस) से बनी है, तथा इसकी संरचना असममित (Asymmetrical) है जिसका दक्षिणी ढलान तीव्र और उत्तरी ढलान मंद है।
2. 'पीर पंजाल श्रेणी' (Pir Panjal Range) लघु हिमालय (Lesser Himalaya) की सबसे लंबी और सबसे पश्चिमी श्रेणी है, जो मुख्य रूप से हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में फैली हुई है तथा इसी श्रेणी में प्रसिद्ध बनिहाल दर्रा स्थित है जो जम्मू को श्रीनगर से जोड़ता है।
3. 'मर्खा घाटी' (Markha Valley) लद्दाख क्षेत्र में स्थित एक उच्च तुंगता वाली घाटी है, जो हेमिस राष्ट्रीय उद्यान के अंतर्गत आती है और इसका निर्माण शिवालिक श्रेणी के तीव्र उत्थान के परिणामस्वरूप हुआ था।
4. विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार 'कश्मीर घाटी' (Kashmir Valley) एक अभिनति (Synclinorial) घाटी है जो पीर पंजाल और महान हिमालय श्रेणियों के बीच स्थित है और इसका निर्माण टेथिस सागर के अवशेषों के उत्थान एवं अवसादन के कारण हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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